लम्हों ने खता की, सदियों ने सजा पाई
पिचहत्तर बरस का भारत -2 इतिहास का ईमानदार मूल्यांकन भविष्य के लिए स्पष्ट संकेत पाने का शर्तिया सही तरीका है। जरूरत लेकिन निष्पक्ष मूल्यांकन की है। ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ … Read More
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देश के ख्याति प्राप्त, प्रतिष्ठित उद्योगपति विजयपत सिंघानिया की आत्मकथा ‘एन इन्कम्पलीट लाइफ’ (An Incomplete Life) हमारी शासन प्रणाली और हमारे समाज में गहरे पसर चुके भ्रष्टाचार पर खुलकर प्रहार … Read More