‘सम्पूर्ण प्रदेश का विकास मेरा विकल्प रहित संकल्प है’
उत्तराखण्ड की राजनीति में पुष्कर सिंह धामी का सफर एक ऐसे युवा नेता की यात्रा है, जिसने संगठन की जिम्मेदारियों से लेकर राज्य के मुख्यमंत्री पद तक अपनी अलग पहचान बनाई। सीमांत क्षेत्र खटीमा से राजनीतिक जीवन की शुरुआत करने वाले धामी ने लगातार दो बार मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सम्भालकर उत्तराखण्ड की राजनीति में अपनी भूमिका को मजबूत किया है। मुख्यमंत्री के रूप में उनके सामने पहाड़ के विकास, रोजगार, पलायन, पर्यटन, बुनियादी सुविधाओं और राज्य की बदलती आकांक्षाओं से जुड़े अनेक सवाल हैं। चम्पावत विधानसभा से उनका विशेष राजनीतिक और भावनात्मक जुड़ाव भी है। यही वह विधानसभा है जहां से उपचुनाव में जीत दर्ज कर उन्होंने अपने दूसरे कार्यकाल को आगे बढ़ाया और बाद में इसी क्षेत्र को अपनी राजनीतिक प्राथमिकताओं के केंद्र में रखा। चम्पावत की जनता की उम्मीदें, क्षेत्र में हुए विकास कार्य, अभी बाकी चुनौतियां और आने वाले समय की योजनाओं के बाबत ‘दि संडे पोस्ट’ ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से विस्तृत बातचीत की
बिल्कुल… बड़े प्रोजेक्ट जरूरी हैं लेकिन गांव की सड़क, पानी, स्कूल और स्वास्थ्य सुविधा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। नघान क्षेत्र में खेतीखान मोटर मार्ग के किलोमीटर 6 से नघान डेरी तक सड़क के सुधारीकरण और डामरीकरण के लिए वित्तीय स्वीकृति दी जा चुकी है। ग्राम सभा नघान से डोडेश्वर मंदिर तक सड़क निर्माण की घोषणा भी की गई है। जहां तक पलायन का सवाल है, इसका स्थायी समाधान गांव में सुविधाओं के साथ रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाना है। इसी दिशा में कृषि, बागवानी, पर्यटन, होमस्टे और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
62.33 करोड़ रुपए का सिटी सेंटर प्रस्तावित था। इसकी वर्तमान स्थिति क्या है?
जंगली जानवर किसानों की फसल नष्ट कर रहे हैं। क्या चम्पावत के लिए स्थायी योजना बनेगी?
आपने चम्पावत को आदर्श जिला बनाने का संकल्प लिया था। चार साल बाद आपके अनुसार इस संकल्प का कितना हिस्सा पूरा हुआ और सबसे बड़ा अधूरा काम क्या है?
‘दि संडे पोस्ट’ के सभी पाठकों को मेरा सादर नमस्कार। चम्पावत और उत्तराखण्ड के विकास से जुड़े विषयों पर आप से संवाद का अवसर देने के लिए ‘दि संडे पोस्ट’ परिवार को धन्यवाद। देखिए, चम्पावत मेरे लिए केवल एक जिला या विधानसभा क्षेत्र नहीं, मेरी कर्मभूमि है। पिछले वर्षों में यहां विकास की मजबूत नींव रखी गई है। शारदा काॅरिडोर, गोल्ज्यू काॅरिडोर, आईएसबीटी, साइंस सेंटर, सिटी सेंटर और पूर्णागिरि क्षेत्र से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं आगे बढ़ रही हैं। काॅर्बेट ट्रेल का भी शुभारम्भ हो चुका है। मुझे विशेष खुशी है कि प्रदेश के पहले महिला स्पोट्र्स काॅलेज का संचालन भी शुरू हो चुका है और पहले बैच में करीब 30 बालिकाएं प्रशिक्षण भी ले रही हैं। स्थायी परिसर का निर्माण कार्य भी साथ-साथ चल रहा है लेकिन मेरा मानना है विकास एक सतत चलने वाली प्रक्रिया है जो कभी पूरी नहीं होती। हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है कि चम्पावत के प्रत्येक गांव के अंतिम घर तक सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं पहुंचें तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध हों।
नघान जैसे गांव में सड़क अभी आधे गांव तक ही पहुंची है और पलायन के कारण घर खाली हो चुके हैं। क्या गांवों को बड़े प्रोजेक्टों के बराबर महत्व मिल रहा है?
बिल्कुल… बड़े प्रोजेक्ट जरूरी हैं लेकिन गांव की सड़क, पानी, स्कूल और स्वास्थ्य सुविधा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। नघान क्षेत्र में खेतीखान मोटर मार्ग के किलोमीटर 6 से नघान डेरी तक सड़क के सुधारीकरण और डामरीकरण के लिए वित्तीय स्वीकृति दी जा चुकी है। ग्राम सभा नघान से डोडेश्वर मंदिर तक सड़क निर्माण की घोषणा भी की गई है। जहां तक पलायन का सवाल है, इसका स्थायी समाधान गांव में सुविधाओं के साथ रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाना है। इसी दिशा में कृषि, बागवानी, पर्यटन, होमस्टे और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
ललुवापानी और नघान क्षेत्र की छात्राओं को लम्बी दूरी तय कर पढ़ने जाना पड़ता है। पल्सों विद्यालय को 12वीं तक उच्चीकृत करने या परिवहन सुविधा का फैसला कब होगा?
पल्सों विद्यालय को इंटरमीडिएट स्तर तक उच्चीकृत करने की स्वीकृति दी जा चुकी है और आवश्यक पदों के सृजन का भी प्रावधान किया गया है। इससे बच्चों को स्थानीय स्तर पर ही आगे की पढ़ाई की सुविधा मिलेगी। दूरस्थ क्षेत्रों में छात्राओं की स्कूल तक पहुंच आसान बनाने के लिए परिवहन सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है। सुल्ला- पासम क्षेत्र में विद्या वाहिनी वाहन शुरू किया गया है। ललुवापानी और नघान क्षेत्र की आवश्यकता का भी आकलन कर व्यावहारिक समाधान किया जाएगा। हमारी कोशिश है कि दूरी किसी बच्चे, विशेषकर हमारी बेटियों की शिक्षा में बाधा न बने।
जिला अस्पताल में एमआरआई और क्रिटिकल केयर जैसी सुविधाओं के बीच सफाई, पानी, बाथरूम, बेड और स्टाफ की शिकायतें भी हैं। क्या समीक्षा होगी?
जिला अस्पताल में एमआरआई सेवा शुरू हो चुकी है। वहीं, लगभग 20 करोड़ रुपए की लागत से 50-बेड के क्रिटिकल केयर ब्लाॅक का निर्माण कार्य भी पूरा हो चुका है लेकिन मेरा मानना है केवल आधुनिक मशीनें पर्याप्त नहीं हैं। मरीज को साफ-सफाई, पानी, बेड और अच्छा व्यवहार भी मिलना चाहिए। अस्पताल की समग्र व्यवस्थाओं की समीक्षा कराई जाएगी और जहां भी कमी सामने आएगी, उसे समयबद्ध तरीके से दूर किया जाएगा।
62.33 करोड़ रुपए का सिटी सेंटर प्रस्तावित था। इसकी वर्तमान स्थिति क्या है?
सिटी सेंटर के लिए 62.33 करोड़ रुपए की वित्तीय स्वीकृति दी जा चुकी है और 29 जून 2026 को इसका भूमि पूजन भी हो चुका है। यह बहुमंजिला पार्किंग और शाॅपिंग काॅम्प्लेक्स के रूप में विकसित किया जाना है। अब हमारी प्राथमिकता है कि आगे की निर्माण प्रक्रिया तेजी और गुणवत्ता के साथ पूरी हो।
गोल्ज्यू कॉरिडोर की वर्तमान स्थिति क्या है?
गोल्ज्यू काॅरिडोर चम्पावत की महत्वपूर्ण परियोजनाओं में से एक है। इसके प्रथम चरण के लिए 117.22 करोड़ रुपए की परियोजना स्वीकृत की जा चुकी है। भूमि से जुड़ी बड़ी बाधाएं भी दूर हुई हैं। गोरलचैड़ मैदान से सम्बंधित सेना की लगभग 77 नाली भूमि की अदला-बदली की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अन्य आवश्यक भूमि भी पर्यटन विभाग को हस्तांतरित की गई है। हमारा प्रयास है कि परियोजना के विभिन्न चरण समयबद्ध रूप से आगे बढ़ें और इससे आस्था, खेल, पर्यटन तथा स्थानीय रोजगार सभी को लाभ मिले।
जंगली जानवर किसानों की फसल नष्ट कर रहे हैं। क्या चम्पावत के लिए स्थायी योजना बनेगी?
ये हमारे किसानों की गम्भीर समस्या है और इसका समाधान केवल मुआवजे तक सीमित नहीं हो सकता। चम्पावत में जंगली जानवरों से फसल की सुरक्षा के लिए 5 करोड़ रुपए की सामूहिक घेरबाड़ योजना की घोषणा की गई है। इसके साथ सोलर फेंसिंग और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप अन्य उपायों पर भी काम किया जाएगा। हमारा प्रयास है कि किसान की फसल सुरक्षित रहे और वन्यजीवों का संरक्षण भी बना रहे।
कमल गिरी जैसे किसान एप्पल मिशन से सफल हुए हैं। क्या बागवानी को सड़क, बाजार, प्रसंस्करण और पर्यटन से जोड़ा जाएगा?
कमल गिरी जी का उदाहरण बताता है कि सही योजना और मेहनत से पहाड़ में बागवानी रोजगार का अच्छा माध्यम बन सकती है। उन्होंने एप्पल मिशन से जुड़कर सेब उत्पादन शुरू किया और आज सेब, कीवी सहित अन्य उत्पादों से अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं। उनके बगीचे तक सड़क की जो समस्या सामने आई है, उसका परीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई कराई जाएगी। हमारा प्रयास है कि बागवानी को सड़क, स्टोरेज, प्रोसेसिंग, बाजार और एग्रो-टूरिज्म से जोड़ा जाए, ताकि किसान को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिले।
पंचेश्वर परियोजना की अनिश्चितता के कारण ग्रामीण मकान और बैंक ऋण सम्बंधी परेशानियां बता रहे हैं। सरकार की अंतरिम नीति क्या होगी?
पंचेश्वर भारत और नेपाल की संयुक्त परियोजना है और इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट सहित कुछ विषय दोनों देशों के बीच अभी विचाराधीन हैं। भारत सरकार ने भी स्पष्ट किया है कि परियोजना दोनों देशों की सहमति के बाद ही आगे बढ़ सकती है लेकिन इसका अर्थ ये नहीं कि वहां रहने वाले लोगों की वर्तमान समस्याएं लम्बित रहें। आवास, बैंक ऋण या सम्पत्ति से जुड़ी जो समस्याएं राज्य सरकार और जिला प्रशासन के स्तर पर हल हो सकती हैं, उनका परीक्षण कर व्यावहारिक समाधान किया जाएगा। परियोजना प्रभावित लोगों द्वारा बैंक ऋण और विकास कार्यों को लेकर ऐसी चिंताएं पहले भी आधिकारिक प्रक्रिया में दर्ज कराई गई हैं।
पंचेश्वर क्षेत्र में अस्पताल, सड़क, पुल और परिवहन जैसी सुविधाओं का अभाव है। क्या इनका विकास परियोजना से अलग किया जाएगा?
बिल्कुल सड़क, स्वास्थ्य, पेयजल, पुल और परिवहन किसी भविष्य की परियोजना पर निर्भर नहीं रहने चाहिए। वर्तमान आबादी और स्थानीय जरूरतों के आधार पर जो सुविधाएं आवश्यक हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाएगा। पंचेश्वर परियोजना पर निर्णय अपनी प्रक्रिया के अनुसार होगा लेकिन वहां रहने वाले लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों का समाधान वर्तमान में ही होना चाहिए। इसी दिशा में पंचेश्वर क्षेत्र को टनकपुर-जौलजीबी सड़क योजना के विस्तार से जोड़ने वाले बहुआयामी प्रोजेक्ट पर भी काम किया जा रहा है। इसके प्रथम चरण में सड़क निर्माण का कार्य पूरा हो चुका है और अब आगे के कार्यों को भी तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।
कुछ ग्रामीण स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नेताओं के व्यवहार से नाराज हैं। क्या ऐसी शिकायतों की समीक्षा होगी?
सार्वजनिक जीवन में जनता का सम्मान और संवाद सबसे महत्वपूर्ण है। मैं बिना पूरी जानकारी के किसी व्यक्ति विशेष पर टिप्पणी करना उचित नहीं समझता लेकिन किसी नागरिक की प्रशासन से जुड़ी शिकायत है तो उसे गम्भीरता से सुना जाना चाहिए और जहां जांच या कार्रवाई की आवश्यकता हो, वहां नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
अगले एक वर्ष में चम्पावत के लोगों को केवल तीन ठोस परिणाम देने हों तो आपकी प्राथमिकताएं क्या होंगी?
मैं इन्हें तीन शब्दों में कहूंगा, कनेक्टिविटी, पर्यटन और जनसुविधाएं। पहली प्राथमिकता गांवों की सड़क, पुल और परिवहन व्यवस्था में सुधार की होगी। दूसरी प्राथमिकता शारदा काॅरिडोर, गोल्ज्यू काॅरिडोर, आईएसबीटी और अन्य पर्यटन परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की होगी। टनकपुर आईएसबीटी का निर्माण भी प्रगति पर है। तीसरी प्राथमिकता स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ी सुविधाएं होंगी। महिला स्पोट्र्स काॅलेज का संचालन शुरू हो चुका है जबकि उसके स्थायी परिसर का निर्माण चल रहा है। साइंस सेंटर का निर्माण भी प्रगति पर है। मेरा प्रयास है कि विभिन्न क्षेत्रों में किए जा रहे कार्यों का असर सीधे लोगों के जीवन में दिखाई दे।
क्या ‘आदर्श चम्पावत’ की अगली चुनौती अब बड़े प्रोजेक्टों के साथ गांवों की रोजमर्रा की समस्याओं को हल करने की है?
देखिए, मैं दोनों को अलग-अलग नहीं मानता। चम्पावत का समग्र विकास तभी होगा, जब बड़े प्रोजेक्ट भी आगे बढ़ें और गांव की रोजमर्रा की समस्याओं का भी समाधान हो। शारदा काॅरिडोर, गोल्ज्यू काॅरिडोर, आईएसबीटी, साइंस सेंटर और महिला स्पोट्र्स काॅलेज जैसी परियोजनाएं भविष्य की जरूरतों से जुड़ी हैं। वहीं गांव की सड़क, बच्चों की शिक्षा, किसान की फसल, स्वास्थ्य सुविधा और रोजगार हमारी रोजमर्रा की प्राथमिकताएं हैं। मेरे लिए आदर्श चम्पावत का अर्थ यही है, आधुनिक विकास के साथ-साथ गांव के अंतिम छोर तक मूलभूत सुविधाओं का पहुंचना। चम्पावत मेरी कर्मभूमि है और यहां के लोगों की अपेक्षाओं के अनुरूप काम करना मेरा ‘विकल्प रहित संकल्प’ है।
