संपादकीय ┃ चेतने का समय आ गया

दशकों पहले एक कवितानुमा कुछ पढ़ा था, तंज था उन बुद्धिजीवियों पर जो महंगी शराब, वातानुकूलित कमरों और अन्य सभी प्रकार की विलासिता का संपूर्ण भोग करते हुए किसानों की … Read More