गवर्नर के चेलों बीच बढ़ती रार

उत्तराखण्ड भाजपा में इन दिनों एक गुरु ही के चेलों के बीच दिनों दिन रार-तकरार के बढ़ने का दौर चल रहा है। गुरु हैं भाजपा के वरिष्ठ नेता, पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, राज्य के पूर्व सीएम और वर्तमान में महाराष्ट्र के गवर्नर भगत सिंह कोश्यारी। चेले हैं राज्य भर में फैले वे नेता जो आगामी विधानसभा चुनावों में टिकट पाने की चाह रखते हैं। कोश्यारी का प्रदेश में खासा जनाधार रहा है। भाजपा के वे अकेले ऐसे नेता हैं जिनकी पकड़ प्रदेश के तीनों इलाकों कुमाऊं, गढ़वाल और तराई में समान रूप से है। वर्तमान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी कोश्यारी के चलते ही कई दिग्गजों को पछाड़ सीएम की कुर्सी पर बैठ पाए हैं। इन दिनों लेकिन कोश्यारी के चेलों मध्य जबरदस्त कंपटीशन चल रहा है। सभी चेले आश्वस्त हैं कि उन्हें ही ‘गुरु कृपा’ के चलते पार्टी का टिकट मिलना तय है। दूसरी तरफ गुरु परेशान हैं कि कैसे चेलों को एडजस्ट करें और जिन्हें टिकट नहीं दिला पाए उन्हें बागी बनने से रोकें। उदाहरण के लिए कुमाऊं क्षेत्र की हल्द्वानी सीट है जहां से भगतदा के कई चेले दावेदारी कर रहे हैं। कांग्रेस की दिग्गज नेता स्व ़ इंदिरा हृदयेश की परंपरागत इस सीट से दावेदारी करने वाले भाजपा नेताओं में शहर के मेयर जोगेन्द्र रौतेला, शंकर कोरंगा, प्रकाश हर्बोला इत्यादि शामिल हैं। कोरंगा का ग्राफ इन सबमें से ज्यादा तेजी से बढ़ रहा है। रौतेला शहर के मेयर जरूर हैं लेकिन उनकी कार्यशैली से जनता नाराज बताई जा रही है। जानकारों की मानें तो कोरंगा की काट के लिए रौतेला अल्मोड़ा सांसद अजय टम्टा के भरोसे चल रहे हैं। रानीखेत विधानसभा में तो टिकट के सभी दावेदार खुद को गवर्नर की पसंद बताने में जुटे हैं। इनमें धन सिंह रावत, गोपाल उप्रेती, कैलाश पंत और महेंद्र अधिकारी शामिल हैं। हालांकि पार्टी और संघ के आंतरिक सर्वे में पूर्व ब्लॉक प्रमुख धन सिंह नंबर वन पर बताए जा रहे हैं किंतु कोश्यारी की बैकिंग ही इस सीट पर भाजपा का कैंडिडेट तय करेगी। ऐसे में गवर्नर कोश्यारी अपने चेलों की बढ़ती महत्वाकांक्षा के चलते इन दिनों खासे टेंशन में चल रहे हैं।