ये कहां आ गए हम…1

मेरी बात दशकों के संघर्ष बाद अंग्रेज हुकूमत की गुलामी से हम 1947 में अगस्त माह की 15 तारीख की रात 12 बजे मुक्त जब हुए थे तब राष्ट्र निर्माण … Read More

इतिहास बड़ा निर्मम होता है-2

मेरी बात   न्यायमूर्ति डी.वाई. चन्द्रचूड़ के प्रगतिशील विचारों और उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश रहते उनके द्वारा दिए गए कुछ फैसलों चलते आमजन से लेकर खासजन तक उनके प्रति भारी सम्मान … Read More

आजाद भारत की पहली अल्पमत सरकार

पिचहत्तर बरस का भारत/भाग-123 जनता दल को अल्पमत की सरकार बनाने का अवसर तो मिल गया, लेकिन 1977 की भांति इस दफा भी कांग्रेस-विरोध के नाम पर एकजुट हुए नेताओं … Read More

इतिहास बड़ा निर्मम होता है-1

मेरी बात जो लोग इतिहास को याद नहीं रखते वे इसे दोहराने के लिए अभिशप्त होते हैं। -जॉर्ज सैंटायाना, दार्शनिक कवि और लेखक ‘Those who cannot remember the past are … Read More

दलित चेतना और उग्र हिंदुत्व का उभार

पिचहत्तर बरस का भारत/भाग-122 दलित विषयों का गहन अध्ययन करने वाले प्रोफेसर बद्रीनारायण के अनुसार-‘दीनाभाना की घटना ने कांशीराम की आंखें खोल दीं, उन्हें इसका एहसास हुआ कि कैसे ब्राह्माणवाद … Read More

धिक्कारता हूं मैं ऐसे विकास को

मेरी बात भूखा बच्चा सो रहा है आसमान ओढ़कर मां रोटी कमा रही है पत्थरों को तोड़कर जिनके पांव नंगे हैं लिबास तार-तार हैं जिनकी सांस-सांस साहूकारों की उधार है … Read More

धर्मनिरपेक्षता को तिलांजलि

पिचहत्तर बरस का भारत/भाग-121   विभाजन के पश्चात् साम्प्रदायिक आधार पर ध्रुवीकरण कम होने के बजाए लगातार बढ़ता गया, तो इसके पीछे भी नए शासकों और शासन करने की चाह … Read More

धार्मिक उन्माद के मकड़जाल में न्यायपालिका

मेरी बात माहात्मा गांधी की बात करना, उनके विचारों पर चर्चा करना नए भारत में, विश्वगुरु बनने का दिवास्वप्न देख रहे भारत में अब ओल्ड फैशन, निरर्थक, यहां तक कि … Read More

मानवीय सरोकारों से ओत-प्रोत थे राजीव

पिचहत्तर बरस का भारत/भाग-120 वर्ष 1987 में देश के 21 राज्यों में भारी सूखा पड़ा था। राजीव सरकार ने इस सूखे से निपटने के लिए व्यापक स्तर पर राहत पहुंचाने … Read More

देश को पुलिस स्टेट बनने से रोकिए-2

मेरी बात पहले वे आए कम्युनिस्टों के लिए और मैं कुछ नहीं बोला क्योंकि मैं कम्युनिस्ट नहीं था। फिर वे आए ट्रेड यूनियन वालों के लिए और मैं कुछ नहीं … Read More

राजीव सरकार की महत्वपूर्ण उपलब्धियां

पिचहत्तर बरस का भारत/भाग-119 देश की राजनीति पर 1989 के आम चुनाव के दौरान धार्मिक उन्माद पूरी तरह हावी हो चला था। भाजपा हिंदुत्व की अपनी अवधारणा को हिंदू वोटर … Read More

देश को पुलिस स्टेट बनने से रोकिए-1

मेरी बात ब्रिटिश भारत की बंगाल प्रेसिडेंसी के एक कस्बे मोतिहारी (अब बिहार के पूर्वी चम्पारण जिले का मुख्यालय) में 1903 में एक ब्रिटिश अधिकारी के घर 25 जून को … Read More

साम्प्रदायिक ताकतों का उत्कर्ष काल

पिचहत्तर बरस का भारत/भाग-118 वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत छाप छोड़ने में तो राजीव सफल हो रहे थे, लेकिन देश के भीतर उनकी और उनके नेतृत्व वाली सरकार भ्रष्टाचार के … Read More

सुप्रीम कोर्ट को सलाम

मेरी बात भारत में कानून द्वारा स्थापित किसी प्रक्रिया के अलावा कोई भी व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति को उसके जीवित रहने के अधिकार और निजी स्वतंत्रता से वंचित नहीं कर … Read More

‘मिस्टर क्लीन’ की छवि पर प्रहार

पिचहत्तर बरस का भारत/भाग-117 ज्ञानी जैल सिंह तो बगैर कोई विवादित कदम उठाए 25 जुलाई, 1987 को पदमुक्त हो गए, लेकिन राजीव गांधी की समस्याएं कम नहीं हुईं। वी.पी. सिंह … Read More