छात्रों की गूंज, राहुल और भाजपा की बढ़ती बेचैनी
इंदौर में राहुल गांधी की ‘छात्रों की गूंज’ में हजारों युवाओं की मौजूदगी ने मध्य प्रदेश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी। कांग्रेस का दावा था कि कार्यक्रम के लिए डेढ़ लाख से अधिक युवाओं ने रजिस्ट्रेशन कराया जबकि स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में कार्यक्रम स्थल पर करीब 20 से 25 हजार युवाओं की मौजूदगी बताई गई लेकिन मैदान के बाहर भी बड़ी संख्या में छात्र स्क्रीन पर कार्यक्रम देखते रहे। मंच पर छात्रों ने भर्ती, पेपर, शिक्षा और रोजगार के सवाल उठाए तो राहुल गांधी ने मोदी-शाह के ‘सिस्टम’ पर हमला बोला। इसी मंच पर स्टैंडअप काॅमेडियन पुलकित मणि ने राहुल गांधी को गले लगाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिमिक्री की और उनकी दिवंगत मां से जुड़ा संवाद भी किया। यही हिस्सा कार्यक्रम के राजनीतिक विवाद का नया केंद्र बन गया है। भाजपा ने राहुल गांधी से माफी मांगने की मांग की है जबकि कांग्रेस ने इसे काॅमेडी और मिमिक्री बताते हुए भाजपा की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाए हैं
इंदौर में 19 सितम्बर को राहुल गांधी की ‘छात्रों की गूंज’ का पांचवां कार्यक्रम हुआ और जिस तरह हजारों युवा इस कार्यक्रम में पहुंचे, उससे मध्य प्रदेश की राजनीति में छात्र और युवा एक बार फिर केंद्र में आ गए। कांग्रेस ने कार्यक्रम के लिए डेढ़ लाख से अधिक रजिस्ट्रेशन का दावा किया था। स्थानीय मीडिया की रिपोर्टों में कार्यक्रम स्थल पर करीब 20 से 25 हजार युवाओं की मौजूदगी बताई गई। मैदान भर जाने के बाद बाहर भी बड़ी संख्या में छात्र मौजूद रहे और स्क्रीन पर कार्यक्रम देखा। यानी कांग्रेस ने जितने बड़े स्तर पर रजिस्ट्रेशन का दावा किया था, वास्तविक कार्यक्रम स्थल की भीड़ उससे कम रही लेकिन इंदौर में हजारों युवाओं की मौजूदगी ने कार्यक्रम को प्रदेश की सामान्य राजनीतिक सभाओं से अलग चर्चा जरूर दी।
राहुल गांधी के इस कार्यक्रम का केंद्र छात्रों की समस्याएं थीं। मंच पर मध्य प्रदेश के युवाओं ने अपनी परेशानियां सामने रखीं। एमपीपीएससी की तैयारी कर रहे एक छात्र ने उम्र सीमा पार हो जाने की समस्या बताई। नर्सिंग की एक छात्रा ने बताया कि 2020 में प्रवेश लेने के बावजूद 2026 में भी वह तीसरे वर्ष में है। भर्ती परीक्षाओं के परिणाम, प्रतियोगी परीक्षाओं में देरी, नर्सिंग शिक्षा की स्थिति, रोजगार और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सवाल लगातार सामने आते रहे।
एक छात्र ने राहुल गांधी से कहा कि वह सिस्टम से हार चुका है। राहुल गांधी ने इसी बात को अपने भाषण का राजनीतिक आधार बनाया और कहा कि मौजूदा व्यवस्था छात्रों के सवालों से डरती है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में ऐसा सिस्टम काम कर रहा है जो छात्रों के बजाय अपने समर्थकों को आगे बढ़ाता है।
राहुल गांधी ने अपने भाषण में देश की सत्ता व्यवस्था को लेकर कई गम्भीर आरोप लगाए। उन्होंने बड़े पर्दे पर नरेंद्र मोदी, अमित शाह, मोहन भागवत और अजित डोभाल समेत छह लोगों की तस्वीरें दिखाईं और कहा कि देश की व्यवस्था कुछ लोगों के हाथ में है। उन्होंने अडाणी और अम्बानी का भी जिक्र किया और आरोप लगाया कि यह पूरा सिस्टम बड़े कारोबारी हितों से जुड़ा हुआ है। राहुल गांधी ने छात्रों से कहा कि सवाल पूछना बंद नहीं करना चाहिए।
शिक्षा के सवाल पर भी राहुल गांधी ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने शिक्षा बजट में कमी का दावा किया और सरकारी स्कूलों के बंद होने का मुद्दा उठाया। दिल्ली के सत्य निकेतन में पीजी बिल्डिंग गिरने की घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने छात्रों की सुरक्षा और हाॅस्टल व्यवस्था पर सवाल उठाया। मध्य प्रदेश के एक छात्र के परिवार को भी मंच पर बुलाया गया।
इंदौर के कार्यक्रम की राजनीतिक अहमियत केवल राहुल गांधी के भाषण तक सीमित नहीं रही। कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने थीं। राहुल गांधी के कार्यक्रम के लिए पहले नेहरू स्टेडियम मांगा गया था लेकिन अनुमति नहीं मिली। इसके बाद क्षेत्रीय पार्क के सामने आईडीए की जमीन पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। करीब 12 हजार वर्ग मीटर जमीन तीन दिन के लिए ली गई और इसके लिए कांग्रेस की ओर से 10.08 लाख रुपए जमा किए गए। बाद में आईडीए की ओर से अतिरिक्त भुगतान की मांग ने विवाद को और बढ़ा दिया। कार्यक्रम को लेकर पुलिस की ओर से सुरक्षा की कई शर्तें लगाई गईं। स्वयंसेवकों की संख्या, महिला स्वयंसेवकों की तैनाती, सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था, प्रवेश और निकास के अलग रास्ते और मैदान की क्षमता के अनुसार लोगों के प्रवेश जैसी शर्तें सामने आईं। कांग्रेस ने इन प्रशासनिक कवायदों को राजनीतिक दबाव के रूप में देखा जबकि प्रशासन की ओर से इन्हें सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा बताया गया। इसी बीच भाजपा नेताओं की टिप्पणियां भी कार्यक्रम की चर्चा बढ़ाती रहीं। कैलाश विजयवर्गीय ने राहुल गांधी के कार्यक्रम को लेकर ‘सर्कस’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया और रैपरों की मौजूदगी पर टिप्पणी करते हुए कहा कि रैपर की क्या जरूरत है, राहुल गांधी ही काफी हैं। इसके बाद कार्यक्रम को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच बयानबाजी और तेज हो गई।
इंदौर की सड़कों पर ‘झूठ की गूंज’ के पोस्टर लगाए जाने की खबर भी सामने आई। कांग्रेस ने इसे कार्यक्रम के खिलाफ अभियान बताया तो भाजपा की ओर से राहुल गांधी के दावों को निशाना बनाया गया। कार्यक्रम से पहले ही यह स्पष्ट हो गया था कि राहुल गांधी का इंदौर दौरा केवल छात्र संवाद तक सीमित रहने वाला नहीं है लेकिन कार्यक्रम के मंच पर हुआ एक घटनाक्रम अब पूरे आयोजन के राजनीतिक विमर्श को एक अलग दिशा दे रहा है।
राहुल गांधी के साथ मंच पर स्टैंड अप काॅमेडियन पुलकित मणि आए। उन्होंने राहुल गांधी को गले लगाया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैली में बातचीत शुरू की। उन्होंने प्रधानमंत्री के विदेशी नेताओं से मिलने के अंदाज की मिमिक्री की और बार-बार ‘माई फ्रेंड’ जैसे संवाद बोले। राहुल गांधी ने भी इस दौरान उनसे मजाकिया अंदाज में बातचीत की।
राहुल गांधी के साथ मंच पर स्टैंड अप काॅमेडियन पुलकित मणि आए। उन्होंने राहुल गांधी को गले लगाया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैली में बातचीत शुरू की। उन्होंने प्रधानमंत्री के विदेशी नेताओं से मिलने के अंदाज की मिमिक्री की और बार-बार ‘माई फ्रेंड’ जैसे संवाद बोले। राहुल गांधी ने भी इस दौरान उनसे मजाकिया अंदाज में बातचीत की।
इसके बाद कॉमेडियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस सार्वजनिक घटना की भी मिमिक्री की जिसमें प्रधानमंत्री एक बुजुर्ग महिला के लिए कुर्सी मंगवाते दिखाई दिए थे। इसी क्रम में कॉमेडियन ने ‘मां को कुर्सी दो, मां’ वाला संवाद बोला। इस प्रस्तुति का वीडियो कांग्रेस की ओर से सोशल मीडिया पर साझा किया गया और इसके बाद भाजपा ने राहुल गांधी तथा कांग्रेस पर तीखा हमला शुरू कर दिया।
भाजपा का आरोप है कि इस प्रस्तुति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिवंगत मां और एक बुजुर्ग महिला का अपमान किया गया। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, किरेन रिजिजू, प्रहलाद जोशी और भाजपा के कई अन्य नेताओं ने इस पर राहुल गांधी से माफी की मांग की। भाजपा नेताओं ने सवाल उठाया कि राहुल गांधी मंच पर मौजूद थे और प्रस्तुति के दौरान हंसते हुए दिखाई दिए, इसलिए उन्हें इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
कांग्रेस की ओर से इस पर पलटवार किया गया। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मिमिक्री राजनीतिक व्यंग्य का हिस्सा है और इसे लेकर भाजपा अनावश्यक विवाद खड़ा कर रही है। कांग्रेस नेताओं ने यह भी सवाल उठाया कि यदि किसी नेता की मां के सम्मान की बात की जा रही है तो दूसरे नेताओं की माताओं के बारे में की गई टिप्पणियों पर भी समान प्रतिक्रिया होनी चाहिए। कांग्रेस ने इस पूरे विवाद को भाजपा की राजनीतिक प्रतिक्रिया बताया। यानी जिस मंच पर राहुल गांधी छात्रों की शिक्षा, रोजगार और भर्ती के सवालों को लेकर सरकार पर हमला कर रहे थे, उसी मंच का एक हिस्सा अब प्रधानमंत्री की मिमिक्री और उनकी मां से जुड़े संवाद को लेकर राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया है।
यह विवाद इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ‘छात्रों की गूंज’ को राहुल गांधी एक गम्भीर छात्र संवाद अभियान के रूप में आगे बढ़ा रहे हैं। इंदौर में मंच पर छात्रों की समस्याएं, रोजगार, शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दे उठे लेकिन कार्यक्रम के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा प्रधानमंत्री की मिमिक्री वाले वीडियो की होने लगी। इससे पहले ‘छात्रों की गूंज’ के चार कार्यक्रम हो चुके हैं।
राजस्थान के कोटा, उत्तर प्रदेश के प्रयागराज, उत्तराखण्ड के देहरादून और महाराष्ट्र के पुणे के बाद इंदौर पांचवां पड़ाव था। हर जगह राहुल गांधी ने छात्रों के स्थानीय सवालों को राष्ट्रीय राजनीति से जोड़ने की कोशिश की।
इंदौर में राहुल गांधी ने इसी सिलसिले को आगे बढ़ाया। फर्क इतना था कि इस बार मंच पर छात्रों के साथ मनोरंजन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का भी बड़ा हिस्सा था। राघव चैतन्य और विकास अनबिटेबल की
प्रस्तुतियां हुईं और युवाओं ने इन कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। इसके बाद पुलकित मणि की प्रस्तुति ने कार्यक्रम को एक और राजनीतिक विवाद दे दिया। इस पूरे अभियान में राहुल गांधी की रणनीति साफ दिखाई देती है। वे बड़े नेताओं की पारम्परिक सभाओं की जगह छात्रों के बीच जा रहे हैं। मंच पर छात्रों को बोलने का अवसर दिया जा रहा है। उनकी व्यक्तिगत समस्याओं को सार्वजनिक राजनीतिक सवाल बनाया जा रहा है और फिर उन सवालों को केंद्र सरकार की नीतियों से जोड़ा जा रहा है।
प्रस्तुतियां हुईं और युवाओं ने इन कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। इसके बाद पुलकित मणि की प्रस्तुति ने कार्यक्रम को एक और राजनीतिक विवाद दे दिया। इस पूरे अभियान में राहुल गांधी की रणनीति साफ दिखाई देती है। वे बड़े नेताओं की पारम्परिक सभाओं की जगह छात्रों के बीच जा रहे हैं। मंच पर छात्रों को बोलने का अवसर दिया जा रहा है। उनकी व्यक्तिगत समस्याओं को सार्वजनिक राजनीतिक सवाल बनाया जा रहा है और फिर उन सवालों को केंद्र सरकार की नीतियों से जोड़ा जा रहा है।
इंदौर में भी यही हुआ। छात्र ने कहा कि वह उम्र सीमा पार कर चुका है। नर्सिंग छात्रा ने छह साल में भी पढ़ाई पूरी नहीं होने की समस्या बताई। दूसरे छात्रों ने भर्ती और परीक्षाओं के सवाल उठाए। राहुल गांधी ने इन समस्याओं को ‘सिस्टम’ से जोड़ दिया। यहीं से इस अभियान की राजनीतिक अहमियत बढ़ती है। भाजपा के लिए चुनौती केवल राहुल गांधी का भाषण नहीं है बल्कि यह है कि कांग्रेस छात्र और युवा वर्ग के बीच लगातार एक राजनीतिक संवाद बनाने की कोशिश कर रही है। इंदौर से पहले चार शहरों में कार्यक्रम और फिर मध्य प्रदेश में इसे विधानसभा स्तर तक ले जाने की कांग्रेस की तैयारी इसी दिशा की ओर संकेत करती है।
कांग्रेस ने इंदौर के कार्यक्रम के प्रसारण के लिए मध्य प्रदेश की विधानसभा सीटों पर बड़ी स्क्रीन लगाने की तैयारी भी की थी। पार्टी की कोशिश थी कि जो युवा इंदौर नहीं पहुंच सके, वे अपने क्षेत्र में बैठकर कार्यक्रम देख सकें। इस तरह ‘छात्रों की गूंज’ को केवल एक शहर का कार्यक्रम न रखकर प्रदेशव्यापी अभियान बनाने की कोशिश की गई।
राहुल गांधी के इस अभियान को लेकर भाजपा की प्रतिक्रियाएं लगातार तीखी होती जा रही हैं। इंदौर में कार्यक्रम से पहले मैदान को लेकर विवाद, फिर सुरक्षा शर्तें, किराए का मामला, भाजपा नेताओं के बयान और कार्यक्रम के बाद प्रधानमंत्री की मिमिक्री का विवाद, इन सबने ‘छात्रों की गूंज’ को लगातार खबरों में बनाए रखा।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इंदौर में राहुल गांधी जिस मुद्दे पर आए थे, वह मंच से गायब नहीं हुआ। हजारों युवाओं के सामने शिक्षा, रोजगार, परीक्षा और भर्ती के सवाल उठे। छात्रों ने अपनी समस्याएं बताईं और राहुल गांधी ने उन सवालों को सत्ता के खिलाफ अपने राजनीतिक अभियान से जोड़ा लेकिन कार्यक्रम के अगले दिन राजनीतिक बहस का बड़ा हिस्सा पुलकित मणि की प्रस्तुति पर चला गया। प्रधानमंत्री की मिमिक्री, राहुल गांधी का मंच पर मौजूद होना, बुजुर्ग महिला और मां से जुड़ा संवाद और उसके बाद भाजपा की माफी की मांग ने कार्यक्रम की दूसरी तस्वीर सामने रख दी। इस तरह इंदौर की ‘छात्रों की गूंज’ में एक साथ दो राजनीतिक कहानियां दिखाई दीं। पहली कहानी उन हजारों छात्रों की है जो शिक्षा, भर्ती, रोजगार और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े सवाल लेकर पहुंचे। दूसरी कहानी उस मंच की है जहां प्रधानमंत्री की मिमिक्री ने कांग्रेस और भाजपा के बीच एक नया विवाद खड़ा कर दिया।
राहुल गांधी के लिए अब इस अभियान का अगला चरण महत्वपूर्ण होगा। कोटा से देहरादून, प्रयागराज और पुणे होते हुए इंदौर तक पहुंची ‘छात्रों की गूंज’ में हर शहर में युवाओं की समस्याएं सामने आई हैं। इंदौर में यह कार्यक्रम भीड़ और राजनीतिक विवाद दोनों के कारण खासा चर्चित रहा। कांग्रेस इसे युवाओं के बीच बढ़ते संवाद के रूप में देख रही है और भाजपा इसे राहुल गांधी के राजनीतिक अभियान के रूप में निशाना बना रही है। फिलहाल इंदौर की तस्वीर यही है मैदान में हजारों छात्र, मंच पर राहुल गांधी, छात्रों के हाथ में रोजगार और शिक्षा के सवाल और उसी मंच से निकली प्रधानमंत्री की मिमिक्री अब भाजपा-कांग्रेस के बीच नए विवाद का कारण। ‘छात्रों की गूंज’ का राजनीतिक असर अब केवल इस बात से नहीं मापा जाएगा कि इंदौर में कितने लोग पहुंचे बल्कि इससे भी कि इस अभियान के बाद युवा राजनीति का अगला सवाल क्या बनता है।
