बॉलीवुड से ग्लोबल सिनेमा तक, क्या ‘7 डॉग्स’ है अगला कदम? सलमान का नया दांव

जिस सलमान खान ने तीन दशक से ज्यादा समय तक बॉलीवुड के बाॅक्स ऑफिस पर अपना दबदबा कायम रखा, वे अब सिर्फ हिंदी सिनेमा की सीमाओं में दिखाई नहीं देना चाहते। ‘7 डाॅग्स’ में उनका साथ संजय दत्त दे रहे हैं जबकि फिल्म के मुख्य किरदार मिस्र के सुपरस्टार करीम अब्देल अजीज और अहमद एज निभा रहे हैं। हालीवुड से आए निर्देशक आदिल एल अर्बी और बिलाल फलाह, इटली की मोनिका बेलन और बॉलीवुड के जियानकार्लो एस्पोसितो जैसे कलाकारों की मौजूदगी वाली यह फिल्म सिर्फ एक एक्शन थ्रिलर नहीं बल्कि उस बदलती दुनिया का संकेत है जिसमें बाॅलीवुड का सुपरस्टार अब किसी एक देश के दर्शकों के भरोसे नहीं रहना चाहता। सवाल है कि क्या सलमान खान अंतरराष्ट्रीय स्टार बनने की दिशा में अपना नया अध्याय शुरू कर चुके हैं?

सलमान खान का नाम भारत में किसी परिचय का मोहताज नहीं है।तीन दशक से ज्यादा लम्बे करियर में उन्होंने रोमांस से लेकर एक्शन और काॅमेडी तक लगभग हर तरह की व्यावसायिक फिल्मों में काम किया और एक ऐसा स्टारडम बनाया जिसमें कई बार फिल्म की कहानी से ज्यादा उनके नाम की ताकत दर्शकों को सिनेमाघर तक खींचती रही लेकिन आज जब भारतीय सिनेमा का बाजार देश की सीमाओं से बाहर तेजी से फैल रहा है और दक्षिण एशिया, मध्य-पूर्व तथा एशिया के दूसरे फिल्म बाजारों के बीच सहयोग बढ़ रहा है, तब सलमान का ‘7 डाॅग्स’ का हिस्सा बनना एक दिलचस्प मोड़ है।

‘7 डाॅग्स’ की खासियत यही है कि इसे पारम्परिक अर्थों में बाॅलीवुड फिल्म कहना सही नहीं है। यह सऊदी अरब के बड़े फिल्मी जगत से निकली अंतरराष्ट्रीय एक्शन फिल्म है, जिसमें भारत, मिस्र, यूरोप, हाॅलीवुड और मध्य-पूर्व के कलाकार एक साथ दिखाई देते हैं। फिल्म में सलमान खान और संजय दत्त के साथ मिस्र के अभिनेता करीम अब्देल अजीज और अहमद एज प्रमुख भूमिकाओं में हैं जबकि मोनिका बेल और जियानकार्लो एस्पोसितो जैसे अंतरराष्ट्रीय कलाकार भी इसका हिस्सा हैं।
सलमान मुख्य हीरो नहीं, फिर भी सबसे बड़ा आकर्षण क्यों?
‘7 डाॅग्स’ में सलमान खान मुख्य नायक की भूमिका में नहीं हैं। फिल्म की कहानी मिस्र के कलाकारों के इर्द-गिर्द है लेकिन सलमान तथा संजय दत्त की मौजूदगी विशेष आकर्षण पैदा करती है। भारतीय दर्शकों के लिए यह बात महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पहली बार नहीं है कि किसी भारतीय सुपरस्टार की अंतरराष्ट्रीय फिल्म में मौजूदगी को उसके देश से बाहर के दर्शकों तक पहुंचने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है लेकिन यहां एक दिलचस्प उलटफेर है। भारत में सलमान को देखने के लिए लोग फिल्म देखते हैं जबकि ‘7 डाॅग्स’ में सलमान एक ऐसी अंतरराष्ट्रीय टीम का हिस्सा हैं जिसमें उन्हें दूसरे देशों के बड़े सितारों के साथ अपनी जगह बनानी है। यानी वह यहां अपने घरेलू स्टारडम के मालिक नहीं बल्कि एक बड़े वैश्विक सिनेमाई संसार का हिस्सा हैं।

हालीवुड से आए निर्देशक और बदला हुआ समीकरण
‘7 डाॅग्स’ का निर्देशन आदिल एल अर्बी और बिलाल फलाह ने किया है। बेल्जियम में पले-बढ़े इस बेल्जियन-मोरक्कन फिल्मकार जोड़ी ने हाॅलीवुड में श्ठंक ठवले वित स्पमिश् और श्ठंक ठवलेरू त्पकम वत क्पमश् जैसी फिल्मों के जरिए अपनी पहचान बनाई है। इसलिए उनके लिए सलमान खान और संजय दत्त के साथ काम करना सिर्फ किसी भारतीय अभिनेता को अपनी फिल्म में शामिल करना नहीं था बल्कि भारतीय सिनेमा की एक नई दुनिया से परिचित होने का अनुभव भी है।

सलमान को इस फिल्म में क्या मिला?
सलमान खान ने ‘7 डाॅग्स’ को एक बड़े पर्दे की फिल्म बताया है और कहा है कि इसके पैमाने, एक्शन और बनाई गई दुनिया ने उन्हें आकर्षित किया। फिल्म को उन्होंने अलग-अलग संस्कृतियों और फिल्म उद्योगों के सहयोग का उदाहरण बताया है। फिल्म में भारत, मिस्र, यूरोप, हाॅलीवुड और मध्य-पूर्व के कलाकारों का मेल इसे सामान्य बाॅलीवुड प्रोजेक्ट से अलग बनाता है। सलमान के लिए यह अनुभव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उनका स्टारडम अब उस उम्र में पहुंच चुका है जहां हर नई फिल्म से केवल घरेलू बाॅक्स आॅफिस की चुनौती नहीं जुड़ी है। एक स्थापित सुपरस्टार के लिए नया जोखिम उठाना कठिन होता है। दर्शक उससे वही चाहते हैं जिसके वे वर्षों से आदी रहे हैं। ऐसे में किसी दूसरे फिल्म उद्योग की फिल्म में जाना और अपनी भूमिका को उस फिल्म की बड़ी अंतरराष्ट्रीय संरचना में फिट करना एक अलग तरह की चुनौती है। यही कारण है कि ‘7 डाॅग्स’ को सलमान की करियर रणनीति के रूप में देखना दिलचस्प है। यह कहना अभी जल्दबाजी होगा कि वह बाॅलीवुड छोड़ रहे हैं बल्कि ज्यादा सही यह होगा कि वह बाॅलीवुड के बाहर भी अपना बाजार और पहचान तलाश रहे हैं।

क्या बाॅलीवुड का सुपरस्टार अब अरब सिनेमा से जुड़ रहा है?
‘7 डाॅग्स’ की सबसे बड़ी कहानी शायद सलमान खान भी नहीं बल्कि वह बाजार है जहां से यह फिल्म आई है। मध्य-पूर्व में फिल्म उद्योग तेजी से विकसित हो रहा है और सऊदी अरब बड़े पैमाने पर फिल्म निर्माण और मनोरंजन उद्योग में निवेश कर रहा है। ऐसे माहौल में भारतीय सितारों की लोकप्रियता एक महत्वपूर्ण सम्पत्ति बन सकती है। भारतीय फिल्मों का मध्य-पूर्व में पहले से मजबूत दर्शक आधार है। सलमान खान का नाम भी इस क्षेत्र में जाना-पहचाना है। इसलिए किसी बड़े अरब प्रोडक्शन में भारतीय सुपरस्टार को शामिल करना केवल रचनात्मक निर्णय नहीं बल्कि बाजार की दृष्टि से भी समझदारी हो सकती है।

दूसरी तरफ भारतीय सिनेमा को भी इसका फायदा है। यदि कोई फिल्म मिस्र, सऊदी अरब, यूरोप और भारत के कलाकारों को एक साथ लेकर बनती है तो वह अपने आप में कई बाजारों के दर्शकों के लिए परिचित चेहरा पैदा करती है। यानी भविष्य का सिनेमा शायद यह नहीं पूछेगा कि फिल्म बॉलीवुड की है या हॉलीवुड की। वह पूछेगा कि फिल्म कितनी ग्लोबल है और शायद यही असली बदलाव है।

आज से कुछ दशक पहले किसी भारतीय अभिनेता के लिए अंतरराष्ट्रीय पहचान का सबसे बड़ा रास्ता हाॅलीवुड माना जाता था लेकिन अब दुनिया बदल रही है। कोरियाई सिनेमा ने वैश्विक दर्शक बनाए, स्पेनिश भाषा की सीरीज दुनिया भर में देखी गईं, जापानी और चीनी फिल्मों का अपना अंतरराष्ट्रीय प्रभाव है और भारतीय सिनेमा ने भी ‘आरआरआर’, ‘बाहुबली’, ‘पुष्पा’ और ‘केजीएफ’ जैसी फिल्मों के जरिए भाषा की सीमाओं को चुनौती दी है।

ऐसे में सलमान खान का ‘7 डाॅग्स’ में जाना केवल यह संकेत नहीं देता कि एक बाॅलीवुड स्टार अंतरराष्ट्रीय फिल्म में दिखाई दे रहा है। यह इस बात का संकेत भी हो सकता है कि भारतीय स्टार अब ऐसी फिल्मों का हिस्सा बनने के लिए तैयार हैं जिनका बाजार केवल भारत नहीं है।

क्या सलमान अंतरराष्ट्रीय स्टार बन पाएंगे?
सलमान के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है। भारत में उनका स्टारडम स्थापित है लेकिन क्या मिस्र, सऊदी अरब, यूरोप या अमेरिका का दर्शक उन्हें उसी नजर से देखेगा? यह अभी साबित होना बाकी है। फिर भी शुरुआत महत्वपूर्ण होती है। ‘7 डाॅग्स’ उस शुरुआत को एक बड़े और बहुसांस्कृतिक मंच पर रखती है। दिलचस्प बात यह है कि ‘7 डाॅग्स’ के निर्देशक खुद अब भारत में और काम करना चाहते हैं। आदिल एल अर्बी और बिलाल फलाह ने भारत में एक ऐतिहासिक प्रोजेक्ट बनाने की इच्छा जताई है और सलमान तथा संजय दत्त के साथ फिर काम करने की बात भी कही है। उन्होंने भारतीय सिनेमा को अपने लिए एक नए रचनात्मक संसार की तरह देखने की बात की है।

बॉलीवुड से बाहर निकलना या बॉलीवुड को बाहर ले जाना?
क्या सलमान खान बॉलीवुड से बाहर निकल रहे हैं? शायद नहीं। सम्भवतः वह बाॅलीवुड को अपने साथ बाहर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। उनकी पहचान भारतीय है, उनकी लोकप्रियता भारतीय सिनेमा से बनी है लेकिन अब जिस तरह की अंतरराष्ट्रीय फिल्मों में वे दिखाई दे रहे हैं, उसमें उनकी भारतीय पहचान ही उनकी ताकत बन सकती है।

‘7 डाॅग्स’ में भारत का सलमान खान, भारत का संजय दत्त, मिस्र के बड़े सितारे, इटली की मोनिका बेल, हाॅलीवुड के जियानकार्लो एस्पोसितो और हाॅलीवुड में काम कर चुके बेल्जियन-मोरक्कन निर्देशक एक ही फिल्म में दिखाई देते हैं। यह मिश्रण अपने आप में उस सिनेमा की तस्वीर है जिसमें सीमाएं धीरे-धीरे धुंधली हो रही हैं।
सलमान खान के लिए यह प्रयोग कितना सफल होगा, इसका फैसला केवल बाॅक्स ऑफिस नहीं करेगा। असली सफलता तब होगी जब यह फिल्म उनके लिए अगली अंतरराष्ट्रीय फिल्म का दरवाजा खोल दे क्योंकि सलमान को अब यह साबित करने की जरूरत नहीं है कि वह बॉलीवुड के सुपरस्टार हैं। वह बात तीन दशक पहले साबित हो चुकी है। अब असली सवाल यह है कि क्या वह अपनी उस स्टार पावर को भारत की सीमाओं के बाहर भी उसी प्रभाव में बदल सकते हैं? ‘7 डाॅग्स’ शायद उस सवाल का अंतिम जवाब नहीं है लेकिन यह निश्चित रूप से एक दिलचस्प शुरुआत है।

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