संपादकीय ┃ चेतने का समय आ गया
दशकों पहले एक कवितानुमा कुछ पढ़ा था, तंज था उन बुद्धिजीवियों पर जो महंगी शराब, वातानुकूलित कमरों और अन्य सभी प्रकार की विलासिता का संपूर्ण भोग करते हुए किसानों की … Read More
दशकों पहले एक कवितानुमा कुछ पढ़ा था, तंज था उन बुद्धिजीवियों पर जो महंगी शराब, वातानुकूलित कमरों और अन्य सभी प्रकार की विलासिता का संपूर्ण भोग करते हुए किसानों की … Read More
शायद कुछ लोग इस समरस महात्मा को तस्वीर और उनके नाम से पहचानने में भूल कर जाएं पर जो इन्होंने कहा है और लिखा है वह लगभग हर हिंदुस्तानी को … Read More