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‘उम्मीद’ लाएगी छात्रों की आत्महत्या दर में गिरावट

आज की भाग दौड़ भरी दुनिया में हर कोई किसी न किसी रेस का हिस्सा है जहाँ सभी एक दूसरे से आगे निकलने के लिए दौड़ हैं। इस प्रतियोगिता से बच्चे भी अछूते नहीं हैं जिनके ऊपर उनके माता-पिता हर काम को बेहतर तरीके से करने व परीक्षा में अच्छे अंक लाने के लिए आदि जैसे कार्यों के लिए दबाव डालते रहते हैं। माता -पिता के अनुसार बच्चे का भविष्य उज्जवल बनाने के लिए ही वे ऐसा करते हैं लेकिन कई बार माता-पिता का यह दबाव  इतना बढ़ जाता है कि बच्चा अवसाद का शिकार हो जाता है या कोई खतरनाक कदम उठा लेता है।

 

आत्महत्या

राष्‍ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्‍यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2021 में करीब 13 हजार बच्चों ने आत्महत्या के मामले सामने आए। जिसमें से अधिकतर मामलों में बच्चे ने परीक्षा में फेल हो जाने की वजह से आत्महत्या की थी। आंकड़ों के अनुसार बीते दो वर्षों में भारत में छात्रों के सुसाइड रेट में 4.5 फीसदी इजाफा हुआ है। राजस्थान के कोटा में भी आत्महत्या करने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। जिसे देखते हुए शिक्षा मंत्रालय ने स्कूलों के लिए कुछ दिशा-निर्देश जारी किए हैं। जिसके आधार पर यह उम्मीद जताई जा रही है कि इससे बच्चों में आत्महत्या संबंधी मनोवृत्ति को रोकने में मदद मिलेगी।

 

स्कूलों में होंगे कई प्रयास

 

शिक्षा मंत्रालय ने भारत के सभी स्कूलों में एक वेलनेस टीम का गठन करने का आदेश दिया है। आत्महत्या से जुड़े सुसाइड प्रिवेंशन गाइडलाइन के जरिए हर बच्चे की जान बचाने का प्रयास किया जाएगा। इस गाइडलाइन नाम ‘उम्मीद’  (UMMEED )रखा गया है। इसका मोटो ‘एवरी चाइल्ड मैटर्स’ रखा गया है।

इस नियम के आधार पर उम्मीद (UMMEED) का एक अपना पूर्ण रूप है। इसका हर  एक अक्षर कुछ कहता है –
U – Understand (समझना)
M – Motivate (प्रोत्साहित करना)
M – Manage (संभालना)
E – Empathize  (सहानुभूति)
E – Empower  (सशक्त)
D – Develop (विकास)

जिससे यह स्पष्ट होता है कि इस नियम के तहत  ऐसे बच्चे जो किसी कारणवश आत्महत्या की और अग्रसर हो रहे हैं तो उनके साथ सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार करके और उसे समझा – बुझाकर ऐसी स्थिति से बाहर निकलना है। परिवार ,सरकार और स्कूलों आदि द्वारा किये  जा रहे ऐसे प्रयासों से छात्रों की आत्महत्या दर में कमी लाई जा सकती है।

 

 कोटा में छात्रों की बढ़ती आत्महत्याओं के लिए प्रयास

 

आईआईटी, एनईईटी और ऐसी ही कई अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए प्रसिद्ध कोटा में स्टूडेंट तैयारी करने के लिए जाते हैं। यह भी देखा  गया है लो कई बच्चे यहाँ से कोचिंग लेकर सफल भी हुए हैं। लेकिन इसी जगह का एक दूसरा पहलू यह भी है कि इन प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता न मिलने के कारण या परिवार वालों के दबाव के कारण कई बार अवसाद (डिप्रेशन)  का शिकार हो जाते हैं। जिसका परिणाम यह होता है कि अंत में वे आत्महत्या कर लेते हैं।

 

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27 अगस्त को ही दिन में महज 4 घंटे के अंतर से दो छात्रों ने खुदकुशी कर ली। आत्महत्या के ये मामले पिछले कुछ समय से लगतार बढ़ते  जा रहे हैं जिसे देखते हुए अब कोटा के हर कोचिंग संस्थान में ‘आधे दिन पढ़ाई, आधे दिन मस्ती’ कार्यक्रम जैसी एक्टीविटीज शामिल की जाएंगी। साथ ही कोचिंग संस्थान उन छात्रों की पहचान करने का प्रयास भी किया जाएगा जो कि आत्महत्या कर सकते हैं और उनकी पहचान के बाद उन्हें मनोवैज्ञानिक सलाह दी जाएंगी। इस प्रकार की छोटी छोटी शुरुआतों से शायद छात्रों के आत्महत्याओं की संख्या नियंत्रित की जा सकती हैं।