इकत्तीस साल बाद मिला न्याय

दिल्ली उच्च न्यायालय ने आज ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए इकत्तीस पूर्व 1987 में मेरठ के हाशिमपुरा कस्बे में हुए दंगों में मारे गए चालीस मुसलमान परिवारों के संग न्याय करते हुए पीएसी के 16 जवानों को उम्र कैद की सजा सुनाई है। गौरतलब है कि दशकों तक चले इस मुकदमे में ट्रायल कोर्ट ने सभी 16 जवानों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था। इस मामले में 19 जवान आरोपी बनाए गए थे जिनमें से तीन की मृत्यु हो चुकी है। यह दंगा उत्तर प्रदेश में वीर बहादुर सिंह के मुख्यमंत्रित्वकाल में हुआ था। दंगे के बाद जांच आयोग भी बने, लेकिन कभी भी पूरा सच सामने न आ पाया। पीएसी और राज्य पुलिस पर तथ्यों के साथ छेड़छाड़ करने के गंभीर आरोप भी लगे। रमजान के दिनों में 22 मई 1987 को हुए इस नरसंहार में 42 लोग मारे गए थे। मामले की सुनवाई 2000 में गाजियाबाद की एक अदालत में शुरू हुई थी। 2002 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को दिल्ली की एक कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया था। 2012 में इस कोर्ट ने यह तो माना कि एक सरकारी एजेंसी ने निर्दोष लोगों की जान ली लेकिन सबूतों के अभाव में सभी आरोपियों को बरी कर दिया था।
पूर्व आईपीएस अफसर विभूति नारायण राय के अनुसार दिल्ली हाईकोर्ट का यह फैसला अच्छा आया है। राज्य के माथे पर जो कलंक लगा था वह कुछ हद तक धूल गया है।

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