ये कहां आ गए हम…8

मेरी बात वर्ष 1950 में भारतीय संविधान को अंगीकृत करते समय इसकी प्रस्तावना में कहा गया था कि ‘हम भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न लोकतंत्रात्मक गणराज्य … Read More

नरसिम्हा राव बने प्रधानमंत्री

पिचहत्तर बरस का भारत/भाग-130 राजीव गांधी ने विश्वनाथ प्रताप सिंह को सत्ता से बेदखल करने की जिद् चलते चंद्रशेखर सरकार को केंद्र में स्थापित तो कर डाला था लेकिन इस … Read More

ये कहां आ गए हम…7

मेरी बात संवेदनहीनता की पराकाष्ठा और लोकतंत्र के स्वघोषित चौथे स्तंभ का सत्ता समक्ष लमलेट हो जाना क्या यह प्रमाणित करने के लिए काफी नहीं है कि आजाद भारत की … Read More

सोने की चिड़िया का आर्थिक संकट

पिचहत्तर बरस का भारत/भाग-129 अगस्त, 1990 में इराक द्वारा कुवैत पर कब्जा करने के बाद खाड़ी युद्ध की शुरुआत हो गई। इस युद्ध के चलते तेल की कीमतों में भारी … Read More

ये कहां आ गए हम…6

मेरी बात पच्चीस जनवरी 1987 के दिन हिंदी फिल्म निर्माता-निर्देशक रामानंद सागर द्वारा निर्मित और निर्देशित टीवी धारावाहिक ‘रामायण’ का प्रसारण दूरदर्शन पर शुरू हुआ था। यह धारावाहिक भारतीय टेलीविजन … Read More

राम मंदिर बनाम मंडल कार्ड

पिचहत्तर बरस का भारत/भाग-128 बाईस अक्टूबर, 1990 की मध्य रात्रि के बाद आडवाणी को बिहार के समस्तीपुर में गिरफ्तार कर लिया गया था। रथयात्र रोके जाने और आडवाणी की गिरफ्तार … Read More

ये कहां आ गए हम…5

मेरी बात आजादी उपरांत अंगीकृत किए गए संविधान में सामाजिक सद्भाव बनाए रखने की नीयत से कई प्रावधान किए गए। उद्देश्य था नाना प्रकार की विविधता वाले देश में शांति … Read More

आडवाणी का स्वर्ण काल

पिचहत्तर बरस का भारत/भाग-127 इस रथयात्रा के साथ आडवाणी ने इतिहास को फिर से परिभाषित करने और उत्तर भारत के भीतरी इलाकों की लोककथाओं को दृढ़ता से हिंदुत्व के नजरिए … Read More

ये कहां आ गए हम…4

मेरी बात संसद का शीतकालीन सत्र नाना प्रकार के हंगामों की भेंट चढ़ कुछ सार्थक कार्य, संवेदनशील मुद्दों पर बहस अथवा कुछ भी रचनात्मक-सृजनात्मक किए बगैर समाप्त हो गया। इस … Read More

ये कहां आ गए हम…3

मेरी बात चौदह दिसम्बर के दिन लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘संविधान की 75 वर्ष की गौरव यात्रा’ विषय पर आयोजित चर्चा के दौरान देश के सम्मुख 11 संकल्प … Read More

मंडल और कमंडल का दौर

पिचहत्तर बरस का भारत/भाग-126 देवीलाल की बर्खास्तगी के बाद विश्वनाथ प्रताप सिंह ने अपनी राजनीतिक ताकत को बढ़ाने और अपनी सरकार का अस्तित्व बचाए रखने के लिए एक ऐसा दांव … Read More

ये कहां आ गए हम…2

मेरी बात हमारा संविधान स्पष्ट कहता है कि हम एक पंथनिरपेक्ष राज्य है। यह देश सभी धर्मों को एक समान मान्यता और सम्मान देने वाला देश हैं। हमारे संविधान के … Read More

रीढ़विहीन प्रधानमंत्री साबित हुए वी.पी.

पिचहत्तर बरस का भारत/भाग-125 कश्मीरी पंडितों पर जुल्म की इंतिहा का सबसे भयावह उदाहरण एक महिला शिक्षक गिरजा टिक्कू का है, जिनके साथ पहले तो सामूहिक बलात्कार 4 जून, 1990 … Read More

विफल प्रधानमंत्री रहे वी.पी. सिंह

पिचहत्तर बरस का भारत/भाग-124 बतौर प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह का अधिकांश समय जनता दल के आंतरिक झगडों को निपटाने और अपनी कुर्सी बचाए रखने की जद्दोजहद में बर्वाद होता था। … Read More