धिक्कारता हूं मैं ऐसे विकास को

मेरी बात भूखा बच्चा सो रहा है आसमान ओढ़कर मां रोटी कमा रही है पत्थरों को तोड़कर जिनके पांव नंगे हैं लिबास तार-तार हैं जिनकी सांस-सांस साहूकारों की उधार है … Read More