मानवीय सरोकारों से ओत-प्रोत थे राजीव
पिचहत्तर बरस का भारत/भाग-120 वर्ष 1987 में देश के 21 राज्यों में भारी सूखा पड़ा था। राजीव सरकार ने इस सूखे से निपटने के लिए व्यापक स्तर पर राहत पहुंचाने … Read More
पिचहत्तर बरस का भारत/भाग-120 वर्ष 1987 में देश के 21 राज्यों में भारी सूखा पड़ा था। राजीव सरकार ने इस सूखे से निपटने के लिए व्यापक स्तर पर राहत पहुंचाने … Read More
मेरी बात हर तरफ धुआं है हर तरफ कुहासा है जो दांतों और दलदलों का दलाल है वही देशभक्त है अंधकार में सुरक्षित होने का नाम है- तटस्थता। यहां … Read More
पिचहत्तर बरस का भारत/भाग-43 नेहरू के इस शानदार पत्र का जवाब वल्लभ भाई पटेल ने उतनी ही ईमानदारी से देते हुए कहा ‘मैं आपके स्नेह और आपकी भावनाओं से अभिभूत … Read More
पिचहत्तर बरस का भारत/भाग-29 वर्ष 1945 की शुरुआत मित्र शक्तियों (एलीज पावर) के मजबूत और धुरी राष्ट्रों (एक्सिस पावर) के कमजोर होने से हुई। 30 अप्रैल, 1945 को हिटलर ने … Read More
धींगरा को फांसी पर चढ़ाए जाने से ठीक एक दिन पहले 16 अगस्त, 1909 को ‘डेली न्यूज’ में उनका अंतिम वक्तव्य प्रकाशित प्रकाशित हुआ था। यह अद्भुत साहसी और रोमांचकारी … Read More
पिचहत्तर बरस का भारत/भाग-11 सावरकर लंबी समुंद्र यात्रा के बाद 3 जुलाई, 1906 को लंदन पहुंच गए। यहां उनकी रिहाइश बना श्यामजी कृष्ण वर्मा का ‘इंडिया हाउस’। श्यामजी ने ही … Read More
पिचहत्तर बरस का भारत/भाग-9 इतिहास के जरिए वर्तमान को समझा जा सकता है, यहां तक की भविष्य की घटनाओं का शर्तिया अनुमान तक लगाया जा सकता है। यह स्थापित … Read More
पिचहत्तर बरस का भारत-7 प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ही ब्रिटिश हुकूमत ने भारत में उनकी सत्ता के खिलाफ तेज हो रहे माहौल को ठंडा करने की नीयत से ‘स्वराज’ … Read More
पिचहत्तर बरस का भारत-6 वर्तमान समय को ग्लोबलाइजेशन का, वैश्वीकरण का, दौर कहा जाता है। पूरी दुनिया के एक विशाल गांव में बदल जाने का समय। ऐसा समय जब … Read More
मां गंगा की अविरल धारा को रोकने का पहला प्रयास 1914 में ब्रिटिश हुकूमत ने किया था। तब महामना मदन मोहन मालवीय ने हरिद्वार में श्री गंगा सभा का गठन … Read More