प्यासा अल्मोड़ा

  • भारती पाण्डेय

जिस अल्मोड़ा जिले ने देश को राजनीति, ज्ञान- विज्ञान, साहित्य-संस्कृति जैसे तमाम क्षेत्रों की एक से बढ़कर एक प्रतिभाएं दी, वहां के लोग आजादी के वर्षों बाद भी पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं। उत्तराखण्ड गठन के बाद भी राज्य की सांस्कृतिक राजधानी अल्मोड़ा नगरी में पेयजल आपूर्ति का हाल यह है कि पहले तो महीनों तक पानी आता नहीं और कभी आ भी जाए तो बहुत ही दूषित। ग्रामीणों का तो बहुत ही बुरा हाल है

  • । मार्च महीने से पेयजल आपूर्ति बाधित है, लेकिन लोगों को हजारों रुपए के बिल थमा दिए गए

। गंदे नालों के साथ बिछाई गई हैं पाइप लाइनें। इन्हीं नालों में बहता है सीवर का पानी।

  • । अपने पैसों से पाइप लाइनों की मरम्मत करवाने को विवश हो जाते हैं लोग।
  • । ‘हर घर नल, हर घर जल’ योजना के तहत सरकारी नल अवश्य लगे हैं, लेकिन ये नल भी पानी का इंतजार करते-करते सड़ रहे हैं

उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक राजधानी कहीं जाने वाली अल्मोड़ा नगरी पेयजल के बढ़ते संकट से जूझ रही है। दोषपूर्ण सरकारी व्यवस्थाओं के कारण जनता की प्राथमिक आवश्यकता की पूर्ति नहीं हो पा रही है। पहाड़ पहले पारंपरिक पेयजल स्रोत होने के कारण इतने आत्मनिर्भर थे कि हमारे पूर्वजों ने शायद ही कभी पेयजल संकट का सामना किया हो, परंतु विकास के नाम पर पहाड़ों की नदियों के प्राकृतिक मार्गों को अवरुद्ध कर सरकारों ने प्रकृति के विरुद्ध जाकर पहाड़ों में छोटे-बड़े बांध बना डाले जिसका दुष्परिणाम आज तक आम जनता आपदाओं का ग्रास बनकर भोग रही है।पहाड़ों में ‘जल-जीवन योजना: हर घर नल, हर घर जल’ के तहत पेयजल के लिए लगाया हुआ सरकारी नल तो हमें हर शहर या गांव में देखने को मिल जाता है, परंतु उस सरकारी नल में पेयजल के दर्शन न के बराबर ही हो पाते हैं। कुछ ऐसा ही हाल अल्मोड़ा जिले एवं नगर का भी है।

अल्मोड़ा नगर जहां ‘मोसी’ नदी बहती है और सरकारी पानी इसी नदी से आता है वहां कई मोहल्ले पानी की किल्लत का सामना कर रहे हैं। वर्षा ऋतु में कोसी नदी का पानी आमतौर पर पीने योग्य नहीं रह पाता, परंतु इसके अलावा कोई विकल्प नहीं है। वर्षा ऋतु में ये सरकारी नल पानी के बहाव में क्षतिग्रस्त हो जाते हैं जिन्हें ठीक करने में काफी समय लग जाता है। ऐसे में लोगों के पास कोई चारा नहीं सिवाय इंतजार करने के। पहाड़ों में लगातार बढ़ रहे तापमान के कारण नदियां स्वयं संकट में है जिसका प्रभाव ग्रीष्म ऋतु में सर्वाधिक दिखाई देता है जब पानी मिल पाना मुश्किल होता जा रहा है। अल्मोड़ा जिले के कई क्षेत्र और अल्मोड़ा नगर के कई
मोहल्ले सरकार की दोषपूर्ण व्यवहार, कमीशनखोरी और पेयजल वितरण की अनुचित व्यवस्था के कारण पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। अल्मोड़ा नगर के अंदर पेयजल की पाइप लाइन गंदे नालों के अंदर बिछाई गई है।

इन नालों में कचरा भरा है और सीवर का पानी भी इन्हीं नालों में बहता है। गंदे नालों में बिछाए गए पाइप लाइनों को लेकर सवाल करने पर जल संस्थान विभाग के कर्मचारियों ने नगर में बने वार्डों की जनता को दोष देते हुए अपना पल्ला झाड़ लिया। जल संस्थान विभाग के जेई मेहरा जी ने कहा कि मोहल्लों में पाइप लाइन बिछाते समय लोग अपने घरों में पाइप लाइन बिछाने का विरोध करते हैं जिस कारण उनके पास कोई और मार्ग नहीं बचता इसी वजह से नालों में पाइप लाइन बिछाने पर विभाग मजबूर होता है। अल्मोड़ा नगर के तल्ला दन्या (निकट सरस्वती होटल), नियाजगंज, ओरखोला मोहल्ले में इन दिनों पानी की गंभीर समस्या है। तल्ला दन्या निवासी श्रीमती सरिता मेहरा बताती हैं कि उनके मोहल्ले में मार्च के महीने से पेयजल का संकट बना है। जिस पर अभी तक कुछ भी सुधार नहीं हुआ।

उन्होंने कहा कि पेयजल पाइप लाइन जो नगर पालिका के नालों के अंदर बिछाई गई है उसमें पानी न के बराबर आ रहा है। विभागीय लाइनमैन को समस्या बताने के बावजूद कोई सरकारी प्लम्बर नालों के अंदर जाकर पाइप लाइन की समस्या की जांच नहीं करता है। उन्होंने बताया कि पेयजल संकट से परेशान होकर जब सरकारी लाइनमैन से पाइप लाइन की जांच करने को कहा गया तो उसने साफ शब्दों में इनकार कर दिया। जिसके बाद उन्होंने मजबूरन स्वयं 2000 रुपए देरक एक प्लम्बर को नाले में भेजकर पाइप लान चेक करवाई, हालांकि पाइप लाइन में कोई समस्या नहीं थी, लेकिन मोहल्ले में कुछ लोग ऐसे हैं जिन्होंने एक परिवार में तीन-चार कनेक्शन लिए हैं परंतु बिल सिर्फ एक ही कनेक्शन का आता है। बाकी के कनेक्शन अवैध हैं। उन्होंने कहा कि कई बार जंक लगने से या बरसात में पाइप लाइन क्षतिग्रस्त हो जाती है तो सीवर का गंदा पानी घर के नलों में आता है जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।

उन्होंने यह भी बताया कि मार्च के महीेन से पानी की किल्लत है और उसके बावजूद मात्र तीन महीने का बिल 3000 रुपए से अधिक है। अल्मोड़ा नगर के नियाजगंज क निवासी श्रीमती हीरा देवी बताती हैं कि उनके मोहल्ले में भी पेयजल संकट है। उन्होंने कहा कि मोहल्ले में कुछ लोगों ने अवैध कनेक्शन लिए हैं और साथ ही संपन्न लोगों ने मोटर रखी हैं जिस कारण उन लोगों को तो आवश्यकता से अधिक पानी मिलता है, लेकिन अधिकतर लोगों को समस्याएं झेलनी पड़ती हैं। उन्होंने कहा कि लगभग ढाई साल पहले भी पानी की समस्या थी लेकिन तब इससे निपटने के लिए नई पाइप लाइन बिछाकर मोहल्ले में नए कनेक्शन की व्यवस्था विभाग ने की थी जिसके बाद कुछ समय तक परेशानी नहीं हुई परंतु उसके कुछ माह बाद ही पानी की किल्लत बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि अव्वल तो पानी नहीं आता और जब आए तो उसका कोई समय निर्धारित नहीं है और वो अधिकतर दूषित रहता है प रंतु इसके बावजूद बिल बहुत अधिक आ रहा है।


उन्होंने बताया कि पानी अव्यवस्थाएं दूर करने के बाबत उत्तराखण्ड परिवर्तन पार्टी की महिला शाखा ने जल संस्थान विभाग और जिलाधिकारी अल्मोड़ा को नोटिस दिया है और यदि उचित व्यवस्थाएं नहीं की गई तो इसके खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष करेंगे। जल संस्थान विभाग का कहना है कि शीघ्र ही अवैध कनेक्शन का पता लगाकर इसे खत्म किया जाएगा और पेयजल आपूर्ति को बेहतर करने की कोशिश की जाएगी। अब यदि नगर के बाहर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों पर दृष्टि डालें तो वहां भी हम यही पाएंगे कि जल स्रोतों से संपन्न माने जाने वाले पहाड़ किस हद तक पानी की ल्लित से जूझ रहे हैं। अल्मोड़ा नगर के निकट ही मटेना गांव में पेयजल संकट काफी लंबे समय से व्याप्त है। मटेना गांव की निवासी नेहा बताती हैं कि गांव के दो हिस्से हैं जिनमें से एक हिस्से में बिनसर से पानी आता है और दूसरे हिस्से में कोसी नदी से। कोसी नदी से पानी आने वाले हिस्से में जल संकट है। उन्होंने कहा कि गांव के कुछ लोग पाइप लाइनों से छेड़छाड़ करते हैं जिसके खिलाफ अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है। अल्मोड़ज्ञ जिले के सल्ट क्षेत्र में पेयजल संकट गहराता रहा है। गांवों मं पानी आवश्यकतानुसार बहुत कम आता है और वर्षा ऋतु में पाइप लाइन लंबे समय तक ध्वस्त रहती है।

गांव के बच्चों और महिलाओं को पानी के लिए घर से दूर जाना पड़ता है। अल्मोड़ा के चौखुटिया क्षेत्र में करोड़ों रुपए खर्च करके सिंचाई व्यवस्था के लिए नहर बनवाई गई थी लेकिन अभी जनता को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है जिस कारण लोगों की खेती पर संकट बन रहा है। इस समस्या से जूझ रहे लोगों ने इसके खिलाफ कुछ ही दिन पूर्व प्रदर्शन किया था और सिंचाई विभाग से उचित व्यवस्था करने की मांग की। अल्मोड़ा जिले के भैसियाछाना क्षेत्र में बाड़ेछीना के निकट ग्रामसभा गिरचौला के निवासियों ने बताया कि लगभग 5-6 महीने पहले पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा किए गए सड़क निर्माण कार्य में सरकारी नलों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया जिस कारण पेयजल आपूर्ति नहीं हो पा रही है। ग्रामीणों ने कहा कि वे इस समस्या से निपटने के लिए जल संस्थान विभाग से आग्रह कर चुके हैं परंतु विभाग ने पहले तो इसे पीडब्ल्यूडी की जिम्मेदारी बताया, लेकिन ग्रामीणों के बार-बार आग्रह करने पर विभाग ने जल-जीवन योजना के तहत पाइप लाइन दुरुस्त करने का आश्वासन दिया।

अब इस काम में कितना समय लगेगा यह कोई नहीं जानता। विभाग ने अस्थाई समाधान के तौर पर ग्रामीणों से ही प्लास्टिक के पाइप लेकर घरों में पानी पहुंचा तो दिया परंतु कोई स्थाई हल अभी तक नहीं दिया। अल्मोड़ा जिले की ही ग्रामसभा पल्यूं में भी पेयजल संकट काफी समय तक बना रहा और इस समस्या के कारण अब अधिकतर लोग सरकारी पेयजल का कनेक्शन कटवा चुके हैं। अल्मोड़ा के अतिरक्ति बागेश्वर, पिथौरागढ़ हों या अन्य कोई भी जिला सभी पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। पिथौरागढ़ में सामाजिक कार्यकर्ता किशोर कुमार अपने अनुभव साझा करते हुए बताते हैं कि अधिकतर गांवों में पानी की समुचित व्यवस्था नहीं है जिस कारण ग्रामीण लोग या तो अशुद्ध और दूषित जल पीने पर मजबूर हैं या फिर दूर चलकर किसी स्रोत से लाइन में खड़े होकर पेयजल की व्यवस्था करने पर मजबूर हैं। सवाल उठ रहे हैं कि क्या उत्तराखण्ड जैसे पहाड़ी राज्य में पानी के संकट से निपटने की कोई व्यवसथा सरकार कर पाएगी या लोग इसी तरह जूझते रहेंगे?