चार लाख से साढ़े पांच करोड़ तक की उड़ान
उत्तराखण्ड के दो युवा नीरज सनवाल और जतिन पटवाल ने चार लाख रुपए की पूंजी से ‘सेवन चीज पिज्जा’ की शुरुआत कर यह साबित किया कि बड़े कारोबार की शुरुआत हमेशा बड़ी पूंजी से नहीं होती। आज करीब साढ़े पांच करोड़ रुपए के वार्षिक टर्नओवर तक पहुंच चुका यह कारोबार 15 से अधिक आउटलेट के जरिए करीब 150 लोगों को रोजगार दे रहा है
उत्तराखण्ड के युवाओं में हुनर और हौसले की कोई कमी नहीं है, बशर्ते उन्हें सही दिशा और अवसर मिले। राज्य के दो युवाओं नीरज सनवाल और जतिन पटवाल ने इस बात को सच कर दिखाया है। विपरीत परिस्थितियों के बीच शुरू किया गया उनका ‘सेवन चीज पिज्जा’ पिज्जा को सिर्फ बड़े और स्थापित ब्रांड्स तक सीमित मानने की सोच को बदलने की कोशिश है। करीब चार लाख रुपए की पूंजी से शुरू किए गए ‘सेवन चीज पिज्जा’ का वार्षिक टर्नओवर आज करीब साढ़े पांच करोड़ रुपए तक पहुंच चुका है।
इस सफर के पीछे जहां नीरज सनवाल की मां और उनके भाई हिमांशु का किरदार बेहद अहम रहा, वहीं उनके कुछ मित्र भी इस यात्रा में महत्वपूर्ण सहयोगी रहे। कारोबार शुरू करना किसी का व्यक्तिगत फैसला होता है लेकिन किसी निम्न मध्यवर्गीय परिवार के लिए संघर्ष का यह समय पूरे परिवार के लिए उस परीक्षा की तरह होता है जहां असफल होने की थोड़ी सी भी गुंजाइश आत्मविश्वास को जमीन पर ला सकती है। कारोबार ही नहीं, जीवन की मुश्किलों में नीरज की मां और भाई का संघर्ष नीरज के लिए बड़ी ताकत बना। किसी भी सफल कारोबार के पीछे सिर्फ एक आइडिया नहीं होता। उसके पीछे जोखिम उठाने का साहस, असफलताओं से लड़ने का हौसला और सबसे बढ़कर अपने फैसले पर भरोसा होता है। ‘सेवन चीज पिज्जा’ के संस्थापक नीरज सनवाल और जतिन पटवाल की कहानी भी कुछ ऐसी ही है।
हल्द्वानी के एमबीपीजी काॅलेज से बीकाॅम की पढ़ाई पूरी करने के बाद नीरज ने आगे की पढ़ाई के बजाय पारिवारिक परिस्थितियों के चलते नौकरी चुनी। पिज्जा इंडस्ट्री से उनका पहला परिचय डाॅमिनोज पिज्जा के साथ हुआ। उन्होंने बैंगलोर, दिल्ली, हरिद्वार और देहरादून जैसे शहरों में काम किया। नौकरी के दौरान उन्होंने पिज्जा कारोबार को सिर्फ कर्मचारी की नजर से नहीं बल्कि धीरे-धीरे एक सम्भावित उद्यमी की नजर से देखना शुरू किया। स्टोर संचालन से लेकर ग्राहकों की पसंद, प्रोडक्ट की गुणवत्ता, कर्मचारियों के प्रशिक्षण, डिलीवरी और मैनेजमेंट तक फूड बिजनेस की कई बारीकियां उन्होंने नौकरी के दौरान सीखीं लेकिन अनुभव बढ़ने के साथ उनके मन में एक सवाल भी बड़ा होता गया कि क्या यही नौकरी उनकी अंतिम मंजिल है? नौकरी चल रही थी लेकिन भीतर वह संतुष्टि नहीं थी जिसकी नीरज तलाश कर रहे थे। इसी दौरान नीरज और जतिन के बीच यह समझ बनी कि अगर कोई कारोबार शुरू करेंगे तो मिलकर करेंगे। यहीं से अपना कारोबार शुरू करने के विचार ने जन्म लिया।
अपना कारोबार शुरू करने का विचार आसान था लेकिन उसे जमीन पर उतारना उतना ही मुश्किल। उस समय नीरज के पास कोई बड़ा वित्तीय सपोर्ट नहीं था। न कोई बड़ी पूंजी थी और न कोई काॅरपोरेट बैकअप। ऐसे समय में उन्होंने अपने एक मित्र को इस नए काम के लिए साथ आने के लिए तैयार किया। दोनों ने जोखिम उठाया और एक छोटे से प्रयास के रूप में ‘सेवन चीज पिज्जा’ की नींव रखी।
शुरुआती दौर में कुछ पैसा बाजार से भी उठाना पड़ा लेकिन नीरज को अपने काम और अपनी क्षमता पर इतना भरोसा था कि कुछ ही महीनों में उन्होंने वह रकम वापस चुका दी। यह उनके लिए सिर्फ आर्थिक सफलता नहीं थी बल्कि उस विश्वास का पहला बड़ा इम्तिहान था जो उन्होंने नौकरी छोड़कर अपने कारोबार पर लगाया था।
वर्ष 2019 के अंत में नीरज सनवाल ने इसकी शुरुआत की। कुछ समय बाद जतिन पटवाल भी इस सफर में उनके साथ जुड़े। शुरुआत के कुछ ही समय बाद कोरोना महामारी और लाॅकडाउन ने कारोबार के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी लेकिन मुश्किल परिस्थितियों में भी कारोबार को जारी रखने का रास्ता निकाला गया। ऐसी ही चुनौती कोरोना की दूसरी लहर के दौरान भी आई।
वर्ष 2019 के अंत में नीरज सनवाल ने इसकी शुरुआत की। कुछ समय बाद जतिन पटवाल भी इस सफर में उनके साथ जुड़े। शुरुआत के कुछ ही समय बाद कोरोना महामारी और लाॅकडाउन ने कारोबार के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी लेकिन मुश्किल परिस्थितियों में भी कारोबार को जारी रखने का रास्ता निकाला गया। ऐसी ही चुनौती कोरोना की दूसरी लहर के दौरान भी आई।
लॉकडाउन के दौरान बाजार में डिलीवरी को सीमित समय की अनुमति थी। इसी तय समय-सीमा के भीतर ‘सेवन चीज पिज्जा’ ने ग्राहकों तक अपनी डिलीवरी पहुंचाई। उस दौर की मुश्किलों ने कारोबार को रोकने के बजाय टीम को हालात के अनुसार काम करने और सिस्टम विकसित करने का अनुभव दिया।
नीरज सनवाल और जतिन पटवाल के लिए कारोबार का मूल मंत्र सिर्फ अधिक आउटलेट खोलना नहीं है। उनका कहना है कि ग्राहक को ऐसा उत्पाद मिलना चाहिए, जिसकी कीमत के मुकाबले उसे गुणवत्ता और स्वाद का पूरा मूल्य मिले। इसी सोच के तहत कीमत को भी अपेक्षाकृत किफायती रखने का प्रयास किया जा रहा है।
नीरज सनवाल मानते हैं कि बड़े ब्रांड जहां अपने संचालन में लागत कम करने के लिए कई स्तरों पर काॅस्ट कटिंग करते हैं, वहीं कम मैनेजमेंट ओवरहेड के कारण ‘सेवन चीज पिज्जा’ अपने ग्राहकों को कम कीमत में बेहतर उत्पाद देने की कोशिश कर रहा है। नीरज का मानना है कि मुनाफा उतना मायने नहीं रखता, पहला उद्देश्य ग्राहक को ‘वैल्यू आॅफ मनी’ देना है। आज किसी प्रोडक्ट की पहचान उसके ब्रांड से होती है लेकिन वह चाहते हैं कि ‘सेवन चीज पिज्जा’ की पहचान उसके प्रोडक्ट से हो।
नीरज सनवाल मानते हैं कि बड़े ब्रांड जहां अपने संचालन में लागत कम करने के लिए कई स्तरों पर काॅस्ट कटिंग करते हैं, वहीं कम मैनेजमेंट ओवरहेड के कारण ‘सेवन चीज पिज्जा’ अपने ग्राहकों को कम कीमत में बेहतर उत्पाद देने की कोशिश कर रहा है। नीरज का मानना है कि मुनाफा उतना मायने नहीं रखता, पहला उद्देश्य ग्राहक को ‘वैल्यू आॅफ मनी’ देना है। आज किसी प्रोडक्ट की पहचान उसके ब्रांड से होती है लेकिन वह चाहते हैं कि ‘सेवन चीज पिज्जा’ की पहचान उसके प्रोडक्ट से हो।
‘सेवन चीज पिज्जा’ का विस्तार केवल आउटलेट की संख्या तक सीमित नहीं है। इसके साथ रोजगार का एक नेटवर्क भी तैयार हुआ है। एक स्टोर में सामान्यतः 10 या उससे अधिक लोगों को रोजगार मिला है। अलग-अलग आउटलेट्स और संचालन व्यवस्था के जरिए अब तक करीब 150 लोगों को रोजगार दिया जा चुका है।
खास बात यह है कि कर्मचारियों को केवल भर्ती करके काम पर नहीं लगाया जाता बल्कि उन्हें प्रशिक्षित करने पर भी जोर दिया जाता है। गुणवत्ता बनाए रखने के लिए प्रशिक्षण को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। नए कारीगरों को पहले प्रशिक्षित किया जाता है और अनुभव हासिल करने के बाद उन्हें अगले स्टोर में जिम्मेदारी दी जाती है। इस पूरी प्रक्रिया में सुपरविजन पर लगातार नजर रखी जाती है, ताकि अलग-अलग शहरों में आउटलेट होने के बावजूद उत्पाद की गुणवत्ता और बनाने का तरीका एक जैसा बना रहे।
इस कारोबार की सोच का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि उन्होंने केवल तत्काल मुनाफे को प्राथमिकता नहीं दी है। उनका कहना है कि मुनाफा थोड़ा कम हो जाए तो भी कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन कारोबार लम्बे समय तक टिकाऊ तरीके से चलता रहे, यही उनका लक्ष्य है। यही वजह है कि ‘सेवन चीज पिज्जा’ का विस्तार बड़े काॅरपोरेट माॅडल की तरह भारी-भरकम मैनेजमेंट ढांचे के बजाय अपेक्षाकृत सरल व्यवस्था के साथ किया जा रहा है।
अपना पहला सेंटर ऊधमसिंह नगर जिले के दिनेशपुर में शुरू करने के बाद ‘सेवन चीज पिज्जा’ ने पहाड़ का रुख किया। गढ़वाल में टिहरी, चम्बा, उत्तरकाशी, पौड़ी, चमोली, गोपेश्वर और भानियावाला तक पहुंच बनाई। वहीं कुमाऊं में खटीमा, चम्पावत, लोहाघाट, अल्मोड़ा, हल्द्वानी और कालाढूंगी सहित कई शहरों में आउटलेट खुले। आज इसके 15 से अधिक आउटलेट संचालित हो रहे हैं।
उत्तरकाशी, पौड़ी, टिहरी और गोपेश्वर में फ्रेंचाइजी माॅडल भी अपनाया गया है। अब चंडीगढ़ और नोएडा से भी फ्रेंचाइजी को लेकर पूछताछ आ रही है। यानी दिनेशपुर से शुरू हुई यह पहल अब उत्तराखण्ड से बाहर सम्भावनाएं तलाश रही है।
नीरज सनवाल की कहानी बताती है कि कारोबार शुरू करने के लिए हमेशा बड़ी पूंजी जरूरी नहीं होती। कभी-कभी एक छोटे से विचार, अपने काम पर भरोसे और मुश्किल समय में साथ खड़े रहने वाले कुछ लोगों से भी एक बड़ा सफर शुरू किया जा सकता है।
आज ‘सेवन चीज पिज्जा’ की पहचान सिर्फ पिज्जा बेचने वाले आउटलेट की नहीं बल्कि उत्तराखण्ड से निकले एक ऐसे स्थानीय उद्यम के रूप में बन रही है जो बड़े ब्रांड्स के बीच अपनी जगह अपने उत्पाद के दम पर बनाने की कोशिश कर रहा है। यह कहानी सिर्फ पिज्जा कारोबार की नहीं बल्कि उस सोच की भी है जिसमें नौकरी तलाशने वाला युवा खुद रोजगार पैदा करने की राह चुनता है। शायद यही स्वरोजगार की सबसे बड़ी ताकत है, छोटी शुरुआत, बड़ा सपना और अपने दम पर आगे बढ़ने का हौसला।
