ये कहां आ गए हम…8

मेरी बात वर्ष 1950 में भारतीय संविधान को अंगीकृत करते समय इसकी प्रस्तावना में कहा गया था कि ‘हम भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न लोकतंत्रात्मक गणराज्य … Read More

परमात्मा का प्रतीक है ऊं पर्वत

    श्वेता माशीवाल सामाजिक कार्यकर्त्ता ऊं तीन स्वरों से बना है। अ, उ और म। ये ध्वनियां जीव की तीन अवस्थाओं का प्रतिनिधित्व करती हैं। जगना, स्वप्न देखना और … Read More

उबलता मणिपुर, सुलगते सवाल

  मणिपुर में जारी हिंसा के शुरुआती दौर से ही प्रधानमंत्री मोदी ने खामोशी अख्तियार कर यहां की जनता को नाराज करने का काम किया जिसका बड़ा असर 2024 के … Read More

असुरक्षाबोध और धर्मांधता

         राम पुनियानी लेखक राष्ट्रीयता मंच के संयोजक हैं। भारत में बाबा कोई नई चीज नहीं हैं और ऐसा भी नहीं है कि बाबा केवल भारत में … Read More

चक्रव्यूह में धाकड़ धामी

उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री को यूं ही नहीं ‘धाकड़ धामी’ कहा जाता है। इसके पीछे है उनकी ब्रांड वैल्यू जो कुछ ही समय में लोकप्रियता के पैमाने का शिखर छूने में … Read More

एनडीए सरकार में हिंदू राष्ट्रवाद की दिशा

                           राम पुनियानी लेखक राष्ट्रीय एकता मंच के संयोजक हैं। लोकसभा चुनाव में भाजपा के 272 सीटें हासिल … Read More

यथार्थवादी सिनेमा के पैमाने पर खरी उतरती

पिछले दिनों ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर एक फिल्म रिलीज हुई थी जिसका नाम ‘भक्षक’ है। निर्देशक ने इस फिल्म के जरिए मुज्जफरपुर शेल्टर होम में बच्चियों के साथ हुए अत्याचार … Read More

धु्रवीकरण का औजार है सीएए!

        राम पुनियानी लेखक राष्ट्रीय एकता मंच के संयोजक हैं।   असम में राष्ट्रीय नागरिकता पंजी. (एनआरसी) से सम्बंधित कवायद के बाद सीएए पारित किया गया था। … Read More

‘लोकतंत्र के लिए खतरा है मोदी फैक्टर’

मिलिए अपने जनप्रतिनिधि की इस कड़ी में हल्द्वानी के विधायक सुमित हृदयेश के विचारों से पाठकों को अवगत करा रहे हैं हमारे कुमाऊं के मुख्य संवाददाता संजय स्वार तेईस बरस … Read More

काव्योत्सव से मित्रता का पैगाम

सोरघाटी पिथौरागढ़ में पहली बार अंतराष्ट्रीय काव्योत्सव का आयोजन हुआ, जिसमें भारत व नेपाल के 50 से अधिक साहित्यकारों व कवियों ने भाग लिया। ज्ञान प्रकाश संस्कृत पुस्तकालय समिति पिथौरागढ़ … Read More

चरम पर इंदिरा का पुत्रमोह

पिचहत्तर बरस का भारत/भाग-80 ‘समानता की ओर’ (Towards equality) रिपोर्ट में भारतीय महिलाओं की स्थिति बाबत कहा गया- ‘While it is true that the status of women-constitutes a problem in … Read More

स्त्री पवित्र तो मासिक धर्म अपवित्र क्यों?

मासिक धर्म तमाम वर्जनाओं व मिथकों से घिरा हुआ है। जिसके चलते महिलाओं को सामाजिक व सांस्कृतिक जीवन में अलग होने के लिए विवश होना पड़ता है। इसे अशुद्धता व … Read More

सांची कहो तो मारन दौरत

मेरी बात   मुंबई के एक गैरसरकारी संगठन ‘फ्री स्पीच कलेक्टिव’ ने कुछ समय पूर्व अपनी एक रिपोर्ट जारी की थी। इस रिपोर्ट का शीर्षक है ‘बिहाइंड बार्स’ (सलाखों के … Read More

अध्यात्म के रास्ते जनसेवा

नरेंद्र चंद एक पूर्व सैन्य अधिकारी हैं। सेवा अवकाश के बाद निरंतर सामाजिक कार्यों में संलग्न हैं। अध्यात्म को आम जीवन का हिस्सा बनाने को लेकर सक्रिय हैं। युवाओं को … Read More

पुरुषों के यौन शोषण पर मौन क्यों?

महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न को लेकर तमाम सामाजिक संगठन, सोशल एक्टिविस्ट और महिला आयोग मुखर हो आवाज उठाते हैं जो सही भी है। लेकिन जब बात आती है पुरुषों … Read More