मजहबी आग में गुम होते मुद्दे
सुबह होते ही खुरपी और कुदाल लेकर खेतिहर खेतों पर काम करने चले जाते हैं हथौड़े लेकर मजदूर निर्माण कार्य में लग जाते हैं केतली लेकर चायवाला पानी गर्म करने … Read More
सुबह होते ही खुरपी और कुदाल लेकर खेतिहर खेतों पर काम करने चले जाते हैं हथौड़े लेकर मजदूर निर्माण कार्य में लग जाते हैं केतली लेकर चायवाला पानी गर्म करने … Read More
डंकल प्रस्तावों को लेकर तीसरी दुनिया के देशों में प्रतिरोध के स्वर काफी हद तक जायज थे। वर्तमान समय में जब पूंजीवादी व्यवस्था लगभग पूरे विश्व को अपनी गिरफ्त में … Read More
गोडबोले कमेटी ने एक न्यायिक आयोग बना इस घोटाले की विस्तृत जांच किए जाने का सुझाव सरकार को दिया था। इस सुझाव को स्वीकारते हुए उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश … Read More
ख्याति प्राप्त अमेरिकी पत्रकार और लेखक एंडी रूनी का एक कथन पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद मीडिया- सोशल मीडिया में चल रहे कुकुरहाव चलते स्मरण हो आया। रूनी … Read More
दिसम्बर 1992 में नरसिम्हा राव ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश की भाजपा नेतृत्व वाली राज्य सरकारों को भंग कर दिया था। भंग किए जाने के पीछे इन राज्यों … Read More
धर्म वही है जो मानवता की रक्षा करे। जो नफरत और हिंसा फैलाए, वह अधर्म है -स्वामी विवेकानंद (शिकागो भाषण) निशिकांत दुबे वर्तमान लोकसभा के सदस्य हैं। झारखंड की गोड्डा … Read More
लिब्राहन आयोग ने अपनी रिपोर्ट में बाबरी मस्जिद विध्वंस के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उसके अनुवांशिक संगठनों को पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया। उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह, … Read More
ब्रिटेन की प्रधानमंत्री रहीं मार्गरेट थैचर 1980 के दशक दौरान अपने देश की डगमगाती अर्थव्यवस्था को पटरी में लाने के लिए खुली और उदारवादी अर्थव्यवस्था को एक मात्र विकल्प बताती … Read More
प्रधानमंत्री राव को भी आशंका थी कि कल्याण सिंह सरकार उच्चतम न्यायालय और राष्ट्रीय एकता परिषद के सम्मुख दिए गए आश्वासनों का सम्मान नहीं करना चाहती है। उन्होंने तत्कालीन केंद्रीय गृह … Read More
नई औद्योगिक नीति को 24 जुलाई 1991 की सुबह संसद में पेश किया गया था। इसी दिन शाम डाॅ. मनमोहन सिंह ने अपना पहला बजट पेश किया जिसे आज तक … Read More
अंधकार में समां गए जो तूफानों के बीच जले मंजिल उनको मिली कभी जो एक कदम भी नहीं चले क्रांति कथानायक गौण पड़े हैं गुमनामी की बांहों में गुंडे तश्कर … Read More
प्रधानमंत्री के करीबी मित्र और सलाहकार भी इस कदम के हिमायती नहीं थे। अंग्रेजी पत्रिका ‘मेनस्ट्रीम’ के सम्पादक निखिल चक्रवर्ती नरसिम्हा राव के नजदीकी मित्र थे। पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम … Read More
मैं क्षेत्रवाद का समर्थक कभी नहीं रहा हूं। मेरा मानना है कि क्षेत्रवाद की भावना देश के अखंडता को कमजोर करती है और संविधान की भावना को ठेस पंहुचाती है। … Read More
नरसिम्हा राव विलक्षण प्रतिभा के धनी व्यक्ति थे। उन्हें सीखने और सीखने की अद्भुत ललक थी। 1985 में एक दिन उनकी उपस्थिति में राजीव गांधी ने अपने एक मित्र को … Read More
वे डरते हैं किस चीज से डरते हैं वे तमाम धन-दौलत गोला-बारूद, पुलिस-फौज के बावजूद? वे डरते हैं कि एक दिन निहत्थे और गरीब लोग उनसे डरना बंद कर देंगे। … Read More