आगे अंधी गली हैं

उच्चतम न्यायालय ने जाकिया जाफरी की याचिका को खारिज कर नानावती आयोग की रिपोर्ट पर मुहर लगा दी है। आपाधापी के दौर में, सूचनाओं के कुकरहाव में अधिकांश नानावती आयोग … Read More

साइमन कमीशन गो बैक

‘असहयोग आंदोलन’ की विफलता और ‘सविनय अवज्ञा’ आंदोलन की शुरुआत के मध्य का समय (1922-30) इस दृष्टि से खासा महत्वपूर्ण कहा जा सकता है कि एक तरफ गांधी और जिन्ना … Read More

नफरत का तंत्रिका विज्ञान

देश में चौतरफा पसरे और गहरे पसरते जा रहे नफरत के माहौल का सीधा नाता हमारे तंत्रिका विज्ञान (Neurological Science) से है। घृणा, नफरत, हिंसा और ‘हम’ की श्रेष्ठता और … Read More

गांधी और जिन्ना की हताशा का दौर

पिचहत्तर बरस का भारत/भाग-14 पांच फरवरी, 1922 के दिन ‘चौरी चोरा’ में हुई भारी हिंसा से विचलित महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन को स्थगित करने का मन बना लिया था। … Read More

जहां अज्ञानता परमानंद हो

आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे देश के बीते पिचहत्तर बरसों को समझने का मेरा इरादा, वर्तमान से मेरा नाता टूटने का कारण बनता जा रहा है। बीते चौदह हफ्तों … Read More

माफीनामा दर माफीनामा

पिचहत्तर बरस का भारत/भाग-13     पचास बरस की सजा काटने अंडमान जेल भेजे गए  सावरकर  का मनोबल मात्र कुछ महीनों के भीतर ही टूट गया।  सावरकर विलक्षण प्रतिभाशाली थे। उनके … Read More

कैदी नंबर 1960

धींगरा को फांसी पर चढ़ाए जाने से ठीक एक दिन पहले 16 अगस्त, 1909 को ‘डेली न्यूज’ में उनका अंतिम वक्तव्य प्रकाशित प्रकाशित हुआ था। यह अद्भुत साहसी और रोमांचकारी … Read More

सावरकर इंग्लैंड में

पिचहत्तर बरस का भारत/भाग-11 सावरकर लंबी समुंद्र यात्रा के बाद 3 जुलाई, 1906 को लंदन पहुंच गए। यहां उनकी रिहाइश बना श्यामजी कृष्ण वर्मा का ‘इंडिया हाउस’। श्यामजी ने ही … Read More

‘मित्र मेला’, ‘अभिनव भारत’ और सावरकर

पिचहत्तर बरस का भारत/भाग-10 वर्ष 1857 के गदर बाद अंग्रेज शासित भारत में बहुत  कुछ, बहुत तेजी से बदलने लगा था। ईस्ट इंडिया कंपनी को भारत की शासन व्यवस्था से … Read More

इतिहास हमेशा आंशिक सत्य मात्र होता है

पिचहत्तर बरस का भारत/भाग-9   इतिहास के जरिए वर्तमान को समझा जा सकता है, यहां तक की भविष्य की घटनाओं का शर्तिया अनुमान तक लगाया जा सकता है। यह स्थापित … Read More

गांधी का उत्कर्ष काल

पिचहत्तर बरस का भारत-भाग-8   जलियांवाला बाग कांड ने पूरे पराधीन भारत को झकझोर कर रख दिया था। रॉलेट एक्ट और इस कांड के चलते ब्रिटिश हुकूमत 1919 के अंत … Read More

 गांधी का शक्ति केंद्र बनना और जिन्ना का कांग्रेस से इस्तीफा

पिचहत्तर बरस का भारत-7 प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ही ब्रिटिश हुकूमत ने भारत में उनकी सत्ता के खिलाफ तेज हो रहे माहौल को ठंडा करने की नीयत से ‘स्वराज’ … Read More

 ब्रिटिश हुकूमत से मुसलमानों का मोहभंग होना 

पिचहत्तर बरस का भारत-6   वर्तमान समय को ग्लोबलाइजेशन का, वैश्वीकरण का, दौर कहा जाता है। पूरी दुनिया के एक विशाल गांव में बदल जाने का समय। ऐसा समय जब … Read More

 गांधी और जिन्ना की पहली ‘अप्रिय’ मुलाकात

पिचहत्तर बरस का भारत-5 महात्मा गांधी 1915 में दक्षिण अफ्रीका से वापस भारत लौट कर आ गए थे। उनकी कीर्ति और अफ्रीका में अश्वेत लोगों के लिए किए गए उनके … Read More

हिंदू-मुस्लिम एकता के सर्वश्रेष्ठ राजदूत

पिचहत्तर बरस का भारत- 4   हिंदू-मुस्लिम एकता के सर्वश्रेष्ठ राजदूत लॉर्ड कर्जन के बाद भारत के वायसराय बने लॉर्ड मिण्टो ब्रिटिश भारत में तेज हो रही राजनीतिक चेतना के नतीजों … Read More