बेनकाब चेहरे, दाग बड़े गहरे

आम चुनाव, 2019 कई मायनों में भविष्य के भारत की नींव को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। ये चुनाव तय करेगा कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का अधूरा पड़ा … Read More

अब मैं मार दिया जाऊंगा…

पच्चीस मार्च का दिन उत्तराखण्ड के पत्रकारों को हमेशा याद रखते हुए, इस दिन विशेष रूप से सतर्कता बरतनी चाहिए। यूं तो जैसे हालात इस समय विश्वभर के हैं, पत्रकारों … Read More

जब मेरी आग बुझेगी…

द हिंदू’ जैसे प्रतिष्ठित अंग्रेजी दैनिक ने गत माह, फरवरी 13, को एक बड़ा खुलासा राफेल डील की बाबत कर डाला। ‘द हिंदू’ की रिपोर्ट के बाद कम से कम … Read More

चारण नहीं बन सकता मैं

युद्ध मेरी समझ से किसी समस्या का हल नहीं हो सकता। भारत-पाकिस्तान के विषय में तो यह शत-प्रतिशत सत्य है। भले ही हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री कितना क्यों ना दहाड़ लें, … Read More

हिंदी का अलबेला नायक

हिंदी साहित्य के ‘शिखर पुरुष’, ‘हिंदी आलोचक के नियामक’, ‘आलोचना की धारा’, ‘आलोचना के सांस्कृतिक स्रोत’, ‘तर्क के डिक्टेटर’, ‘आलोचना की कसौटी’ और निजी रूप में मुझसे आगाध स्नेह रखने/करने वाले … Read More

प्रियंका की अग्नि परीक्षा

नेहरू की पर नवासी, इंदिरा की पोती, राजीव की बेटी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की बहन प्रियंका के राजनीति में आधिकारिक प्रवेश का ऐलान आगामी आम चुनाव में सत्तारूढ़ … Read More

घनघोर कुहासे में लोकतंत्र

जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार की परेशानियों में इजाफा तेजी से हो रहा है। केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई के शीर्ष स्तर पर मचा घमासान हो … Read More

रोशनी मय्यसर नहीं शहर के लिए

वर्ष 2018 मेरे लिए बेहद संघर्षमयी रहा। सोचा ना था कि इतना कठिन समय भी कभी देखना- भोगना होगा। लेकिन यही जीवन चक्र का अटल सत्य है। स्थितियां कभी समान … Read More

फिर याद आए रामलला

तीन राज्यों में मिली हार के पश्चात भारतीय जनता पार्टी में गहन चिंतन-मंथन का दौर शुरू हो चुका है। राजस्थान छोड़, अन्य दो राज्य भाजपा के घोषित हिन्दुत्व एजेंडे की … Read More

लोकतंत्र के लोक को सलाम

इतिहास खुद को दोहराता है। विडंबना लेकिन यह कि इससे न तो कोई सबक लेता है, न ही इसकी तरफ झांकता है। सत्ता के संदर्भ में यह ज्यादा प्रभावी है। … Read More

किसके मन की बात

डेवलपमेंट यानी विकास आखिर बला क्या है। किस को सही मायने में विकास कहा जा सकता है। इस विकास शब्द ने इन दिनों मुझे बड़ा परेशान कर  रखा है। चुनावों … Read More

देर आए दुरुस्त आए

मेरी उम्र तब पंद्रह साल की थी। मेरे शांत से शहर रानीखेत की खुशनुमा फिजाओं में कुछ दिनों से अजीब किस्म की बोझिलता हावी महसूस हो रही थी। वे जो … Read More