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फिर उड़ी सोशल डिस्टेंस की धज्जियां, लॉकडाउन तोड़कर सड़कों पर निकले लोग

रात 9 बजे 9 मिनट। कल शाम देश के प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी ने यह ट्वीट करके लोगों को याद दिलाया था कि उन्हें आज रात इस समय कोरोना को हराने के लिए प्रकाश फैलाने का संकल्प लेना है। वैसे तो पूरी दुनिया में कोरोना वायरस के खिलाफ जंग जारी है। लेकिन भारत के हालात थोडे इतर है। यहा इस महामारी को भगाने के लिए नये-नये प्रयोग किए जाते हैं।

ऐसे समय में जब दुनिया के कोरोना से पीड़ित देश अपने यहां मास्क बंटवाते हैं और सेनेटाइजर करवाते हैं तब भारत में कभी ताली-थाली बजाई जाती है। तो कभी बिजली बंद करके दिए और मोमबत्तिया जलवाई जाती है। देश का अधिकतर वर्ग इस सबको करते समय गो-कोरोना-गो कहना नहीं भूलता है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर अब तक दो एपिसोड में ‘गो-कोरोना-गो’ का प्रसारण दिखाया जा चुका है।

तीन दिन पूर्व देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कोरोना (कोविड-19) के संकट के अंधकार को चुनौती देने की बात कहते हुए लोगों से अपील की थी कि 5 अप्रैल रात 9 बजे घर की सभी लाइटें बंद कर घर के दरवाजे या बालकनी में खड़े होकर 9 मिनट के लिए मोमबत्ती, दीया, टॉर्च या मोबाइल की फ्लैशलाइट जलाएं। 130 करोड़ देशवासी प्रकाश की ताकत का परिचय देंगे। लेकिन देश की जनता अपनी ताकत का परिचय अकेले दिए मोमबत्ती या टार्च चलाकर या मोबाइल की लाइट जलाकर ही नहीं देना जानती है। बल्कि वह सड़कों पर निकले बिना अपनी ताकत का अहसास नहीं करा सकती। कल रात 9 बजे देश की अधिकतर जनता ने ऐसा बचकाना कार्य किया। लोगों ने लॉकडाउन के नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई।

इस दौरान सड़कों पर आई भीड़ ने मोदी जी के खास संदेश सोशल डिस्टेंस को भी अनदेखा कर दिया। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बार-बार कह चुके हैं कि कोरोना को भगाने के लिए जनता को सोशल डिस्टेंस का ध्यान रखना जरूरी है। लेकिन उनके इस संदेश की कल रात 9 बजे जमकर धज्जियां उड़ाई गई। यही नहीं बल्कि लोगों ने खूब आतिशबाजी की और मसालें तक जलाई गई ।

कुछ जगह देखने को मिला कि लोग हाथों में जलती मसालें लेकर सड़कों पर निकल आए और भारत माता की जय, वंदे मातरम और जय श्री राम के नारे लगाते हुए गली-गली विचरण करने लगे। रात 9 बजे से लेकर करीब 9:30 बजे तक देश की जनता का सड़कों पर इस तरह आ जाना कोरोना महामारी से लड़ने के लिए सोशल डिस्टेंस के फार्मूले को खंड-खंड कर देना समझ से परे हैं। कल रात 9 बजे यह भी देखने को मिला कि जो पुलिस दो-चार लोगों को एक साथ खड़े होने पर उन पर डंडे बरसा देती है, यही नहीं बल्कि कई शहरों में तो ऐसा करने पर लोगों पर मामले भी दर्ज हो चुके हैं। इसके बावजूद भी पुलिस का कहीं अता पता नहीं था। अगर कहीं पुलिस थी तो वह मूकदर्शक की भूमिका में थी ।

हमारे देश में बीमारी को भी उत्सव के रूप में मनाया जा सकता है। अब से पहले यह किसी ने सोचा भी नहीं होगा। पहले जिस तरह देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने थाली और ताली बजवाई और कहा गया कि ऐसा डॉक्टरों और पुलिस के सम्मान में किया गया। मतलब यह है कि जो डॉक्टर और पुलिसकर्मी अपने परिवार से दूर रहकर दिन-रात जनता की सेवा में जुटे हुए हैं उनके लिए ताली और थाली बजवाई गई । लेकिन चिंता की बात यह रही कि जिन लोगों के सम्मान में ताली और थाली बजवाई गई उन पर बाद में उसी जनता द्वारा हमले कर दिए गए। मुजफ्फरनगर और मधुबनी के साथ ही बरेली में पुलिस पर लोगों ने हमला किए। यहां तक कि कुछ डॉक्टर्स और नर्स के साथ अभद्र व्यवहार तक किया गया।