आपके जाने से ‘मां’ बहुत जोर से याद आई
हिंदुस्तान की हिन्दुस्तानियत के लिए मुनव्वर सा’ब का जाना जैसे मछलियों के लिए एकाएक समुंदर से पानी का सूख जाना। यह नुकसान अदब और अवाम, दोनों के हिस्से का साझा … Read More
हिंदुस्तान की हिन्दुस्तानियत के लिए मुनव्वर सा’ब का जाना जैसे मछलियों के लिए एकाएक समुंदर से पानी का सूख जाना। यह नुकसान अदब और अवाम, दोनों के हिस्से का साझा … Read More
‘अकेला ही चला था जानिब-ए-मंजिल, मगर लोग मिलते गए कारवां बनता गया..’ मजरूह सुल्तानपुरी का यह शेर उत्तराखण्ड के पीसीएस अधिकारी हिमांशु कफल्टिया के मिशन एजुकेशन पर सटीक बैठता है। … Read More
हिंदी साहित्य समाज में मचा घमासान साहित्य को समाज का दर्पण कहा जाता है। लेकिन इस दर्पण पर कितना धुंधलापन छाया है इसका अंदाजा हाल ही में साहित्य अकादमी से … Read More