मजहबी आग में गुम होते मुद्दे

सुबह होते ही खुरपी और कुदाल लेकर खेतिहर खेतों पर काम करने चले जाते हैं हथौड़े लेकर मजदूर निर्माण कार्य में लग जाते हैं केतली लेकर चायवाला पानी गर्म करने … Read More

पिचहत्तर बरस का भारत/भाग-138 : राव सरकार का राजनीतिक संकट

डंकल प्रस्तावों को लेकर तीसरी दुनिया के देशों में प्रतिरोध के स्वर काफी हद तक जायज थे। वर्तमान समय में जब पूंजीवादी व्यवस्था लगभग पूरे विश्व को अपनी गिरफ्त में … Read More

पिचहत्तर बरस का भारत/भाग-137 : दूरसंचार क्रांति का दौर

गोडबोले कमेटी ने एक न्यायिक आयोग बना इस घोटाले की विस्तृत जांच किए जाने का सुझाव सरकार को दिया था। इस सुझाव को स्वीकारते हुए उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश … Read More

अंध भक्ति और अंध विरोध मध्य घुटता सच

ख्याति प्राप्त अमेरिकी पत्रकार और लेखक एंडी रूनी का एक कथन पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद मीडिया- सोशल मीडिया में चल रहे कुकुरहाव चलते स्मरण हो आया। रूनी … Read More

पिचहत्तर बरस का भारत/भाग-136 : उदारीकरण की आड़ में आर्थिकभ्रष्टाचार

दिसम्बर 1992 में नरसिम्हा राव ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश की भाजपा नेतृत्व वाली राज्य सरकारों को भंग कर दिया था। भंग किए जाने के पीछे इन राज्यों … Read More

रहबर वह कौम का ढोंगी है

धर्म वही है जो मानवता की रक्षा करे। जो नफरत और हिंसा फैलाए, वह अधर्म है -स्वामी विवेकानंद (शिकागो भाषण) निशिकांत दुबे वर्तमान लोकसभा के सदस्य हैं। झारखंड की गोड्डा … Read More

मस्जिद नहीं सामाजिक ताने-बाने का विध्वंस

लिब्राहन आयोग ने अपनी रिपोर्ट में बाबरी मस्जिद विध्वंस के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उसके अनुवांशिक संगठनों को पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया। उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह, … Read More

टीना फैक्टर का दंश

ब्रिटेन की प्रधानमंत्री रहीं मार्गरेट थैचर 1980 के दशक दौरान अपने देश की डगमगाती अर्थव्यवस्था को पटरी में लाने के लिए खुली और उदारवादी अर्थव्यवस्था को एक मात्र विकल्प बताती … Read More

पिचहत्तर बरस का भारत/भाग-134 : कहानी बाबरी मस्जिद विध्वंस की

प्रधानमंत्री राव को भी आशंका थी कि कल्याण सिंह सरकार उच्चतम न्यायालय और राष्ट्रीय एकता परिषद के सम्मुख दिए गए आश्वासनों का सम्मान नहीं करना चाहती है। उन्होंने तत्कालीन केंद्रीय गृह … Read More

जरूरत एक ठाकरे की-2

अंधकार में समां गए जो तूफानों के बीच जले मंजिल उनको मिली कभी जो एक कदम भी नहीं चले क्रांति कथानायक गौण पड़े हैं गुमनामी की बांहों में गुंडे तश्कर … Read More

पिचहत्तर बरस का भारत/ भाग-131 : साम, दाम, भेद, माया, उपेक्षा और दंड

प्रधानमंत्री के करीबी मित्र और सलाहकार भी इस कदम के हिमायती नहीं थे। अंग्रेजी पत्रिका ‘मेनस्ट्रीम’ के सम्पादक निखिल चक्रवर्ती नरसिम्हा राव के नजदीकी मित्र थे। पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम … Read More

जरूरत एक ठाकरे की-1

मैं क्षेत्रवाद का समर्थक कभी नहीं रहा हूं। मेरा मानना है कि क्षेत्रवाद की भावना देश के अखंडता को कमजोर करती है और संविधान की भावना को ठेस पंहुचाती है। … Read More

 पिचहत्तर बरस का भारत/भाग-131 : आर्थिक सुधारों का दौर

नरसिम्हा राव विलक्षण प्रतिभा के धनी व्यक्ति थे। उन्हें सीखने और सीखने की अद्भुत ललक थी। 1985 में एक दिन उनकी उपस्थिति में राजीव गांधी ने अपने एक मित्र को … Read More

ये कहां आ गए हम…10

वे डरते हैं किस चीज से डरते हैं वे तमाम धन-दौलत गोला-बारूद, पुलिस-फौज के बावजूद? वे डरते हैं कि एक दिन निहत्थे और गरीब लोग उनसे डरना बंद कर देंगे। … Read More