कटघरे में सरकारी शिक्षा व्यवस्था

कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी इस समय राजस्थान में एक्टिव मोड में है। उसका ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान राज्य के सरकारी स्कूलों की जमीनी स्थिति को सामने लाने की कोशिश … Read More

गौरव से गर्त तक

भारतीय पत्रकारिता का इतिहास जब भी लिखा जाएगा, उसमें कुछ नाम ऐसे होंगे जिन्हें न तो नजरअंदाज किया जा सकेगा और न ही एक ही रंग में रंगा जा सकेगा। … Read More

समाजवाद से सनातन तक

नीतीश कुमार को शायद आज मेरी याद न हो लेकिन मैं उन्हें आज भी अपना मित्र मानता हूं। यह मित्रता किसी राजनीतिक लाभ या निजी स्वार्थ की नहीं थी। एक … Read More

न्याय के मंदिर में संवेदना का क्षय

भारत के संविधान की प्रस्तावना में न्याय, सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक को सबसे पहले स्थान दिया गया है। यह कोई संयोग नहीं था। संविधान निर्माताओं को पता था कि लोकतंत्र … Read More

सम्पादकीय विचारधारा की मृत्यु

नौ जुलाई की एक राजनीतिक खबर ने मुझे देर तक सोचने के लिए मजबूर कर दिया। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के तीन पूर्व राज्यसभा सांसद, सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता … Read More

क्या सरकार की आलोचना अपराध है?

भारत का लोकतंत्र इस विश्वास पर खड़ा है कि सत्ता जनता से निकलती है और जनता के प्रति ही जवाबदेह रहती है। संविधान ने सरकार को शासन करने की शक्ति … Read More

नारी शक्ति के दावों की कसौटी पर भारत

‘‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः। यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः।।’’ मनुस्मृति (अध्याय 3, श्लोक 56) का यह प्रसिद्ध श्लोक भारतीय संस्कृति में नारी के स्थान को रेखांकित करता है। … Read More

गोदी मीडिया, ग्लोबल सवाल और लोकतंत्र

भारतीय लोकतंत्र का शायद यह सबसे दिलचस्प लेकिन सबसे चिंताजनक दौर है कि देश के प्रधानमंत्री खुले प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवाल नहीं लेते लेकिन ‘नाॅन-पॉलिटिकल इंटरव्यू’ में यह जरूर बताते … Read More

जनरल खण्डूड़ी और मैं

मेजर जनरल भुवन चंद्र खण्डूड़ी से मेरा परिचय उस दौर में हुआ जब वे अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में सड़क परिवहन मंत्री थे। दिल्ली में उनसे मुलाकातें होती रहती थीं। … Read More

बदलता शोषण, बदलता संघर्ष

एल्गोरिथम क्या है? सरल शब्दों में, एल्गोरिथम निर्देशों का एक ऐसा क्रम set of instructions) है जो यह तय करता है कि किसी स्थिति में क्या निर्णय लिया जाएगा। कौन-सा … Read More

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और न्यायपालिका

उत्तराखण्ड के कोटद्वार से निकला और देशभर के जनमानस को झकझोरने वाला ‘मोहम्मद दीपक’ मामला एक साधारण प्रकरण नहीं है बल्कि यह उस जटिल लोकतांत्रिक विमर्श का हिस्सा बन जाता … Read More

एक निजी अनुभव, एक सामूहिक संकट

मैं उत्तराखण्ड का रहने वाला हूं। रानीखेत में पैदा हुआ, वहीं पला-बढ़ा और फिर जीवन की जरूरतों ने मुझे प्रवासी बना दिया। लेकिन अपनी मातृभूमि का मोह ऐसा है कि … Read More