पीके पर सस्पेंस

लगता है कि जनता दल (यू) के उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर पार्टी भीतर जम नहीं पा रहे हैं। यकायक ही नीतीश कुमार की पार्टी में नंबर दो की हैसियत पा गए पीके को पार्टी के कद्दावर नेता पचा नहीं पा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो जद (यू) के राज्यसभा सदस्य आरसीपी सिंह भी एंटी पीके गुट में शिमल हैं। आरसीपी सिंह नीतीश कुमार के पुराने भरोसेमंद साथी हैं। उत्तर प्रदेश के पूर्व आईएएस अफसर सिंह नीतीश कुमार के रेल मंत्री रहते उनके निजी सचिव थे। बाद में वे बतौर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रमुख सचिव भी बने। समय पूर्व ही आईएएस से इस्तीफा देने के बाद वे राजनीति के मैदान में कूद गए। नीतीश कुमार के आंख और कान कहलाए जाने वाले आरपीसी की पीके से दूरी के साथ-साथ पिछले दिनों भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के साथ सीटों के बंटवारे के लिए हुई महत्वपूर्ण बैठक में पीके का नीतीश के साथ ना होना भी पार्टी में उनके महत्व को लेकर चर्चा का विषय बन चुका है। भाजपा की तरफ से अमित शाह के संग भूपिंदर यादव, राम विलास पासवान के साथ उनके बेटे चिराग इस मीटिंग में शामिल हुए। लेकिन नीतीश कुमार अकेले ही इस खास बैठक का हिस्सा बने।

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