यदि आज कांशीराम होते तो-2

मेरी बात कांशीराम अपनी शिष्या मायावती पर हद से ज्यादा भरोसा करते थे। 14 अप्रैल 1984 को जब बसपा की विधिवत घोषणा कांशीराम ने दिल्ली के बोट क्लब में आयोजित … Read More

राजीव का राजनीति में पदार्पण

पिचहत्तर बरस का भारत/भाग-101 पंजाब की राजनीति में ज्ञानी जैल सिंह की प्रतिद्वंद्विता अपने समकालीन एक अन्य कांग्रेसी नेता दरबारा सिंह से रहा करती थी। कहा जाता है कि दरबारा … Read More

यदि आज कांशीराम होते तो …1

मेरी बात जल्दी जल्दी पैर बढ़ाओ, आओ आओ आज अमीरों की हवेली किसानों की होगी पाठशाला धोबी, पासी, चमार, तेली खोलेंगे अंधेरों का ताला, एक पाठ पढ़ेंगे, टाट बिछाओ। -सूर्यकांत … Read More

आत्ममुग्ध, अंधविश्वासी और सनकी इंदिरा

पिचहत्तर बरस का भारत/भाग-100 अस्सी के दशक की शुरुआत भारतीय लोकतंत्र के लिए नाना प्रकार की समस्या लेकर आई। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि इस दशक के दौरान अधिकतर … Read More

सबहिं नचावत राम गोसाईं

पिचहत्तर बरस का भारत/भाग-99 जयप्रकाश: नहीं, नशाबंदी और जगजीवनराम ने जनता सरकार बनवाई। मैंने और कृपलानी ने मिलकर तो धांधली से मोरारजी को प्रधानमंत्री बनाया। कमीशन: आप क्या जनता पार्टी के काम … Read More

गोबर नैतिकता और जनता सरकार

पिचहत्तर बरस का भारत/भाग-98 चौधरी चरण सिंह मात्र 23 दिन पूर्णकालिक प्रधानमंत्री रहे। 22 अगस्त 1979 से 14 जनवरी 1980 तक वे बतौर कार्यवाहक प्रधानमंत्री देश की सत्ता पर काबिज … Read More

धृतराष्ट्र न बनो संजय

मेरी बात There are two things in Indian history- One is the incredible optimism and potential of the place, and the other is the betrayal of the potential – for … Read More

चैतरफा निक्कमेपन का दौर

पिचहत्तर बरस का भारत/भाग-97   जनता पार्टी की सरकार के ढाई वर्षों का कार्यकाल हर दृष्टि से बेहद निराशाजनक करार दिया जाता है। जे.पी. ने ‘इंदिरा हटाओ – देश बचाओ’ … Read More

प्रतिशोध का दौर

पिचहत्तर बरस का भारत/भाग-96 यह सौदा 2.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर का था जो उस समय का सबसे बड़े हथियार सौदा था। एलन नजिरथ की आत्मकथा से स्पष्ट संकेत मिलता है … Read More

जब तक बुलबुला फूट न जाए…

मेरी बात अठारहवीं लोकसभा के लिए जनप्रतिनिधियों को चुनने का महोत्सव चुनाव आयोग द्वारा आम चुनाव की तारीखें घोषित किए जाने के साथ ही शुरू हो चुका है। 543 जनप्रतिनिधियों … Read More

पहली गैर कांग्रेसी सरकार का गठन

पिचहत्तर बरस का भारत/भाग-93 प्रोफेसर ज्ञानप्रकाश मंटो के सहारे आपातकाल से पहले के उस भारत की बात करते हैं जो किसी न किसी कारण चलते लगातार उग्र तरीकों के सहारे … Read More

ऑल इज नॉट वेल

मेरी बात बीता सप्ताह कई कारणों चलते खासा रोमांचकारी, आश्वस्तकारी और विस्मयकारी रहा। पहले बात विस्मयकारी घटना की। 10 मार्च के दिन यकायक ही चुनाव आयुक्त अरुण गोयल ने अपने … Read More

आजादी बाद का भारत और आपातकाल

 पिचहत्तर बरस का भारत/भाग-92 हिंदी-उर्दू के मशहूर लेखक राही मासूम रजा ने आपातकाल के दौरान एक उपन्यास ‘कतरा बी आरजू’ लिखा जिसमें संजय गांधी के ‘सौंदर्यीकरण’ और ‘नसबंदी अभियान’ से … Read More

ऑल इज वेल फिर भी संघ परिवार बेचैन

मेरी बात आम चुनाव का मौसम है इसलिए माहौल पूरे देश में सियासती होना स्वभाविक है। देश के आला वजीर और उनका पूरा परिवार भगवान श्री राम के नाम का … Read More

हर चमकने वाली वस्तु…

मेरी बात   भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम कह पुकारा जाता है। भगवान विष्णु के तेईस अवतारों में से एक राम सातवें अवतार के रूप में कौशल नरेश दशरथ के पुत्र … Read More