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भोपाल में दूध और दवा दुकानों को छोड़ अगले आदेश तक सब कुछ बंद, धारा 144 लागू

मध्य प्रदेश में कोरोना वायरस से मरीजों की संख्या 190 पहुंच गई है। अब तक 11 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं 36 लोग स्वस्थ भी हुए हैं। सतर्कता अपनाते हुए मध्यप्रदेश की सरकार ने भोपाल में धारा 144 लागू कर दी है। 5 अप्रैल रविवार रात 12 बजे से लागू किया गया। इस आदेश में स्पष्ट किया गया है कि अब भोपाल पूरी तरह से लॉकडाउन रहेगा।

करोद मंडी भी 5 अप्रैल से आगामी आदेश तक बंद रहेगी। व्यापारी किसानों से सब्जी खरीदेंगे। फिर नगर निगम के माध्यम से बिक्री करेंगे। किराना दुकान और अन्य दुकानों को भी पूरी तरह से बंद करवा दिया गया है। आदेश में कहा गया है कि अधिकृत होम डिलीवरी के अतिरिक्त अन्य सभी दुकानें बंद रहेंगी। हालांकि, दवाई की दुकानें खुली रहेंगी। मतलब की मेडिकल की दुकान, होम डिलीवरी, दूध पार्लर मात्र इस दौरान खुली होगी।

शासकीय कार्य के लिए अतिआवश्यक सेवा में लगे सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के वाहनों को चलाने की छूट रहेगी। बाकी कोई भी वाहन नहीं चलेगी। यानी निजी वाहन पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिए गए हैं। साथ ही किसी भी क्षेत्र में आवाजाही पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगी। इस लॉकडाउन में मीडिया और उनके प्रतिनिधियों को छूट दी गई है। वो आ-जा सकते हैं।

लेकिन आम जनता कंटेंटमेंट क्षेत्र से बाहर आना-जाना करते हुए पाए जाने पर आदेश का उल्लंघन माना जाएगा और सम्बंधित की गिरफ्तारी की जाएगी। सड़क पर कोई भी व्यक्ति को घूमते हुए पाए जाने पर गिरफ्तार कर उनपर कानूनी कर्रवाई की जाएगी। इसमें आपातकालीन सेवाओं के अतिरिक्त अन्य सभी कारणों के लिए दिए गए पास भी निलंबित कर दिए गए हैं। इसका उल्लंघन पर व्यक्ति पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

शनिवार को मध्यप्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा, “मैं एक बार फिर दोहरा रहा हूं कि कोई भी समारोह, बड़ा या छोटा, आयोजित नहीं होना चाहिए। यदि कोई इस तरह के कार्यों का आयोजन करता है या चिकित्सा प्रक्रिया में बाधा डालता है तो उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी और उन्हें जेल भेजा जाएगा।”

उन्होंने आगे कहा था कि लोगों को अगर कोरोना संक्रमित होने का शक है या फिर कोई उनकी जानकारी भी संक्रमित है तो उसकी जानकारी का खुलासा करने के लिए खुद से आगे आना चाहिए। लेकिन वे हिचकिचा रहे हैं, इसलिए कोरोना वायरस फैलता जा रहा है।

उन्होंने कहा था कि लोगों की तरफ से सहयोग की कमी थी। आप इंदौर में कुछ विशिष्ट क्षेत्रों में इस मुद्दे को देखेंगे। लोग यह जांच के लिए भी समस्याएं पैदा कर रहे हैं ताकि स्वास्थ्य कर्मचारी वहां न पहुंच सकें। जबकि उनका काम जान बचाना है इसलिए स्वास्थ्य कर्मचारी उन इलाकों में हमला होने के बाद भी जांच के लिए वापस चले गए।

उन्होंने लोगों से अपील की थी कि वे अपनी जान से खिलवाड़ न करें। बता दें कि मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) लागू किया गया है। लॉकडाउन को लेकर ड्रोन का उपयोग करके लोगों पर निगरानी रखी जाएगी।