सीमांत में हुआ साहित्य-संस्कृति का संगम
युवाओं को मोबाइल से हटाकर किताबों की दुनिया में ले जाने के उद्देश्य से पहाड़ों पर ‘किताब कौतिक’ के आयोजन महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। टनकपुर, चंपावत, बैजनाथ के बाद … Read More
युवाओं को मोबाइल से हटाकर किताबों की दुनिया में ले जाने के उद्देश्य से पहाड़ों पर ‘किताब कौतिक’ के आयोजन महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। टनकपुर, चंपावत, बैजनाथ के बाद … Read More
पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है। मीडिया समाज में लोकतंत्र को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है, इसके लिए मीडिया में आजादी होना जरूरी है। पत्रकारिता … Read More
मेरी बात स्मृति दोष से ग्रसित हमारे देश में बहुत-सी घटनाओं, बहुत से मुद्दों को लेकर भारी बवाल मचता है, आम से लेकर खास तक उद्वेलित-आंदोलित होता है, धरने- प्रदर्शन, … Read More
भारत में भले ही मीडिया और पत्रकारिता की आलोचना होती रहती हो, आए-दिन पत्रकारों पर भी खेमेबाजी के आरोप लगाए जाते हैं। लेकिन इस संबंध में सामने आई रॉयटर्स की … Read More
‘याद दों के मोती’ भले ही एक व्यक्ति के जीवन का वृतांत हो, लेकिन एक व्यक्ति समय के साथ कई तरह के किरदारों को जीता है। इस पुस्तक में भी … Read More
मृत्यु सबसे बड़ा सत्य है। जाना सबने है, लेकिन किसी इंसान का समय से पहले चले जाना बहुत पीड़ादायक होता है। प्रेम भारद्वाज जी के साथ ‘दि संडे पोस्ट’ में एक दशक … Read More