शेख हसीना की जीत भारत के लिए सुखद

बांग्लादेश में शेख हसीना की जीत भारत के लिए सुखद है। हिंसक झड़पों और आरोपी-प्रत्यारोपों के बीच हुए चुनाव में शेख हसीना की एकतरफा जीत हुई है। उनकी पार्टी  ‘आवामी लीग’ ने 300 सीटों में से 260 सीटों पर दर्ज की है। ‘आवामी लीग’ की सहयोगी जातियां पार्टी को 22 सीटें मिली है।
निर्णय आने से पहले मतदान के दौरान देश के कई हिस्सों में हिंसा में हिंसा हुई जिसमें 17 लोग मारे गए। शेख हसीना ने लगातार तीसरी बार जीत दर्ज की है। विपक्षी पार्टी नेशनल यूनिटी फ्रंट को सिर्फ सात सीटों पर सिमट जाना पड़ा।
बांग्लादेश के चुनाव में इस दफा पहली बार ईवीएम का इस्तेमाल हुआ। चुनावों के पहले हमेशा की तरह माना जा रहा था कि दो बेगमों शेख हसीना-खालिदा जिया के बीच जबरदस्त दंगल लेकिन ऐसा हुआ नहीं। यह सच है कि शेख हसीना हमेशा से ही भारत की समर्थक रही है। इसका विपरीत बांग्लादेश में कई छोटे दल और कट्टरपंथी तत्व भारत विरोध का परचम लहराते रहे है। ऐसी भारत विरोधी शक्तियों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष ढंग से खालिदा जिया को समर्थन मिलता रहा है। भारत विरोध इस बार के चुनाव में भी मुद्दे के तौर पर उछला। मगर जनता ने इसे नाकार दिया। शेख हसीना की जीत का मतलब बांग्लादेश में उदारपंथ के लिए जगह बनने जैसा है।
यह भी अच्छा है कि बांग्लादेश अब खालिदा के प्रभाव से मुक्त हुआ है। खालिदा जिया भ्रष्टाचार के मामले में दोषी ठहराया जाने के बाद जेल में सजा काट रही है। अब शेख हसीना चैथी बार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री बनेगी।

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