…और कारवां बनता गया
‘अकेला ही चला था जानिब-ए-मंजिल, मगर लोग मिलते गए कारवां बनता गया..’ मजरूह सुल्तानपुरी का यह शेर उत्तराखण्ड के पीसीएस अधिकारी हिमांशु कफल्टिया के मिशन एजुकेशन पर सटीक बैठता है। … Read More
‘अकेला ही चला था जानिब-ए-मंजिल, मगर लोग मिलते गए कारवां बनता गया..’ मजरूह सुल्तानपुरी का यह शेर उत्तराखण्ड के पीसीएस अधिकारी हिमांशु कफल्टिया के मिशन एजुकेशन पर सटीक बैठता है। … Read More