जिन्ना और उनकी राष्ट्रवादी सोच

पिचहत्तर बरस का भारत भाग-3 उन्नीस सौ सैंतालीस के विभाजन की भूमिका तो दशकों पहले से ही लिखी जानी और बनाई जाने लगी थी, 1937 से 1947 का दशक इस … Read More

लम्हों ने खता की, सदियों ने सजा पाई

 पिचहत्तर बरस का भारत -2 इतिहास का ईमानदार मूल्यांकन भविष्य के लिए स्पष्ट  संकेत पाने का शर्तिया सही तरीका है। जरूरत लेकिन निष्पक्ष मूल्यांकन की है। ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ … Read More

सफलताओं-असफलताओं का भंवर जाल

 पिचहत्तर बरस का भारत -1    पीछे मुड़ कर देखना, वह भी पिचहत्तर बरस पीछे जाकर, हर वर्ष का लेखा-जोखा टटोलना, एक व्यक्ति की जीवन यात्रा का नहीं, एक देश की … Read More

असल मुद्दों पर मोदी भारी

पांच राज्यों के चुनाव नतीजों ने मेरी दृष्टि से जिस एक बात को प्रमाणित करने का काम किया है वह है चौतरफा हिंदुत्व का प्रभाव। विशेषकर उत्तर प्रदेश के चुनाव … Read More

भारत का संतुलित रुख

पश्चिमी मीडिया, पश्चिमी देशों के सरपरस्त और पैरोकार, सभी एक सुर में कहने लगे हैं कि यूक्रेन पर रूसी आक्रमण को लेकर भारत­­­­ का रुख मानवीय सरोकारों वाला नहीं है। अमेरिकी … Read More

‘जनविश्वास’ तोड़ने के अपराधी

चिमामांडा न्गोज़ी अदिची (Chimamnda Nagozi Adichie) पश्चिम अफ्रीकी देश नाइजीरिया की एक मशहूर लेखिका और नारीवादी संघर्ष के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान स्थापित कर चुकी ऐसी शख्सियत हैं जिन्हें … Read More

नए देवताओं का काला सच

भारतीय जनता पार्टी की ‘असीम अनुकंपा’ और ‘दूरदर्शी सोच’ के चलते तैतीस कोटि देवी- देवताओं वाले हिन्दुस्तान को दो नए देवता मिल गए हैं। देश की संसद में बकायदा इसका … Read More

कांग्रेस की ऐतिहासिक भूलें

पांच राज्यों में चल रहे चुनावों का नतीजा 10 मार्च को आएगा। 10 मार्च के बाद ही शुरू होगा तमाम प्रकार के विश्लेषणों का दौर। यदि कांग्रेस इन पांच राज्यों में … Read More

तस्वीर बदलेगी अवश्य

इस सच को स्वीकारे बिना अब काम चलने वाला नहीं कि देश की सत्ता पूरी तरह भ्रष्ट हो चली है। आजादी के बाद इसे भ्रष्टाचार का रास्ता दिखाने का काम … Read More

नौटंकीबाज राजनीति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अधिकांश बातें मेरी समझ से परे होती हैं। सच तो यह है कि मैं उनके प्रति पूर्वग्रसित हो चला हूं। यह पूर्वाग्रह 2014 में उनके प्रधानमंत्री बनने … Read More

सार्थक जुनून को सलाम

कुछ लोग जुनूनी होते हैं। किसी लक्ष्य को भेदने का पैशन मुझ सरीखों को खासा सुकून देता है। मैं अपनी गिनती उनमें करता हूं जो बहुत कुछ करने की इच्छा … Read More

ज्वर भी, भ्रम भी

अमेरिकी पत्रकार, लेखक और आलोचक वान पेकार्ड (Vance Packard) की एक पुस्तक है ‘दि हिड्न परसुएडर्स, (The Hidden Persuaders)। 1957 में यह पुस्तक प्रकाशित हुई थी। इसका हिंदी में तर्जुमा … Read More

इतिहास गवाह है कि… 

मे­­­घालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक मूलतः समाजवादी प्रवृत्ति के हैं। चौधरी चरण सिंह के शागिर्द रहे सत्यपाल मलिक ने वक्त की नजाकत को पहचानते हुए 2004 में भाजपा का दामन … Read More

सबको सन्मति दे भगवान

वर्ष 2021 अंततः विदा होने की कगार पर है और हम इसे विदा होते देखने के लिए जीवित हैं। इसे इस जा रहे वर्ष की सबसे बड़ी उपलब्धि कहा-माना जा … Read More

क्या बहरा हुआ खुदाय

कबीर दास ने कहा ‘कांकर पाथर जोरि कै मस्जिद लई बनाय, ता ऊपर मुल्ला बांग दे, क्या बहरा हुआ खुदाय, कबीर दास 15वीं सदी में हुए थे। हम आज 21वीं … Read More