पच्चीस साल का साथ, फिर भी अधूरा विकास
हरिद्वार विधानसभा सीट उत्तराखण्ड की सबसे चर्चित सीटों में से एक है। इस सीट का अपना एक अलग राजनीतिक और भौगोलिक महत्व है, यह सीट धार्मिक नगरी हरिद्वार के मुख्य शहर, हर की पैड़ी, कनखल और मयूरपुर जैसे प्रमुख शहरी हिस्सों को कवर करती है। यह उत्तराखण्ड की सबसे महत्वपूर्ण और वीआईपी विधानसभा सीटों में गिनी जाती है। राज्य बनने से पहले (जब यह उत्तर प्रदेश का हिस्सा था), 1957 और 1969 में यहां से कांग्रेस के शांति प्रपन्न शर्मा चुनाव जीते थे। 1974 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के राजेंद्र कुमार गर्ग और 1977 में जनता पार्टी के राज कुमार शर्मा ने भी यहां का प्रतिनिधित्व किया था। साल 2000 में राज्य बनने के बाद, 2002 में यहां पहली बार विधानसभा चुनाव हुए। तब से लेकर आज तक (2002, 2007, 2012, 2017 और 2022) इस सीट पर लगातार भाजपा के नेता मदन कौशिक का कब्जा रहा है जो राज्य में एक अनोखा रिकॉर्ड है। यह पूरी तरह से एक शहरी सीट है। इसमें हरिद्वार नगर निगम के 35 वार्ड शामिल हैं। 2022 के विधानसभा चुनावों के आंकड़ों के अनुसार, इस निर्वाचन क्षेत्र में लगभग 1,49,108 पंजीकृत मतदाता हैं। गंगा के तट पर बसी हरिद्वार नगरी देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में अपनी धार्मिक और आध्यात्मिक पहचान के लिए जानी जाती है। हरकी पैड़ी की आरती, कुम्भ का आयोजन और लाखों श्रद्धालुओं की आस्था इस शहर को विशेष बनाती है लेकिन इसी धार्मिकनगरी की गली-मोहल्लों और बाजारों में जब विकास के मुद्दों को लेकर लोगों से बातचीत की गई तो कई ऐसे सवाल सामने आए, जो हरिद्वार की बदलती तस्वीर पर सोचने को मजबूर करते हैं।
चिकित्सक प्राथमिक उपचार और आवश्यक जीवन रक्षक दवाएं देने के बाद मरीज को उसकी स्थिति के अनुसार एम्स ऋषिकेश सहित उच्च चिकित्सा संस्थानों के लिए रेफर करते हैं।’’ उन्होंने बताया कि अस्पताल में वर्तमान में 70 बेड की सुविधा उपलब्ध है और मरीजों को अधिकतम दवाएं अस्पताल से ही उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है। वीआईपी ड्यूटी के लिए चिकित्सकों की तैनाती रोस्टर के अनुसार की जाती है, वहीं कुम्भ मेले के दौरान सरकार अतिरिक्त डाॅक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों और अस्थायी अस्पतालों की व्यवस्था भी करती है। दूसरी तरफ ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान स्थानीय लोगों और मरीजों का कहना था कि बढ़ती मरीजों की संख्या और आगामी कुम्भ मेले को देखते हुए विशेषज्ञ चिकित्सकों के स्वीकृत पद, आधुनिक जांच सुविधाओं और चिकित्सा संसाधनों में और विस्तार की जरूरत है।
प्रोजेक्ट्स की बात हो रही है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय लोग अब भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं, उच्च शिक्षा के अवसरों, रोजगार और शहर की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठा रहे हैं। हरिद्वार आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के बीच शहर को ऐसी व्यवस्था की जरूरत है जिससे लोग केवल स्नान कर वापस न लौटें बल्कि यहां रुकें, पर्यटन बढ़े और स्थानीय व्यापार को लाभ मिले। कुम्भ और बड़े आयोजनों के नाम पर हर बार करोड़ों रुपए खर्च किए जाते हैं लेकिन स्थायी विकास की कसौटी पर शहर कितना आगे बढ़ा है, यह सवाल अब भी बना हुआ है। हरिद्वार की चुनौती केवल नए निर्माण खड़े करने की नहीं बल्कि उन निर्माणों और योजनाओं को आमजन के जीवन में वास्तविक बदलाव में बदलने की है।
संजय पालीवाल, कांग्रेस, कार्यकर्ता
देखिए भारतीय जानता पार्टी के वरिष्ठ नेता मदन कौशिक जी 5 बार से विधायक हैं और यह कोई आसान कार्य नहीं होता है। विधायक जी की कार्यशैली, उनका लोगों से जुड़ाव बहुत अच्छा है। वो अनुभवी हंै लेकिन मेरा हमेशा से ये कहना रहा है कि 25 साल एक युग परिवर्तन के बराबर है तो कहीं न कहीं आने वाले समय में हरिद्वार शहर को किसी युवा नेतृत्व की सख्त जरूरत होगी जो नए जोश के साथ, नए सोच के साथ विधानसभा में काम करे और जो कुछ हरिद्वार विधानसभा में कमियां हैं, परेशानियां हैं उसे दूर करें। हरिद्वार पूरे विश्व की अध्यात्मिक नगरी है लेकिन आज कहीं न कहीं हरिद्वार का पर्यटन है, जो पर्यटक हैं वो यहां से शिफ्ट होकर
देहरादून, मसूरी, ऋषिकेश की तरफ जुड़ रहे हैं जिससे यहां की अर्थव्यवस्था,यहां के व्यवसाय, पर असर पड़ना शुरू हो गया है तो हरिद्वार के अंदर ऐसी सुविधाएं, ऐसा सौंदर्यीकरण, ऐसी व्यवस्था, योजना होनी चाहिए जिससे यात्री, पर्यटक शहर के अंदर रुकें।
डाॅ. विशाल गर्ग, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य, भाजपा
भारतीय जनता पार्टी के मदन कौशिक 25 वर्षों से यहां के विधायक हैं। इतने लम्बे समय तक एक ही विधायक को जनता ने मौका दिया लेकिन शहर का अपेक्षित विकास कुछ नहीं हुआ। अगर कुछ हुआ तो उन्होंने आबकारी मंत्री रहते हुए घर-घर में शराब पहुंचाने का कार्य किया। उनके विधायक और मंत्री रहते कुम्भ से जुड़े विकास कार्यों में अनियमितताओं और भ्रष्टाचार का खेला, खेला जाता रहा है, स्थानीय एजेंसियों की अनदेखी कर बाहरी कम्पनियों को कार्य दिए जा रहे हैं। 2010 के कुम्भ में इन पर आरोप लगे थे और 2012 का चुनाव हारते-हारते बचे थे। आज फिर कुम्भ के कार्यों में अनियमिताएं हो रही हैं, भारी भ्रष्टाचार हो रहा है। अर्द्धकुम्भ को कुम्भ के नाम पर केवल धन खर्च करने का माध्यम बनाया जा रहा है।
अमन गर्ग, अध्यक्ष, जिला महानगर, कांग्रेस कमेटी
मैं हरिद्वार में हरकी पैड़ी के निकट रहता हूं। मेरा जन्म 1972 का है, मैं तब से ही हरिद्वार को देखता आ रहा हूं। इसका विकास तब से कितना हुआ, कितना नहीं इसमें मैं यही कहना चाहूंगा कि हरिद्वार की स्थिति वहीं की वहीं है। 25 सालों से मदन कौशिक यहां के विधायक हैं लेकिन विकास की बात करूं तो कोई भी उपलब्धि हमें कहीं नहीं दिखी है। गली-गली के अंदर शराब का व्यवसाय चल रहा है। यहां आप जाएंगे तो शिव मूर्ति है, स्टेशन के नजदीक, वहां इतना घिनौना व्यवसाय हो रहा है वेश्यावृत्ति तक हो रही है। यहां की सड़कें लगभग 2 वर्षों से खुदी पड़ी हैं, उन सड़कों का कोई भी कार्य सुचारू रूप से नहीं हो रहा है। नशे के कारोबारियों पर अंकुश लगा नहीं, हरिद्वार के अंदर स्थित मेला अस्पताल में विशेषज्ञ डाॅक्टरों का अभाव है, पैरा मेडिकल का भी अभाव है कुछ मुख्य मशीनें वहां नहीं है। गम्भीर मरीजों व बीमारी का वहां इलाज नहीं हो पता है। ये तो वास्तव में उनकी चतुराई ही कहेंगे कि उन्होंने घर-घर तक युवाओं तक अपनी जो पकड़ बनाई है उसके चलते वे जीतते आ रहे हैं। अब लेकिन समझना होगा कि उन्हें जनता की मांग सिर्फ व्यवहारिक विधायक तक सीमित नहीं है उन्हें विकसित विधानसभा बना सके ऐसे विधायक की जरूरत है।
चंद्रमोहन कौशिक, स्थानीय निवासी
जितनी जनता की अपेक्षा थी उसके अनुरूप विकास कम हुआ है विधायक का कार्यकाल 50-50 प्रतिशत रहा है। अगर बात विधायक के व्यवहार की करें तो लगातार 5 चुनावों से वही जीत रहे हैं तो इसका अंदाजा हम लगा सकते हैं कि वे व्यवहार कुशल हैं। बाकी रही बात नशे के बढ़ते जाल की तो नशा हमारी नशों में, हमारे खून में ही बस गया है। कोई भी इसके लिए जागरूक नहीं है, न सरकारें, न जनप्रतिनिधि और न ही आम नागरिक। देखिए हरिद्वार जाना जाता है सांस्कृतिक विरासत के लिए। पौराणिक हरकी पैड़ी का अपना महत्व है लेकिन अगर आप हरकी पैड़ी जाएंगे तो आपको वहां सारी अव्यवस्थाएं मिलेंगी। जनता का भी जागरूक होना जरूरी है। मेरे अनुसार इस शहर की जनता सोई हुई है।
दिनेश जोशी, स्थानीय निवासी
क्र. क्षेत्र मुद्दा / जमीनी स्थिति अंक (10 में)
- जनसम्पर्क एवं उपलब्धता लम्बे समय से क्षेत्र में मजबूत राजनीतिक पकड़ और जनता के बीच सक्रिय उपस्थिति लेकिन मीडिया के सवालों से दूरी पर सवाल 5
- शिक्षा 25 वर्षों के कार्यकाल के बावजूद हरिद्वार में कोई बड़ा सरकारी उच्च शिक्षण संस्थान विकसित नहीं हो सका 3
- स्वास्थ्य सेवाएं मेला अस्पताल और मेडिकल काॅलेज होने के बावजूद विशेषज्ञ डाॅक्टरों, उन्नत उपचार और सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल कायम 4
- रोजगार एवं उद्योग सिडकुल से रोजगार मिला लेकिन स्थानीय युवाओं को अपेक्षित अवसर नहीं मिले और नई रोजगार नीति का अभाव दिखा 2
- सड़क एवं आधारभूत ढांचा कई परियोजनाएं शुरू हुईं लेकिन जलभराव, टूटी सड़कें और धीमे निर्माण कार्य आम समस्या बने हुए हैं 2
- पर्यटन एवं धार्मिक विकास कुम्भ और धार्मिक पर्यटन के लिए कई योजनाएं बनीं लेकिन स्थायी पर्यटन विकास और श्रद्धालुओं की सुविधाओं में अपेक्षित सुधार नहीं 2
- कानून व्यवस्था एवं नशा नियंत्रण धार्मिक नगरी में नशे और अवैध गतिविधियों को लेकर लगातार शिकायतें, प्रभावी नियंत्रण दिखाई नहीं दिया 2
- स्वच्छता एवं नगर प्रबंधन घाटों की सफाई, कूड़ा प्रबंधन और जल निकासी व्यवस्था को लेकर जनता में व्यापक असंतोष 4
- पारदर्शिता एवं जवाबदेही विधायक ने ‘दि संडे पोस्ट’ को साक्षात्कार देने से इनकार किया जिससे जवाबदेही पर प्रश्न खड़े हुए 2
- समग्र विकास कुछ बड़ी परियोजनाओं के बावजूद शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और शहरी प्रबंधन में अपेक्षित परिवर्तन नहीं दिखा 5
कुल अंक : 3.1/10 फाइनल ग्रेड : फेल
