पुतिन के विरोधियों पर दोतरफा शिकंजा न रूस में जगह, न यूरोप में ठिकाना

यूक्रेन युद्ध के बाद रूस से भागे हजारों नागरिकों के सामने अब एक विचित्र स्थिति बन रही है। माॅस्को विदेश में रह रहे अपने आलोचकों के पासपोर्ट और नागरिक अधिकारों पर शिकंजा कस रहा है तो यूरोप सुरक्षा और आव्रजन नीतियों के नाम पर रूसी नागरिकों के लिए वीजा, शरण और कानूनी स्थिति को कठिन बना रहा है। सवाल यह है कि अगर कोई रूसी नागरिक अपने देश की युद्ध नीति का विरोध करके भागता है तो क्या उसे उसके पासपोर्ट के लिए भी संदेह की निगाह से देखा जाना चाहिए?

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के शासन में राजनीतिक असहमति के लिए जगह लगातार सिकुड़ती गई है लेकिन अब इस दमन का एक नया चरण उन रूसियों तक पहुंच रहा है जो देश छोड़ चुके हैं। माॅस्को ने ऐसे लोगों के खिलाफ कानूनी और प्रशासनिक उपायों का विस्तार किया है, जिन पर रूस से बाहर रहते हुए भी राजनीतिक मामलों में मुकदमे चलाए गए हैं। दूसरी तरफ यूरोप जो यूक्रेन युद्ध के बाद रूसी असंतुष्टों और स्वतंत्र पत्रकारों के लिए महत्वपूर्ण शरणस्थली बना था, वहां भी प्रवेश, वीजा और कुछ मामलों में शरण की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक कठिन हुई है।

यही विरोधाभास रूसी-अर्मेनियाई जलवायु कार्यकर्ता और राजनीतिक वैज्ञानिक अरशक माकिच्यान ने अपने हालिया विश्लेषण में उठाया है। उनका तर्क है कि जो रूसी नागरिक युद्ध का विरोध करते हुए देश छोड़ने को मजबूर हुए, वे अब दोनों तरफ से दबाव में हैं कि रूस उन्हें राजनीतिक रूप से दंडित कर रहा है और यूरोप में उन्हें हमेशा सुरक्षित तथा स्थायी कानूनी स्थिति मिलना सुनिश्चित नहीं है।
रूस में नागरिकता अब सिर्फ अधिकार नहीं, नियंत्रण का औजार
अगस्त 2026 में रूस ने विदेश में रह रहे ऐसे लोगों के खिलाफ नए प्रतिबंधों का रास्ता खोला है जिनके खिलाफ अनुपस्थिति में आपराधिक या प्रशासनिक सजा हुई है। 4 अगस्त को हस्ताक्षरित संघीय कानून में विदेश में रहकर सजा से बच रहे लोगों पर कई अस्थायी प्रतिबंधों का प्रावधान है। इनमें कांसुलर सेवाओं को सीमित करना भी शामिल है। इसका अर्थ यह है कि किसी व्यक्ति के खिलाफ रूस में मामला चल रहा है और वह देश से बाहर है तो उसके लिए अपने ही देश के दूतावास या वाणिज्य दूतावास से मिलने वाली कुछ महत्वपूर्ण सेवाएं बंद की जा सकती हैं।
यह बदलाव खास तौर पर उन राजनीतिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और नागरिक समाज से जुड़े लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जिन पर रूस में ‘विदेशी एजेंट’, ‘चरमपंथ’ या सेना को ‘बदनाम’ करने जैसे प्रावधानों के तहत कार्रवाई हुई है। रूस का तर्क है कि विदेश भागकर सजा से बचने वालों को कानून के दायरे में लाना जरूरी है लेकिन आलोचकों के लिए समस्या यह है कि रूस में राजनीतिक विरोध से जुड़े कई कानूनों का दायरा इतना व्यापक हो चुका है कि सरकार की आलोचना और राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ कार्रवाई के बीच की सीमा बेहद धुंधली हो गई है।
2023 के नागरिकता कानून ने भी इस दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव किया था। कानून में प्राकृतिक रूप से रूसी नागरिकता हासिल करने वाले लोगों की नागरिकता कुछ गम्भीर अपराधों, चरमपंथ और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा माने गए कृत्यों के मामलों में समाप्त करने की व्यवस्था की गई। रूसी गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 2023 से मई 2026 के बीच 4,500 से अधिक लोगों की रूसी नागरिकता समाप्त की जा चुकी है। इनमें 3,000 से अधिक मामले आपराधिक अपराधों में अदालत के फैसलों से जुड़े थे, करीब 400 मामले सैन्य पंजीकरण न कराने और लगभग 300 मामले देश की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वाली गतिविधियों से सम्बंधित बताए गए। यह आंकड़ा अपने आप में बड़ा है लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण सवाल यह है कि नागरिकता समाप्त करने की शक्ति किस तरह इस्तेमाल की जा रही है और उसका प्रभाव किस वर्ग पर पड़ रहा है।
पासपोर्ट के बिना विरोध की कीमत
माकिच्यान का अपना अनुभव इस बहस को व्यक्तिगत आयाम देता है। उन्होंने 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले के खिलाफ प्रदर्शन किया था। गिरफ्तारी के बाद वह रूस से निकल गए। उनके अनुसार, बाद में रूसी अधिकारियों ने उनके और उनके परिवार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की और उनकी नागरिकता समाप्त कर दी गई। वह जर्मनी में रहते हुए कुछ समय के लिए राज्यविहीन हो गए।
यह स्थिति किसी भी व्यक्ति के लिए बेहद जटिल हो सकती है। पासपोर्ट केवल अंतरराष्ट्रीय यात्रा का दस्तावेज नहीं है। वह व्यक्ति की पहचान, कानूनी स्थिति, यात्रा, बैंकिंग, आव्रजन प्रक्रिया और कई बार दूसरे देश में निवास की क्षमता से जुड़ा होता है। यदि किसी व्यक्ति को उसके देश की सरकार पासपोर्ट या कांसुलर सेवाओं से वंचित कर देती है तो वह दूसरे देश में भी अपनी कानूनी स्थिति मजबूत करने में कठिनाई का सामना कर सकता है। यहीं से ‘डी-फैक्टो स्टेटलेसनेस’ यानी व्यवहार में राज्यविहीन होने की समस्या सामने आती है। व्यक्ति कागज पर किसी देश का नागरिक बना रह सकता है लेकिन यदि उसे पासपोर्ट, कांसुलर सहायता और दूसरे बुनियादी नागरिक अधिकारों तक पहुंच नहीं है तो उसकी स्थिति व्यावहारिक रूप से राज्यविहीन व्यक्ति जैसी हो सकती है। यह अंतर कानूनी दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। औपचारिक रूप से नागरिकता समाप्त न होने की स्थिति में 1961 के ैजंजमसमेेदमेे ब्वदअमदजपवद के तहत मिलने वाली कुछ सुरक्षा स्वतः लागू नहीं होती। इसलिए राजनीतिक विरोधियों को केवल नागरिकता समाप्त करने के बजाय नागरिक अधिकारों और कांसुलर सेवाओं से काट देना एक अलग प्रकार का दबाव पैदा करता है।
इतिहास में भी रूसियों ने खोई थी नागरिकता
रूसी इतिहास में यह स्थिति बिल्कुल नई नहीं है। 1917 की बोल्शेविक क्रांति और उसके बाद के गृहयुद्ध के दौरान बड़ी संख्या में रूसी देश छोड़कर चले गए। सोवियत सत्ता ने विदेशों में रह रहे अनेक रूसी लोगों की
नागरिकता समाप्त कर दी। उस समय दुनिया को पहली बार बड़े पैमाने पर ऐसे शरणार्थी संकट का सामना करना पड़ा जिसमें लोगों के पास अपने देश का वैध पासपोर्ट नहीं था। इसका समाधान तत्कालीन लीग ऑफ s
नेशंस के प्रयासों से निकला। नाॅर्वे के राजनयिक और मानवतावादी फ्रिड्टजाॅफ नानसेन की पहल पर 1922 में रूसी शरणार्थियों के लिए विशेष पहचान और यात्रा दस्तावेज जारी किए गए, जिन्हें बाद में ‘नानसेन पासपोर्ट’ कहा गया। इन दस्तावेजों ने उन लोगों को यात्रा और पुनर्वास का रास्ता दिया जिनके पास अपना राष्ट्रीय पासपोर्ट नहीं था। बाद में यह व्यवस्था अन्य राज्यविहीन शरणार्थियों तक भी विस्तारित हुई। आज लगभग एक सदी बाद सवाल उल्टा दिखाई देता है। दुनिया के पास शरणार्थियों और राज्यविहीन लोगों की सुरक्षा के लिए कहीं अधिक विकसित अंतरराष्ट्रीय कानून हैं लेकिन राजनीतिक शरण चाहने वाले कई लोगों को व्यवहार में सुरक्षित और स्थायी कानूनी स्थिति हासिल करने में कठिनाई हो रही है।
यूरोप की दुविधा : सुरक्षा या सामूहिक संदेह?
यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यूरोप रूसी नागरिकों के लिए पहले जैसा खुला नहीं रहा। सितम्बर 2022 में यूरोपीय संघ ने रूस के साथ वीजा सुविधा समझौते को पूरी तरह निलंबित कर दिया। इसके बाद रूसी नागरिकों के लिए यूरोप का शॉर्ट-स्टे वीजा अधिक महंगा, कठिन और लम्बी जांच वाला हो गया। हालांकि यूरोपीय आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि पत्रकारों, असंतुष्टों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों सहित कुछ श्रेणियों के लिए रास्ते खुले रहेंगे।
नवम्बर 2025 में यूरोपीय संघ ने रूसी नागरिकों के लिए नियम और कड़े किए। सामान्य रूप से अब रूस में रहने वाले रूसी नागरिकों को मल्टीपल-एंट्री शाॅर्ट-स्टे वीजा नहीं दिया जाता और उन्हें प्रत्येक यात्रा के लिए नए वीजा का आवेदन करना पड़ता है। यूरोपीय आयोग ने इसका कारण सुरक्षा जोखिम तोड़फोड़, दुष्प्रचार और वीजा के सम्भावित दुरुपयोग को बताया। पत्रकारों और मानवाधिकार रक्षकों के लिए सीमित अपवाद मौजूद हैं।
यूरोपीय देशों के सामने समस्या वास्तविक है। रूस पर जासूसी, साइबर हमले तोड़फोड़ और राजनीतिक प्रभाव के आरोप लगातार लगते रहे हैं। जर्मनी में हाल ही में वहां की घरेलू खुफिया एजेंसी ने रूस, चीन और ईरान जैसे अधिनायकवादी देशों से निर्वासित लोगों के लिए विशेष हेल्पलाइन शुरू की है। इसका उद्देश्य उन लोगों की मदद करना है जिन्हें अपने मूल देशों की ओर से निगरानी, धमकी या अपहरण तक का खतरा हो सकता है लेकिन इसी सुरक्षा चिंता के बीच दूसरा सवाल पैदा होता है कि क्या रूसी सरकार और रूसी नागरिक के बीच फर्क करना सम्भव है?
जर्मनी और फिनलैंड में सामने आती जटिल तस्वीर
जर्मनी रूसी असंतुष्टों, पत्रकारों और युद्ध-विरोधी कार्यकर्ताओं के लिए प्रमुख यूरोपीय गंतव्यों में रहा है लेकिन वहां भी राजनीतिक शरण और मानवीय आधार पर लम्बे समय तक रहने की प्रक्रिया आसान नहीं है। हर रूसी नागरिक को केवल युद्ध का विरोध करने के कारण स्वतः शरण नहीं मिलती। उसे यह साबित करना पड़ता है कि अपने देश लौटने पर उसे व्यक्तिगत और वास्तविक खतरा है।
यही समस्या रूस के उन लोगों के सामने भी है जिन्होंने सैन्य सेवा से इनकार किया है। किसी व्यक्ति का युद्ध में भाग लेने से इनकार करना और राजनीतिक उत्पीड़न का शिकार होना दो अलग कानूनी प्रश्न बन जाते हैं, जबकि वास्तविक जीवन में दोनों कई बार एक-दूसरे से जुड़ जाते हैं।
फिनलैंड में यह बहस हाल के दिनों में और तेज हुई है। रूसी दम्पत्ति निकिता और ओल्गा बेलोव का मामला इसका उदाहरण है। वे 2022 में रूस छोड़कर फिनलैंड पहुंचे थे और रूस के युद्ध का विरोध करते थे।
फिनिश अधिकारियों ने उनकी शरण याचिका खारिज की थी लेकिन अगस्त 2026 में एक प्रशासनिक अदालत ने उस फैसले को पलटते हुए मामले की दोबारा समीक्षा का रास्ता खोला।
यह मामला दिखाता है कि यूरोप में भी कहानी पूरी तरह एकतरफा नहीं है। प्रशासनिक व्यवस्था व्यक्ति को वापस भेज सकती है लेकिन अदालतें बाद में यह मान सकती हैं कि उसके खिलाफ खतरे का आकलन पर्याप्त नहीं था। यानी यूरोप में दरवाजा पूरी तरह बंद नहीं है लेकिन उसके भीतर प्रवेश का रास्ता बेहद जटिल हो गया है।
यूक्रेन के लिए समर्थन और रूसी नागरिकों के प्रति संदेह
यूरोप की नीति में एक महत्वपूर्ण अंतर दिखाई देता है। यूक्रेन से युद्ध के कारण भागकर आए लोगों को यूरोपीय संघ ने सामूहिक अस्थायी संरक्षण दिया, जिसे मार्च 2027 तक बढ़ाया गया है। इसके तहत लाखों यूक्रेनियनों को निवास, काम और अन्य अधिकारों की सुरक्षा मिली है। रूसी नागरिकों के लिए ऐसी सामूहिक व्यवस्था कभी नहीं बनी। इसका एक स्वाभाविक कारण भी है, रूसी नागरिक युद्ध से भागने वाले शरणार्थी हैं लेकिन युद्ध स्वयं रूसी राज्य द्वारा शुरू किया गया है। यूरोपीय देशों को यह सुनिश्चित करना पड़ता है कि शरण के नाम पर कोई जासूस, युद्ध अपराध में शामिल व्यक्ति या सुरक्षा के लिए खतरा यूरोप में प्रवेश न कर जाए लेकिन इसी नीति का दूसरा पहलू यह है कि युद्ध का विरोध करने वाला रूसी नागरिक भी उसी राष्ट्रीयता के कारण संदेह के घेरे में आ सकता है।
क्या नागरिकता राजनीतिक निष्ठा का प्रमाण है?
यही इस पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण सवाल है। किसी व्यक्ति का रूसी नागरिक होना यह साबित नहीं करता कि वह पुतिन का समर्थक है। रूस में लाखों लोग युद्ध के समर्थक हो सकते हैं लेकिन लाखों लोग ऐसे भी हैं जिन्होंने युद्ध का विरोध किया, जेल झेली, नौकरी खोई, प्रदर्शन किए या देश छोड़ दिया। समस्या तब पैदा होती है जब राष्ट्रीयता को राजनीतिक निष्ठा का पर्याय बना दिया जाता है।
रूस की ओर से यह धारणा बनती है कि जो व्यक्ति सरकार का विरोध करता है वह देश के खिलाफ है। यूरोप में इसके उलट खतरा यह है कि सुरक्षा चिंताओं के कारण हर रूसी नागरिक को सम्भावित सुरक्षा जोखिम की श्रेणी में देखा जाए। दोनों स्थितियों में व्यक्ति की व्यक्तिगत राजनीतिक स्थिति पीछे छूट जाती है।
यूरोपीय संघ स्वयं कहता है कि उसकी कड़ी वीजा नीति सुरक्षा के लिए है और वह वास्तविक शरण की जरूरत रखने वाले लोगों के लिए अंतरराष्ट्रीय संरक्षण के अधिकार का सम्मान करता है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि यूरोप ने रूसी असंतुष्टों के लिए शरण का रास्ता पूरी तरह बंद कर दिया है। वास्तविक समस्या यह है कि राजनीतिक शरण और सुरक्षित कानूनी स्थिति हासिल करने की प्रक्रिया अब कहीं अधिक कठिन, धीमी और अनिश्चित हो सकती है।

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