एशियन गेम्स-2026 भारत की नई पीढ़ी का इम्तिहान

नागोया एशियन गेम्स भारत के लिए केवल पदकों की जंग नहीं बल्कि नई खेल प्रतिभाओं को परखने और 2028 ओलम्पिक की तैयारी का अहम पड़ाव है। अनुभवी खिलाड़ियों और युवा चेहरों से सजे भारतीय दल के सामने पिछली उपलब्धियों को आगे बढ़ाने, नए खेलों में पहचान बनाने और अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी दावेदारी मजबूत करने की चुनौती भी है
एशियाई खेलों का महाकुम्भ कहे जाने वाले एशियन गेम्स 2026 का जापान के आइची-नागोया में आगाज हो चुका है। 19 सितम्बर से 4 अक्टूबर तक चलने वाले इन खेलों में एशिया के 45 देश हिस्सा ले रहे हैं। कुल 43 खेलों के 469 मेडल इवेंट में मुकाबले हो रहे हैं और करीब 17 हजार खिलाड़ी व अधिकारी इस आयोजन का हिस्सा हैं। ऐसे में एशियाई खेलों की दुनिया में ये 16 दिन भारत के लिए भी बेहद अहम हैं। प्रतियोगिता के शुरुआती छह दिनों में भारत ने एक स्वर्ण, छह रजत और सात कांस्य पदकों के साथ कुल 14 पदक अपने नाम कर लिए हैं। भारत का एकमात्र स्वर्ण महिला क्रिकेट टीम ने जीता है, जिसने फाइनल में श्रीलंका को 147 रन से हराया। शुरुआती दौर में भारत की सबसे मजबूत ताकत निशानेबाजी रही है। महिला 10 मीटर एयर राइफल टीम और व्यक्तिगत स्पर्धा में रजत के बाद पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल टीम और हिमांशु ढिल्लों ने भी रजत पदक जीता। शूटिंग में भारत के खाते में अब तक पांच पदक आ चुके हैं। इसके अलावा रुड्रांक्ष पाटिल ने कांस्य हासिल किया है।

पदकों की इस सूची में अब शूटिंग के अलावा वेटलिफ्टिंग, पारम्परिक एमएमए, साॅफ्ट टेनिस, वुशु और रोइंग का भी योगदान जुड़ गया है। मीराबाई चानू ने महिलाओं के 49 किलोग्राम वर्ग में रजत जीता जबकि नाओरेम रोशिबिना देवी ने वुशु में लगातार दूसरा एशियाई खेल रजत पदक हासिल किया। रोइंग में सतनाम सिंह और सलमान खान ने कांस्य जीतकर भारत की पदक संख्या 14 तक पहुंचा दी है लेकिन नागोया की कहानी सिर्फ पदकों की गिनती तक सीमित नहीं है। इन खेलों को भारत के लिए 2028 लाॅस एंजेलिस ओलम्पिक की तैयारी के अहम पड़ाव के तौर पर भी देखा जा रहा है। एशियन गेम्स में युवा खिलाड़ियों को बड़े मंच का अनुभव मिल रहा है, जबकि मीराबाई चानू जैसे अनुभवी सितारे अपनी मौजूदगी से टीम को मजबूती दे रहे हैं। निशानेबाजी के अलावा एथलेटिक्स, बैडमिंटन, हाॅकी, मुक्केबाजी और कुश्ती जैसे खेलों में भारत की आगे की चुनौती महत्वपूर्ण होगी तो वहीं डिफेंडिंग चैम्पियन पुरुष क्रिकेट टीम से गोल्ड की उम्मीद है। नागोया में नए खेलों की मौजूदगी, युवा प्रतिभाओं की बड़ी भागीदारी और शीर्ष स्तर की प्रतियोगिता का अनुभव भारतीय खिलाड़ियों के लिए खास मायने रखता है। खेलों पर बढ़ते निवेश और ओलम्पिक में भारत की दावेदारी मजबूत करने की कोशिशों के बीच ये एशियन गेम्स केवल मौजूदा पदकों का हिसाब नहीं बल्कि लाॅस एंजेलिस 2028 की दिशा में भारतीय खेलों की तैयारी की परीक्षा भी हैं।
कितना बड़ा है भारत का दल?
नागोया के लिए भारत ने 36 खेलों में भाग लेने वाला बड़ा दल भेजा है। शुरुआती मंजूरी के बाद टीम में बदलाव भी हुए और अंतिम दल 503 खिलाड़ियों का था, जिसमें 269 पुरुष और 234 महिलाएं शामिल हैं। इस दल की सबसे बड़ी खासियत अनुभव और युवा प्रतिभा का मिश्रण है। 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी भारतीय दल के सबसे कम उम्र के खिलाड़ियों में हैं और क्रिकेट में हिस्सा ले रहे हैं। दूसरी ओर घुड़सवारी में अनुभवी खिलाड़ी श्रुति वोरा जैसी खिलाड़ी दल में अनुभव का प्रतिनिधित्व कर रही हैं । खिलाड़ियों की संख्या के लिहाज से एथलेटिक्स भारत का सबसे बड़ा क्षेत्र है। इसके अलावा हाॅकी, क्रिकेट, शूटिंग, कबड्डी और रोइंग जैसे खेलों में भी भारत की अच्छी भागीदारी है। इस बार एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि भारत का प्रतिनिधित्व केवल परम्परागत मजबूत खेलों तक सीमित नहीं है। ई-स्पोर्ट्स, सर्फिंग, मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स और टेकबाॅल जैसे नए या उभरते खेलों में भी भारतीय खिलाड़ी एशियाई मंच पर अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं।
इन खेलों उतरेगा भारत
भारत 43 में से 36 खेलों में चुनौती पेश कर रहा है। इनमें एथलेटिक्स, शूटिंग, हाॅकी, क्रिकेट, बैडमिंटन, बाॅक्सिंग, कुश्ती, कबड्डी, रोइंग, तीरंदाजी, स्क्वाॅश, टेनिस, भारोत्तोलन, तैराकी, साइकिलिंग, घुड़सवारी और कई अन्य खेल शामिल हैं। एथलेटिक्स में भारत की भागीदारी सबसे व्यापक है। शूटिंग में भी बड़ी संख्या में भारतीय खिलाड़ी उतर रहे हैं और शुरुआती पदकों ने यह साबित कर दिया है कि इस खेल से भारत को काफी उम्मीदें हैं। क्रिकेट की वापसी भी खास आकर्षण है। पुरुष और महिला क्रिकेट टी-20 प्रारूप में खेल रहे हैं। क्रिकेट में भारत मौजूदा चैम्पियन है और महिला टीम ने इसे बरकरार रखते हुए गोल्ड जीत लिया है। अब पुरुष टीम की बारी है। यानी भारत के लिए मेडल के रास्ते सिर्फ एथलेटिक्स या शूटिंग से नहीं बल्कि क्रिकेट, हॉकी, कबड्डी, तीरंदाजी, बॉक्सिंग और अन्य खेलों से भी खुल रहे हैं।
कौन-कौन से नए खेल खेले जाएंगे?
नागोया एशियन गेम्स की सबसे बड़ी विशेषताओं में नए खेलों का प्रवेश है। मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स, पैडल, सर्फिंग, वर्चुअल ताइक्वांडो और टेकबाॅल पहली बार मेडल स्पोर्ट के रूप में कार्यक्रम में शामिल किए गए हैं। इसके साथ बीएमएक्स फ्रीस्टाइल भी नए खेलों की सूची में शामिल है। मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स में बॉक्सिंग, रेसलिंग, ब्राजीलियाई जिउ-जित्सु और किक बॉक्सिंग जैसी विभिन्न मार्शल आर्ट तकनीकों का मिश्रण देखने को मिलता है। टेक बाॅल फुटबॉल और टेबल टेनिस का अनोखा मेल है। पैडल रैकेट आधारित खेल है जबकि सर्फिंग समुद्री लहरों पर संतुलन और तकनीक का खेल है। वर्चुअल ताइक्वांडो में मोशन-ट्रैकिंग और डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल होता है। इन खेलों की एंट्री संकेत देती है कि एशियन गेम्स पारम्परिक खेलों के साथ युवा दर्शकों और नई खेल संस्कृति को भी जगह देने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं कुछ खेलों को कार्यक्रम से हटाया गया है। ड्रैगन बोट और कुछ माइंड स्पोर्ट्स की अनुपस्थिति भी इस संस्करण को पिछले एशियन गेम्स से अलग बनाती है।
नागोया से मिलेगा ओलम्पिक का रास्ता?
एशियन गेम्स 2026 का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि कुछ खेलों में यहां प्रदर्शन लाॅस एंजेलिस 2028 की ओलम्पिक क्वालिफिकेशन प्रक्रिया से जुड़ा है। हाॅकी में मामला विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। पुरुष और महिला दोनों प्रतियोगिताओं के एशियन गेम्स चैम्पियन सीधे ओलम्पिक के लिए क्वालीफाई करेंगे।
स्क्वाॅश में भी एशियन गेम्स का महत्व काफी बड़ा है। पुरुष और महिला सिंगल्स में एशियन गेम्स चैम्पियन को ओलम्पिक के लिए सीधा कोटा मिलने का रास्ता बनाया गया है। यही वजह है कि अनाहत सिंह जैसी युवा भारतीय खिलाड़ी के लिए नागोया का प्रदर्शन केवल एशियन मेडल तक सीमित नहीं है बल्कि ओलम्पिक के सपने से भी जुड़ा है। इसलिए नागोया को भारत के कई खिलाड़ियों के लिए अगले ओलम्पिक चक्र की पहली बड़ी परीक्षा के तौर पर भी देखा जा रहा है।
भारत के किन खिलाड़ियों पर नजर रहेगी?
नागोया में भारत के पास अनुभवी सितारों के साथ नई पीढ़ी के कई चेहरे हैं। अनाहत सिंह भारतीय स्क्वाॅश की उभरती हुई प्रतिभा हैं। जूनियर स्तर पर विश्व खिताब जीतने के बाद उनकी नजर अब सीनियर एशियाई सफलता और ओलम्पिक 2028  कोटा पर भी है। ईशा सिंह शूटिंग में भारत की प्रमुख युवा निशानेबाजों में हैं। शूटिंग में भारत ने शुरुआती दौर में ही पदकों की शुरुआत कर दी है। ज्योति सुरेखा वेन्नम कम्पाउंड आर्चरी में भारत की स्थापित खिलाड़ियों में हैं। 2023 हांगझोउ एशियन गेम्स में तीन गोल्ड जीतने के बाद उनसे फिर बड़े प्रदर्शन की उम्मीद है। गुलवीर सिंह 5,000 और 10,000 मीटर में भारतीय रिकाॅर्डधारी हैं और लम्बी दूरी की दौड़ में भारत की प्रमुख उम्मीदों में शामिल हैं। अविनाश साबले स्टीपलचेज में पहले ही एशियन गेम्स गोल्ड जीत चुके हैं। पारुल चौधरी भी हांगझोऊ में गोल्ड और सिल्वर जीत चुकी हैं।
लम्बी कूद में अंसी सोजन ने 2026 में 6.88 मीटर की छलांग के साथ भारतीय रिकाॅर्ड अपने नाम किया। दूसरी ओर मीराबाई चानू का अनुभव भारोत्तोलन में भारत के लिए महत्वपूर्ण है। कुश्ती में अमन सहरावत पेरिस ओलम्पिक के कांस्य पदक के बाद एशियाई मंच पर अपनी पदक यात्रा को आगे बढ़ाने की कोशिश करेंगे। यानी भारतीय दल में ऐसे खिलाड़ियों की संख्या काफी है जिनके पास या तो पिछली एशियन सफलता है या हाल के अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन के आधार पर उनसे उम्मीदें जुड़ी हैं।’
क्या कहते हैं खेल विश्लेषक?
जापान के नागोया खेले जा रहे एशियन गेम्स को लेकर पूर्व दिग्गज खिलाड़ियों और खेल विश्लेषकों का कहना है कि भारत की चुनौती को केवल मेडल टैली से देखना आसान है लेकिन पूरी तस्वीर इससे कहीं बड़ी है। एक तरफ शूटिंग जैसे खेल शुरुआती दिन से पदक दिला रहे हैं तो दूसरी ओर महिला क्रिकेट ने गोल्ड बरकरार रखते हुए इतिहास रच दिया है, वहीं हाॅकी, कबड्डी, एथलेटिक्स, तीरंदाजी, कुश्ती, बाॅक्सिंग, स्क्वाॅश जैसे खेल आने वाले दिनों में भारत की पदक सम्भावनाओं को बढ़ा सकते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारतीय दल में युवा खिलाड़ियों की बड़ी संख्या है। इनमें कई ऐसे खिलाड़ी हैं जिनके लिए यह एशियन गेम्स सिर्फ पहला बड़ा महाद्वीपीय अनुभव है। उनके लिए नागोया पदक से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय अनुभव, दबाव में प्रदर्शन और ओलम्पिक 2028 चक्र की तैयारी का मंच भी है। वर्ष 2023 में हांगझोउ में 107 पदकों तक पहुंचने के बाद भारतीय दल की निगाहें अब नागोया पर हैं। इस बार सामने 43 खेल, 469 मेडल इवेंट और एशिया की मजबूत खेल शक्तियां हैं। चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों की मजबूत मौजूदगी के बीच भारत को अपने पारम्परिक मजबूत खेलों में प्रदर्शन बरकरार रखने के साथ नए खेलों में भी अपनी जगह बनानी है। यही नागोया एशियन गेम्स की असली तस्वीर है, एक तरफ पदकों की दौड़, दूसरी ओर नई प्रतिभाओं का उदय और लाॅस एंजेलिस 2028 की ओर बढ़ता भारतीय खेलों का अगला चक्र।
एशियन गेम्स में कैसा रहा है भारत का रिकॉर्ड?
भारत ने 1951 से अब तक एशियन गेम्स में लम्बी यात्रा तय की है। 2023 के हांगझोउ गेम्स में भारत ने पहली बार 100 का आंकड़ा पार किया और कुल 107 पदक जीते। इसमें 28 स्वर्ण, 38 रजत और 41 कांस्य शामिल थे। यही भारत का एक एशियन गेम्स में अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। हांगझोऊ की सफलता ने भारतीय खेलों में एक नई उम्मीद पैदा की। अब नागोया में चुनौती उस प्रदर्शन को दोहराने या उससे आगे निकलने की है। हालांकि एशियन गेम्स में हर संस्करण का कार्यक्रम अलग होता है इसलिए केवल कुल पदकों की तुलना से पूरी तस्वीर सामने नहीं आती।

महिला क्रिकेट टीम ने जीता गोल्ड
जापान के आइची-नागोया में चल रहे एशियन गेम्स-2026 से भारत के लिए स्वर्णित खुशखबरी आई। भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने एशिया कप के कारनामे को दोहराया है। पिछले दिनों एशिया कप में भारत और श्रीलंका के बीच खिताबी भिड़ंत हुई थी। इसमें भारतीय लड़कियों ने बाजी मारी थी। एशियन गेम्स 2026 में फिर से भारतीय लड़कियों ने अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया है। एशिया कप की तरह ही एक बार एशियन गेम्स 2026 में भारत और श्रीलंका के बीच फाइनल मुकाबला हुआ। जापान के आइची-नागोया में चल रहे एशियन गेम्स-2026 से भारत के लिए स्वर्णित खुशखबरी आई। भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने एशिया कप के कारनामे को दोहराया है। पिछले दिनों एशिया कप में भारत और श्रीलंका के बीच खिताबी भिड़ंत हुई थी। इसमें भारतीय लड़कियों ने बाजी मारी थी। एशियन गेम्स 2026 में फिर भारत और श्रीलंका के बीच एशियन गेम्स-2026 में क्रिकेट का फाइनल मुकाबला हुआ जिसमें भारतीय लड़कियों ने अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया है।

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