पंद्रह साल, करोड़ों की योजनाएं, फिर भी विकास का इंतजार

पंद्रह साल, करोड़ों की योजनाएं, फिर भी विकास का इंतजार

हरिद्वार की रानीपुर विधानसभा उत्तराखण्ड के उन इलाकों में शामिल है, जिसकी पहचान सिर्फ एक विधानसभा क्षेत्र के रूप में नहीं बल्कि प्रदेश के बड़े औद्योगिक केंद्र के तौर पर भी होती है। भेल और सिडकुल जैसी औद्योगिक ईकाइयों ने इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था, आबादी और शहरी विस्तार को गहराई से प्रभावित किया है। उद्योग आए, उनके साथ रोजगार की उम्मीदें बढ़ीं, नई आवासीय काॅलोनियां बसीं और रानीपुर तेजी से विकसित होते शहरी क्षेत्र के रूप में सामने आया लेकिन करीब 15 वर्षों के राजनीतिक नेतृत्व और करोड़ों रुपए की योजनाओं के बावजूद क्या रानीपुर अपने बुनियादी विकास के सवालों से पूरी तरह बाहर निकल पाया है? ग्राउंड पर घूमने के बाद तस्वीर कुछ ऐसी सामने आती है जिसमें बड़े प्रोजेक्ट भी हैं और छोटी भी लेकिन रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने वाली समस्याएं भी हैं

रानीपुर विधानसभा से भारतीय जनता पार्टी के आदेश चौहान लगातार तीन बार चुनाव जीत चुके हैं। यानी एक ही नेतृत्व को क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हुए लम्बा समय मिला है। इस दौरान राज्य और केंद्र दोनों स्तरों पर भाजपा की सरकारें रहने के कारण योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए राजनीतिक समन्वय की स्थिति भी रही। स्वाभाविक तौर पर ऐसे में जनता की अपेक्षाएं भी बड़ी रही होंगी। समर्थक पक्ष की ओर से शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सीवर, सड़क, खेल और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में कई बड़ी परियोजनाओं को उपलब्धि के तौर पर गिनाया जाता है। वहीं स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल भी मौजूद है कि यदि इतने वर्षों में करोड़ों रुपए की योजनाएं आईं और कई बड़े प्रोजेक्ट खड़े हुए तो फिर सड़क, जल निकासी, स्थानीय रोजगार और सरकारी शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरतें अब भी क्यों चर्चा का विषय हैं? यही विरोधाभास रानीपुर विधानसभा यात्रा की सबसे अहम तस्वीर बनकर सामने आता है।

औद्योगिक पहचान बड़ी, स्थानीय रोजगार का सवाल बरकरार
रानीपुर की आर्थिक पहचान भेल (भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड) से शुरू होकर सिडकुल तक पहुंचती है। भेल ने हरिद्वार को औद्योगिक पहचान देने में बड़ी भूमिका निभाई और बाद में सिडकुल ने क्षेत्र में उद्योगों के विस्तार को और गति दी। इसके साथ आबादी बढ़ी, नई काॅलोनियां विकसित हुईं और हजारों लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा हुए लेकिन आज जब स्थानीय युवाओं से रोजगार की बात होती है तो सवाल उद्योगों की मौजूदगी से आगे जाकर यह बन जाता है कि इन उद्योगों का लाभ स्थानीय युवाओं को कितना मिला? स्थानीय स्तर पर यह शिकायत सुनने को मिलती है कि उद्योग तो आए लेकिन स्थानीय युवाओं को उनकी अपेक्षा के अनुरूप रोजगार नहीं मिला। दूसरी ओर यह भी तथ्य सामने रखा जाता है कि सिडकुल में बड़ी संख्या में कम्पनियां संचालित हैं और उनमें स्थानीय युवाओं सहित दूसरे क्षेत्रों के लोग भी रोजगार पा रहे हैं। सरकार की ओर से रोजगार मेलों, कौशल विकास, स्वरोजगार और मुद्रा जैसी योजनाओं के जरिए युवाओं और महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने के प्रयास किए जाने का दावा किया जाता है।
रानीपुर जैसे औद्योगिक क्षेत्र में रोजगार का सवाल केवल बेरोजगारी के आंकड़ों तक सीमित नहीं है। सवाल यह भी है कि आईटीआई और पाॅलीटेक्निक जैसे तकनीकी संस्थानों से निकलने वाले युवाओं को सिडकुल की औद्योगिक जरूरतों से किस हद तक जोड़ा गया है? स्थानीय युवाओं की उद्योगों में वास्तविक हिस्सेदारी कितनी है? सिडकुल की स्थापना के साथ जिस 70 प्रतिशत स्थानीय रोजगार की उम्मीद बनी थी, वह आज भी स्थानीय चर्चा का विषय है।
सड़कें : विकास की पहली तस्वीर यहीं से दिखाई देती है
रानीपुर विधानसभा यात्रा में सबसे ज्यादा दिखाई देने वाली समस्याओं में सड़क और जल निकासी शामिल हैं। कई आवासीय इलाकों में सड़क निर्माण और मरम्मत की स्थिति को लेकर लोगों में नाराजगी दिखाई देती है। जगजीतपुर से जुड़े राजा गार्डन और आस-पास के इलाकों में कई जगह सड़कें टूटी हुई मिलीं। कहीं गहरे गड्ढे हैं तो कहीं मिट्टी और पानी जमा है। स्थानीय लोगों के लिए यह सिर्फ असुविधा नहीं बल्कि रोजाना दुर्घटना के खतरे से जुड़ी समस्या है।
राजा गार्डन निवासी आर.के. शर्मा बताते हैं कि पिछले तीन-चार महीने से सड़क की हालत खराब है। उनके मुताबिक सड़क कच्ची और गड्ढों से भरी है, नालियां भरी पड़ी हैं और पानी की निकासी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। बारिश के दौरान परेशानी और बढ़ जाती है। उनका कहना है कि सीवर लाइन डालने का काम हो चुका है लेकिन सड़क को अब तक पक्का नहीं किया गया। बच्चों और महिलाओं के स्कूटी से निकलने तथा रिक्शों के आने-जाने में दुर्घटना का खतरा बना रहता है। यहां स्थानीय शिकायत और विधायक का तर्क दोनों महत्वपूर्ण हैं। क्षेत्र में सीवर की बड़ी परियोजना चल रही है और सीवर लाइन डालने के बाद सड़कें चरणबद्ध तरीके से बहाल किए जाने की बात कही जाती है। विधायक के अनुसार जगजीतपुर और राजा गार्डन क्षेत्र में सीवर परियोजना लम्बे समय से प्रस्तावित थी। क्षेत्र के पहले ग्रामीण सीमा में होने के कारण तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनें भी थीं। बाद में शहरी सीमा में शामिल होने के बाद डीपीआर और अन्य प्रक्रियाएं पूरी हुईं।
सीवर परियोजना पर करीब 252 करोड़ रुपए खर्च होने की जानकारी सामने आई है। इसके साथ पेयजल व्यवस्था के लिए लगभग 75 करोड़ रुपए की योजना का भी उल्लेख है। परियोजना का उद्देश्य आने वाले कई दशकों के लिए क्षेत्र में सीवर व्यवस्था विकसित करना बताया जा रहा है लेकिन समस्या यह है कि बड़े प्रोजेक्ट का लाभ भविष्य में मिलेगा जबकि सड़क की परेशानी लोगों को आज झेलनी पड़ रही है।
नालियां और जलभराव : सीवर से आगे ड्रेनेज की चुनौती
रानीपुर मोड़, जगजीतपुर और आस-पास की कई काॅलोनियों में जल निकासी की समस्या पुरानी बताई जाती है। क्षेत्र के कई हिस्से निचले स्तर पर बसे हैं और बारिश के दौरान सड़क, नाली और जलभराव की समस्या एक-दूसरे से जुड़ जाती है जहां सड़क पहले से टूटी हो और नालियों की सफाई या जल निकासी पर्याप्त न हो, वहां बारिश के बाद हालात और खराब हो जाते हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक कुछ काॅलोनियों में बारिश के बाद पानी सड़क पर जमा हो जाता है और कई बार सड़क और नाली के बीच अंतर करना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसे में केवल सीवर लाइन डाल देना पर्याप्त नहीं होगा। बारिश के पानी की अलग निकासी, नालियों की नियमित सफाई और सड़क की ऊंचाई तथा ड्रेनेज की समुचित योजना भी जरूरी है।
शिक्षा : संस्थानों की भरमार लेकिन सरकारी स्कूल की जरूरत क्यों?
शिक्षा के मामले में रानीपुर की स्थिति दूसरी कई विधानसभाओं की तुलना में मजबूत दिखाई देती है। क्षेत्र में डीपीएस, डीएवी, एसवीएमआईसी, गुरुकुल विश्वविद्यालय सहित कई प्रमुख शिक्षण संस्थान हैं। आईटीआई और पॉलिटेक्निक जैसी तकनीकी शिक्षा की सुविधाएं भी मौजूद हैं। इसी वजह से क्षेत्र को शिक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। रोशनाबाद में करीब 100 करोड़ रुपए की लागत से तैयार स्टेडियम और वहां राष्ट्रीय खेलों के आयोजन को क्षेत्र की उपलब्धियों में गिना जाता है। खेल सुविधाओं के विस्तार से स्थानीय युवाओं को आगे बढ़ने के अवसर मिल सकते हैं और इसे रोजगार तथा नशे की समस्या से निपटने के व्यापक प्रयासों से भी जोड़ा जा सकता है।
शिक्षा की तस्वीर का दूसरा पक्ष नवोदय नगर में दिखाई देता है। स्थानीय लोगों के अनुसार यहां सरकारी इंटर कॉलेज की घोषणा लम्बे समय से लम्बित है। करीब पांच वर्ष पहले घोषणा होने के बावजूद विद्यालय का निर्माण जमीन पर नहीं उतर पाया है। सिडकुल विस्तार के साथ विकसित हुए नवोदय नगर में करीब 38 काॅलोनियां हैं। ऐसे इलाके में सरकारी इंटर कॉलेज की जरूरत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हर परिवार निजी विद्यालय की फीस वहन नहीं कर सकता।
भेल परिसर के केंद्रीय विद्यालय को लेकर भी बदलाव और चिंता की स्थिति है। पहले विद्यालय के खर्च का बड़ा हिस्सा भेल की व्यवस्था से जुड़ा था लेकिन परिस्थितियों में बदलाव के बाद विद्यालय में कक्षा एक में नए प्रवेश पिछले कुछ वर्षों से नहीं होने की बात सामने आई है। यह सिर्फ एक स्कूल का मामला नहीं है। यह सवाल भी है कि औद्योगिक शहर के विकास के साथ बने सामाजिक संस्थानों को बदलती आर्थिक परिस्थितियों में कैसे मजबूत रखा जाए?
स्वास्थ्य : मेडिकल काॅलेज आया लेकिन स्थानीय अस्पताल की जरूरत खत्म नहीं हुई
स्वास्थ्य के क्षेत्र में रानीपुर में बड़े प्रोजेक्ट दिखाई देते हैं। जगजीतपुर में करीब 700 करोड़ रुपए की लागत से मेडिकल काॅलेज तैयार हुआ है और एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू हो चुकी है। ओपीडी व्यवस्था को भी आगे नियमित और विस्तारित किए जाने की बात सामने आई है। इसके अलावा करीब 300 बेड के ईएसआई अस्पताल का निर्माण भी क्षेत्र की बड़ी स्वास्थ्य परियोजनाओं में शामिल है। ज्वालापुर के पीएचसी को सीएचसी में बदलने, बहादराबाद में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और एलोपैथी, आयुर्वेदिक तथा होम्योपैथी सेवाओं की मौजूदगी को भी स्वास्थ्य ढांचे के विस्तार के रूप में देखा जा सकता है।
मेडिकल काॅलेज से जुड़ा बिजली कनेक्शन का सवाल भी इसी विरोधाभास को सामने लाता है। स्थायी बिजली कनेक्शन के लिए करीब 11.5 करोड़ रुपए की जरूरत का अनुमान शासन को भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। विभागीय स्तर पर लाइन का काम पूरा होने और राशि जमा करने की प्रक्रिया का उल्लेख किया गया है। मेडिकल काॅलेज जैसा बड़ा संस्थान तैयार हो और उसकी मूलभूत बिजली व्यवस्था लम्बे समय तक अस्थायी रहे तो सवाल स्वाभाविक है कि परियोजना पूरी होने और उसके पूर्ण संचालन के बीच इतना अंतर क्यों रह गया।
नशा : औद्योगिक क्षेत्र के युवाओं के सामने दूसरी चुनौती
रानीपुर सहित हरिद्वार में नशे की समस्या को लेकर चिंता लगातार सामने आती रही है। विधानसभा यात्रा के दौरान स्थानीय स्तर पर कुछ काॅलोनियों में नशे के कारोबार की शिकायतें भी सामने आईं। लोगों का कहना है कि शिकायत के बाद पुलिस कार्रवाई करती है लेकिन कई बार कार्रवाई का असर लम्बे समय तक दिखाई नहीं देता। नशे की समस्या को केवल कानून-व्यवस्था के सवाल के तौर पर देखना पर्याप्त नहीं होगा। रानीपुर जैसे औद्योगिक क्षेत्र में रोजगार, कौशल विकास, खेल और सामाजिक गतिविधियों को इससे जोड़ना जरूरी है। स्टेडियम, आईटीआई और पाॅलीटेक्निक जैसे संस्थानों का बेहतर उपयोग इसी दिशा में महत्वपूर्ण हो सकता है। यदि स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण, रोजगार और खेल के अवसर मिलते हैं तो नशे के खिलाफ लड़ाई को भी मजबूती मिल सकती है।
पुल और फ्लाईओवर : कनेक्टिविटी बदलने की कोशिश
रानीपुर में कनेक्टिविटी सुधारने के लिए कई परियोजनाएं भी चल रही हैं। शिवालिक नगर से सुभाष नगर को जोड़ने वाला पुल, सिडकुल बाईपास से धनौली मार्ग को जोड़ने वाला पुल और रोशनाबाद से औरंगाबाद को जोड़ने वाला पुल इनमें शामिल बताए गए हैं। हाईवे पर दो फ्लाईओवर का निर्माण भी चल रहा है।
औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण रानीपुर में कर्मचारियों, भारी वाहनों और औद्योगिक गतिविधियों से जुड़ा यातायात काफी अधिक रहता है। ऐसे में पुल और फ्लाईओवर केवल यातायात परियोजनाएं नहीं बल्कि क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। इनका वास्तविक मूल्यांकन हालांकि तभी होगा जब ये समय पर पूरे हों और इनके शुरू होने के बाद यातायात में जमीन पर सुधार दिखाई दे।
विधायक के प्रति लोगों की राय पूरी तरह नकारात्मक नहीं
ग्राउंड पर बातचीत में विधायक आदेश चौहान के प्रति लोगों की राय एकतरफा नकारात्मक नहीं मिली। कुछ लोगों ने उनके व्यवहार और आम लोगों से मेलजोल को सकारात्मक बताया। स्थानीय स्तर पर यह धारणा भी मिली कि विधायक से मिलना और अपनी बात रखना पूरी तरह मुश्किल नहीं है लेकिन लोगों की अपेक्षा अब संवाद से आगे बढ़कर परिणाम की है। सड़क, नाली, जल निकासी, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों पर लोगों को लम्बित कामों के पूरा होने की जरूरत है। यानी व्यक्तिगत व्यवहार के स्तर पर सकारात्मक धारणा के बावजूद विकास कार्यों की गति जनता के मूल्यांकन में निर्णायक भूमिका निभाएगी।
2027 से पहले सबसे बड़ी परीक्षा : घोषणा नहीं, क्रियान्वयन
अगले विधानसभा चुनाव की ओर बढ़ते हुए रानीपुर में कई परियोजनाएं निर्णायक साबित हो सकती हैं। सीवर परियोजना के अगले चरणों में सीतापुर, हरिलोक, सुभाष नगर, टिहरी विस्थापित और शिवालिक नगर जैसे क्षेत्रों को जोड़ने की योजना बताई गई है। पेयजल के लिए टिहरी विस्थापित, शिवालिक नगर, रामधाम, गोपाल नगर, देवनगर और नवोदय नगर सहित कई क्षेत्रों के लिए करीब 125 करोड़ रुपए की योजना शासन को भेजे जाने की जानकारी है।
पुल और फ्लाईओवर परियोजनाओं के साथ मेडिकल काॅलेज के आस-पास रिंग रोड से जुड़ी सड़क और कट की योजनाएं भी विकास एजेंडे में हैं। इन योजनाओं के समय पर पूरा होने से क्षेत्र की कनेक्टिविटी, पेयजल और सीवर व्यवस्था में सुधार की सम्भावना है लेकिन 2027 से पहले रानीपुर की जनता के सामने सबसे बड़ा सवाल नई घोषणा का नहीं बल्कि पुरानी घोषणाओं और चल रहे प्रोजेक्ट के परिणाम का होगा। क्या सीवर परियोजना समय पर पूरी होगी? क्या सीवर डालने के बाद सड़कें व्यवस्थित तरीके से बहाल होंगी? क्या नवोदय नगर का इंटर कॉलेज वास्तव में जमीन पर बनेगा? क्या स्थानीय युवाओं को औद्योगिक क्षेत्र में रोजगार का अपेक्षित हिस्सा मिलेगा? क्या नशे के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी रहेगी? क्या मेडिकल काॅलेज और ईएसआई अस्पताल पूरी क्षमता से काम करेंगे? क्या बरसात में जलभराव तथा टूटी सड़कों की समस्या से लोगों को स्थायी राहत मिलेगी?
बड़े प्रोजेक्ट बनाम बुनियादी जरूरत
रानीपुर की मौजूदा तस्वीर को न पूरी तरह विकास विरोधी कहा जा सकता है और न ही इसे पूरी तरह विकसित विधानसभा की तस्वीर माना जा सकता है। यहां बड़े प्रोजेक्ट हैं, संस्थान हैं, उद्योग हैं और भविष्य बदलने की क्षमता रखने वाली कई योजनाएं हैं लेकिन इसी के साथ ऐसी समस्याएं भी हैं जो नागरिक को हर दिन प्रभावित करती हैं। रानीपुर की कहानी दरअसल बड़े विकास और छोटे दिखने वाले लेकिन बेहद जरूरी सवालों के बीच का अंतर है। यहां करोड़ों रुपए की योजनाएं चल रही हैं लेकिन किसी काॅलोनी की सड़क पर गड्ढा आज भी उतनी ही बड़ी समस्या है। यहां मेडिकल काॅलेज है लेकिन स्थानीय व्यक्ति के लिए स्थायी स्वास्थ्य सुविधा तक पहुंच अब भी सवाल है। यहां सिडकुल है लेकिन स्थानीय रोजगार की हिस्सेदारी पर बहस जारी है। यहां बड़े शिक्षण संस्थान हैं लेकिन सरकारी इंटर काॅलेज का इंतजार खत्म नहीं हुआ है।
15 साल किसी भी विधानसभा के लिए लम्बा समय होता है। इतने लम्बे समय के बाद विकास का आकलन केवल योजनाओं की संख्या या बजट से नहीं बल्कि उनके जमीन पर दिखाई देने वाले असर से होना चाहिए। रानीपुर में अब सवाल यह नहीं कि योजनाएं कितनी बड़ी हैं। असली सवाल यह है कि उनका असर आम आदमी की जिंदगी पर कितना बड़ा पड़ा है। 2027 के चुनाव से पहले सम्भवतः यही रानीपुर विधानसभा का सबसे बड़ा चुनावी सवाल भी बनने जा रहा है। विकास के बीच बुनियादी संकट बरकरार।

‘अस्पताल है पर सुविधा नहीं’
आदेश चौहान पिछले तीन बार से यहां के विधायक हैं और बीते दो टर्म से प्रदेश में भी उनकी ही सरकार है। वर्ष 2014 से केंद्र में भी उनकी सरकार है। ट्रिपल इंजन की सरकार होने के बावजूद जनता ने जिन अपेक्षाओं के साथ जनप्रतिनिधियों को चुना था, उन पर वे खरे नहीं उतर पाए हैं। मेडिकल सुविधाओं की बात करें तो सिडकुल जैसे बड़े औद्योगिक क्षेत्र में एक अस्पताल बनना था। उसका शिलान्यास भी हुआ लेकिन उसके बाद काम आगे नहीं बढ़ पाया। रानीपुर विधानसभा और आस-पास की विधानसभा क्षेत्रों में भी ऐसा कोई बेहतर अस्पताल नहीं है, जहां सभी आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं एक जगह उपलब्ध हों। इसे लेकर लोग आक्रोशित भी हैं और चिंतित भी। शिक्षा के क्षेत्र में भी कोई ऐसा सरकारी विद्यालय नहीं खोला गया, जिसकी लम्बे समय से जरूरत महसूस की जा रही थी। चुनाव के समय लोगों से विद्यालय, अस्पताल, नालियों और दूसरी बुनियादी सुविधाओं को लेकर तमाम वादे किए जाते हैं लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद उन वादों को भुला दिया जाता है। रानीपुर विधानसभा का नवोदय नगर सिडकुल के कारण विकसित हुआ एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यहां करीब 38 काॅलोनियां हैं।मुख्यमंत्री की ओर से यहां इंटर कॉलेज देने की घोषणा किए हुए करीब पांच वर्ष हो चुके हैं लेकिन आज तक इंटर कॉलेज का निर्माण नहीं हो पाया है। सीवर लाइन की घोषणा भी चार-पांच साल पुरानी है लेकिन उसका लाभ अब तक पूरी तरह नहीं मिल पाया। भेल (ठभ्म्स्)की स्थापना पंडित जवाहरलाल नेहरू के समय हुई। इसके बाद क्षेत्र का विकास आगे बढ़ा। इसी तरह सिडकुल की स्थापना नारायण दत्त तिवारी के मुख्यमंत्री रहते हुई और इससे कई लोगों को रोजगार मिला लेकिन आज स्थिति यह है कि मौजूदा जनप्रतिनिधि और सरकार न तो इन उद्योगों को उस तरह सुचारू रूप से चला पा रहे हैं और न ही स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की वह व्यवस्था दिखाई देती है, जिसकी अपेक्षा की गई थी। उद्योगों की स्थापना के समय स्थानीय लोगों को रोजगार में प्राथमिकता देने की बात कही गई थी लेकिन आज 70 प्रतिशत स्थानीय रोजगार का वह लक्ष्य कहीं नजर नहीं आता। विधायक को रानीपुर विधानसभा का नेतृत्व करते हुए 15 वर्ष हो चुके हैं। यदि 15 वर्ष भी किसी विधानसभा को विकसित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं तो फिर किसी दूसरे व्यक्ति को मौका मिलना चाहिए। रोजगार की स्थिति भी चिंता का विषय है। न तो सार्वजनिक क्षेत्र में पर्याप्त रोजगार के अवसर दिए गए, न सरकारी क्षेत्र में और न ही प्रदेश या केंद्र स्तर पर युवाओं के लिए पर्याप्त नियुक्तियां दिखाई देती हैं। पिछली सरकार के समय उत्तराखण्ड में 32 से 33 हजार नियमित भर्तियां किए जाने की बात कही जाती थी लेकिन अब सरकारी नियुक्तियों की स्थिति चिंताजनक है। नशे का कारोबार भी रानीपुर की बड़ी समस्याओं में शामिल है। विष्णुलोक काॅलोनी सहित कई इलाकों में नशे का कारोबार खुलेआम चलता हैं। यहां भेलकैम्पस में एक केंद्रीय विद्यालय है जो बहुत अच्छे से सुचारू रूप से चल रहा था, भेल का वो प्रोजेक्ट था भेल उसका पूरा खर्च वहन करती थी, बीच में सरकार की नीतियों के कारण भेल की ऐसी स्थिति बनी। भेल नुकसान की तरफ बढ़ने लगी तो केंद्रीय विद्यालय से अपने हाथ पीछे कर लिए। उन्होंने कहा हम चलाने की स्थिति में नहीं हैं। इतना खर्च अब वहन नहीं कर सकते तो अभी विद्यालय की हालत ये है कि वहां कक्षा 5 वीं तक कोई बच्चा नहीं है हमारे ईएनबी के भी सारे विद्यालय बंद होने की कगार पर हैं। एक समय भेल केवल उद्योग नहीं था बल्कि उसके आस-पास शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार का पूरा सामाजिक ढांचा भी तैयार करता था। आज उस व्यवस्था के कमजोर पड़ने का असर क्षेत्र के लोगों पर भी दिखाई दे रहा है। पिछले 15 वर्षों में यदि इन बुनियादी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हुआ है तो आने वाले समय में जनता के सामने विकास के दावों के साथ इन सवालों का जवाब भी देना होगा।
राजबीर चौहान, पूर्व प्रत्याशी कांग्रेस, भेल रानीपुर

रानीपुर विधानसभा 2026 – विधायक रिपोर्ट कार्ड
विधायक : आदेश चौहान (अवधि : 4.5 वर्ष)

क्र. क्षेत्र                मुद्दा / जमीनी स्थिति                                                                   अंक  (10 में)

  1. जनसम्पर्क एवं उपलब्धता लोगों के बीच सहज व्यवहार और सम्पर्क को लेकर सकारात्मक राय लेकिन कुछ इलाकों में जनप्रतिनिधि की नियमित मौजूदगी को लेकर शिकायतें।         7
  2. शिक्षा बड़े शिक्षण संस्थानों की मौजूदगी मजबूत पक्ष लेकिन नवोदय नगर के सरकारी इंटर काॅलेज की लम्बित घोषणा सवाल खड़े करती है।                7
  3. स्वास्थ्य सेवाएं मेडिकल काॅलेज और ईएसआई अस्पताल जैसी बड़ी परियोजनाएं उपलब्धि लेकिन स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञ और आपात स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरत बरकरार।                     7
  4. रोजगार एवं उद्योग भेल और सिडकुल का बड़ा औद्योगिक आधार लेकिन स्थानीय युवाओं को अपेक्षित रोजगार मिलने का सवाल अब भी कायम।                       5
  5. सड़क एवं आधारभूत ढांचा पुल, फ्लाईओवर और बड़ी परियोजनाओं पर काम लेकिन राजा गार्डन-जगजीतपुर सहित कई इलाकों में सड़क की बदहाली चुनौती।                    6
  6. पेयजल एवं जल निकासी पेयजल की बड़ी योजनाएं प्रस्तावित, सीवर परियोजना भी जारी लेकिन जलभराव और नालियों की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई।                6
  7. सामाजिक मुद्दे एवं युवा स्टेडियम और तकनीकी संस्थान सकारात्मक लेकिन नशे की समस्या और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर अभी बड़ी चुनौती।                  6
  8. प्रशासनिक सुविधाएं कई बड़ी योजनाओं को आगे बढ़ाया गया लेकिन परियोजनाओं के क्रियान्वयन और समय पर पूरा होने को लेकर सवाल।                         6
  9. पारदर्शिता एवं जवाबदेही विकास कार्यों का बड़ा एजेंडा सामने है लेकिन लम्बित योजनाओं और स्थानीय समस्याओं पर जवाबदेही की अपेक्षा बनी हुई है।                       6
  10. समग्र विकास रानीपुर में बड़े प्रोजेक्ट और आधारभूत ढांचे का विस्तार हुआ लेकिन बुनियादी समस्याओं और योजनाओं के अंतिम परिणाम में अभी अंतर।                        7
कुल अंक :  6.3/10                                                                        फाइनल ग्रेड : पास

कैप्शन :
राजा गार्डन (रानीपुर) की सड़कों की खराब स्थिति
बाल भारती सीनियर सेकेंडरी स्कूल रानीपुर
केंद्रीय विद्यालय बीएचईएल
सुविधाविहीन मेडिकल कॉलेज जगजीतपुर

‘विकास का लगातार विस्तार हो रहा है’
भारतीय जनता पार्टी के नेता और रानीपुर विधानसभा क्षेत्र से लगातार तीन बार के विधायक आदेश चौहान क्षेत्र की राजनीति में एक स्थापित चेहरा हैं। वर्ष 2012 से रानीपुर का प्रतिनिधित्व कर रहे आदेश चौहान के करीब 15 वर्षों के कार्यकाल में क्षेत्र में कई बड़ी विकास परियोजनाएं आई हैं तो वहीं सड़क, जल निकासी, रोजगार और अन्य बुनियादी सुविधाओं को लेकर सवाल भी कायम हैं। ‘दि संडे पोस्ट’ ने रानीपुर विधानसभा की ग्राउंड रिपोर्ट, विकास कार्यों की स्थिति, स्थानीय चुनौतियों और 2027 को लेकर उनसे भविष्य के विजन पर विस्तार से बातचीत की

रानीपुर विधानसभा में अब तक कितना विकास कार्य हुआ है?
विकास एक सतत प्रक्रिया है, इसे कभी पूरा नहीं माना जा सकता। क्षेत्र में पिछले वर्षों के दौरान कई महत्वपूर्ण विकास कार्य हुए हैं और कई योजनाओं पर अभी काम चल रहा है। आगे भी जरूरत के अनुसार विकास कार्य जारी रहेंगे।

राजा गार्डन सहित जगजीतपुर क्षेत्र में लम्बे समय से सड़कें खराब हैं। इसकी वजह क्या है और लोगों को राहत कब मिलेगी?
जगजीतपुर क्षेत्र में सीवर लाइन का काम सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं में से एक है। यहां कई काॅलोनियां ऐसी हैं जो निचले स्तर पर बसी हुई हैं और पहले वहां पानी की निकासी की कोई व्यवस्थित व्यवस्था नहीं थी। इसी समस्या को देखते हुए वर्ष 2012 में इस दिशा में काम करने की जरूरत महसूस हुई और 2014 से इसके लिए प्रयास शुरू किए गए। वर्ष 2015 में डीपीआर तैयार हुई। इसके बाद परियोजना के लिए जर्मनी से ऋण की व्यवस्था की गई। यह क्षेत्र उस समय ग्रामीण क्षेत्र में आता था, जहां सीवर व्यवस्था लागू करने में तकनीकी और
प्रशासनिक दिक्कतें थीं। वर्ष 2018 में इसे शहर में शामिल कराया गया। इसके बाद सीवर परियोजना के लिए एक शर्त थी कि क्षेत्र में प्रति व्यक्ति 130 लीटर पानी की उपलब्धता हो। इसके लिए करीब 75 करोड़ रुपए की पेयजल योजना भी स्वीकृत कराई गई। सीवर परियोजना पर पिछले ढाई वर्षों से काम चल रहा है। इसकी कुल लागत करीब 252 करोड़ रुपए है। पेयजल योजना को जोड़ें तो यह क्षेत्र के लिए बड़ा निवेश है। परियोजना पूरी होने के बाद आने वाले 50-60 वर्षों तक इसका लाभ लोगों को मिलेगा। सीवर का काम शुरू करने से पहले काॅलोनी के लोगों को पूरी जानकारी दी गई थी कि परियोजना के कारण सड़कों को खोदना पड़ेगा और काम पूरा होने में समय लगेगा। जहां काम जल्दी पूरा हो सकता था, वहां सड़कें बनाई जा चुकी हैं। द्वारका विहार, उदय विहार, राज विहार और त्रिलोक नगर सहित कई इलाकों में काम पूरा हुआ है। वहीं राज विहार फेस-2 और फेस-3 जैसे क्षेत्रों में अभी काम चल रहा है। सीवर जैसी बड़ी परियोजना में समय लगता है, इसलिए जहां तकनीकी रूप से अधिक समय की जरूरत है, वहां काम पूरा होने में भी समय लगेगा।
शिक्षा के क्षेत्र में रानीपुर विधानसभा में क्या काम हुए हैं और अभी क्या किया जाना बाकी है?
रानीपुर विधानसभा में हरिद्वार के प्रमुख शिक्षण संस्थानों में से कई संस्थान मौजूद हैं। डीपीएस, एसवीएमआईसी, डीएवी और गुरुकुल विश्वविद्यालय सहित कई महत्वपूर्ण शिक्षण संस्थान यहां हैं। इसके अलावा आईटीआई और पाॅलीटेक्निक जैसी तकनीकी शिक्षा की सुविधाएं भी क्षेत्र में उपलब्ध कराई गई हैं। खेल के क्षेत्र में भी रोशनाबाद में करीब 100 करोड़ रुपए की लागत से स्टेडियम का निर्माण कराया गया है। यहां बच्चे प्रशिक्षण लेते हैं और विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लेकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन कर रहे हैं। हाल ही में इसी स्टेडियम में राष्ट्रीय खेलों का आयोजन भी हुआ। पिछले करीब 10 वर्षों में खेलों के लिए आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने पर लगभग 100 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं।
स्वास्थ्य सुविधाओं के लिहाज से रानीपुर विधानसभा अब भी पिछड़ी हुई है ऐसा क्यों?
पूरे जिले में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी एक चुनौती है लेकिन स्वास्थ्य के क्षेत्र में रानीपुर विधानसभा में महत्वपूर्ण काम हुए हैं। जगजीतपुर में करीब 700 करोड़ रुपए की लागत से मेडिकल काॅलेज तैयार हुआ है। वहां पिछले दो वर्षों से एमबीबीएस की कक्षाएं चल रही हैं। फिलहाल तीन दिन कैंप ओपीडी भी संचालित की जा रही है, जिसे आने वाले समय में नियमित ओपीडी में बदलने की योजना है। इसके अलावा 300 बेड का ईएसआई अस्पताल भी करीब 300 करोड़ रुपए की लागत से तैयार हो चुका है। ज्वालापुर के पीएचसी को सीएचसी में बदला गया है। बहादराबाद के पीएचसी को भी सीएचसी में अपग्रेड किया गया है और करीब साढ़े आठ करोड़ रुपए की लागत से नई बिल्डिंग तैयार की गई है। बहादराबाद में एलोपैथी, होम्योपैथी और आयुर्वेदिक चिकित्सा सेवाएं भी उपलब्ध हैं। यहां करीब दो करोड़ रुपए की लागत से आयुर्वेदिक अस्पताल का निर्माण भी कराया गया है। स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की दिशा में लगातार काम हो रहा है।
जगजीतपुर मेडिकल कॉलेज में पिछले दो वर्षों से बिजली की समस्या बनी हुई है। इसका स्थायी समाधान अब तक क्यों नहीं हो पाया?
मेडिकल काॅलेज की स्थायी बिजली व्यवस्था के लिए करीब साढ़े 11 करोड़ रुपए का एस्टिमेट शासन स्तर पर भेजा गया था। अभी तक कॉलेज में जो बिजली इस्तेमाल हो रही थी, वह ठेकेदार के कनेक्शन से मिल रही थी। ठेकेदार द्वारा कनेक्शन जारी रखने में असमर्थता जताए जाने के बाद उससे बातचीत कर फिलहाल बिजली की व्यवस्था जारी रखी गई है। स्थायी कनेक्शन के लिए शासन से एस्टिमेट स्वीकृत हो चुका है और विभाग की ओर से लाइन भी तैयार कर दी गई है। अब कनेक्शन के लिए आवश्यक राशि जमा की जानी है। इसके बाद मेडिकल कॉलेज को अपना स्वतंत्र बिजली कनेक्शन मिल जाएगा।
रानीपुर औद्योगिक क्षेत्र है। सिडकुल के अलावा स्थानीय युवाओं के रोजगार के लिए क्या प्रयास किए गए हैं?
सिडकुल में बड़ी संख्या में कम्पनियां हैं, जिनमें स्थानीय और बाहरी दोनों क्षेत्रों के युवाओं को रोजगार मिल रहा है। सरकार की ओर से युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। रोजगार मेलों और अन्य माध्यमों से युवाओं को इन योजनाओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना सहित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से कई युवाओं ने अपना स्वरोजगार और स्टार्टअप शुरू किया है। महिलाओं ने भी स्वरोजगार के क्षेत्र में अच्छा काम किया है। रोजगार के क्षेत्र में भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं ताकि युवाओं को अधिक से अधिक अवसर मिल सकें।
हरिद्वार में नशे की समस्या गम्भीर होती जा रही है। रानीपुर भी इससे अछूता नहीं है। इसे रोकने के लिए क्या किया जा रहा है?
नशा केवल रानीपुर या हरिद्वार की नहीं बल्कि पूरे देश की गम्भीर समस्या है। केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय की ओर से भी इसे गम्भीरता से लिया जा रहा है। प्रशासन और सम्बंधित विभागों द्वारा लगातार छापेमारी की कार्रवाई की जा रही है और नशे के कारोबार से जुड़े लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजने की कार्रवाई की जा रही है। इसके साथ ही जागरूकता भी जरूरी है। बच्चों और युवाओं तक नशे के दुष्प्रभावों की जानकारी पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसमें समाज की भी उतनी ही जिम्मेदारी है जितनी प्रशासन की। अभिभावकों को अपने बच्चों पर नजर रखनी चाहिए और यदि उन्हें किसी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिलती है तो उसे प्रशासन के संज्ञान में लाना चाहिए, ताकि सम्बंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके।
2027 के विधानसभा चुनाव में आपकी प्राथमिकताएं क्या रहेगी?
प्राथमिकता फिलहाल उन परियोजनाओं को पूरा करना है जो पाइपलाइन में हैं। पिछले 15 वर्षों में क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण काम हुए हैं और आने वाले समय में उन्हें पूरा करने पर जोर रहेगा। सीवर परियोजना इसका बड़ा उदाहरण है। इसके अलग-अलग चरणों में क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों को शामिल किया गया है। पहले चरण में जगजीतपुर क्षेत्र का काम पूरा किया जा रहा है। दूसरे चरण में सीतापुर और हरिलोक क्षेत्र तथा तीसरे चरण में सुभाष नगर, टिहरी विस्थापित और शिवालिक नगर जैसे क्षेत्रों को शामिल किया जाना है। पेयजल के क्षेत्र में भी करीब ढाई सौ करोड़ रुपए की योजनाएं पूरी की गई हैं। जिन क्षेत्रों में अभी सरकारी पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, वहां नई योजनाओं पर काम किया जा रहा है। टिहरी विस्थापित, शिवालिक नगर, रामधाम, गोपाल नगर, देवनगर और नवोदय नगर जैसे क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत है। जायका के तहत करीब 125 करोड़ रुपए की एक परियोजना शासन को भेजी गई है। इसके स्वीकृत होने के बाद इन क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था को और मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा। इसके अलावा क्षेत्र में कई पुलों का निर्माण चल रहा है। शिवालिक नगर से सुभाष नगर को जोड़ने वाला पुल, सिडकुल बाईपास से धनौली मार्ग को जोड़ने वाला पुल और रोशनाबाद से औरंगाबाद को जोड़ने वाले पुल का काम चल रहा है। औरंगाबाद वाले पुल की लागत करीब 40 करोड़ रुपए है। हाईवे पर दो फ्लाईओवर भी स्वीकृत कराए गए हैं और उनका निर्माण चल रहा है। इन्हें अक्टूबर तक शुरू करने का लक्ष्य है। मेडिकल कॉलेज के पास रिंग रोड पर लक्सर और हरिद्वार की ओर जाने के लिए कट की सुविधा पर भी काम चल रहा है। कुल मिलाकर प्राथमिकता यह है कि जो योजनाएं चल रही हैं, उन्हें समय पर पूरा किया जाए और इसके बाद क्षेत्र की जरूरत के अनुसार नई योजनाओं पर काम किया जाए। स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, पेयजल, सीवर और बेहतर
कनेक्टिविटी क्षेत्र के विकास की प्रमुख प्राथमिकताएं रहेंगी।

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