नस्ली हिंसा के आरोप में घिरी अमेरिकी पुलिस

अमेरिका इन दिनों भारी नस्ली हिंसा के दौर से गुजर रहा है। श्वेत और अश्वेत आबादी के बीच लगातार तनाव बढ़ने के चलते दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की पुलिस पर भी नस्लभेद के आरोप लगने शुरू हो गए हैं। 3 अगस्त को अमेरिका के कोलाराडो में दो पुलिस अफसरों द्वारा दो अश्वेत अमेकियों को पूछताछ के लिए सड़क पर रोका गया। पुलिस को शक था कि ये दोनों कुछ ही देर पहले लूट की एक घटना में शामिल थे। पुलिस द्वारा पूछताछ के दौरान इनमें से एक लड़का डिवोन बैली अचानक सड़क से दूसरी दिशा की तरफ भाग जाता है। 19 वर्षीय बैली पर दोनों पुलिस अफसर गोलियां चला देते हैं। नियमानुसार ऐसी किसी स्थिति में गोली पैर में भारी जानी चाहिए, लेकिन पुलिस उसकी पीठ पर गोली मारती है जिससे उसकी मृत्यु हो गई। बाद में पुलिस द्वारा उसके पास एक बंदूक होने की बात कही गई। मारा गया डिवोन बैली अश्वेत और मारने वाले कोलाराडो पुलिस के दोनों अफसर श्वेत हैं। इस गोलीकांड के बाद मामला पुलिस द्वारा नस्ली हिंसा में तब्दील हो गया है।


कोलाराडो में प्रदर्शन जारी हैं और मांग की जा रही है कि पूरे मामले की जांच एक स्वतंत्र टीम से कराई जाए। बैली के परिजनों का कहना है कि उन्हें वर्तमान में शैरिफ आफिस द्वारा की जा रही जांच पर विश्वास नहीं है क्योंकि शैरिफ आफिस और पुलिस विभाग आपसी तालमेल से काम करते हैं। इसलिए निस्पक्ष जांच संभव नहीं है। दरअसल मामले ने तूल तब पकड़ा जब कोलाराडो पुलिस ने इस घटना के समय बने एक वीडियो को प्रेस में जारी करा। यह वीडियो दोनों पुलिस अफसरों की वर्दी में लगे ‘बाॅडी कैमरे’ से शूट किया गया है जिसमें स्पष्ट नजर आ रहा है कि बैली ने न तो पुलिस अफसरों पर कोई बंदूक तानी, ना ही किसी प्रकार का हमला किया। वह बस अचानक भागने लगा और बगैर उसको पकड़ने का कोई प्रयास किए, उस पर गोली दाग दी गई।

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