नीतीश से दूर जाते आरसीपी

नीतीश कुमार जब अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में रेल मंत्री बने तब उन्होंने नालंदा के मूल निवासी रामचंद्र प्रसाद सिंह को अपना निजी सचिव चुना था। उत्तर प्रदेश कैडर के आईएएस अफसर आरसीपी सिंह ने इसके बाद कभी भी नीतीश का साथ नहीं छोड़ा। जब नीतीश कुमार 2005 में बिहार के मुख्यमंत्री बने तो प्रतिनियुक्ति पर आरसीपी सिंह को अपने साथ पटना ले आए और अपना सचिव बना डाला। 2010 में सिंह आईएएस से इस्तीफा दे जनता दल (यू) में शामिल हो गए। इसी वर्ष उन्हें जद (यू) की तरफ से राज्यसभा भेज दिया गया। इसके बाद उनका राजनीतिक कद जद (यू) भीतर बढ़ता गया। दिसंबर 2020 में वे पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिए गए। यह उनकी नीतीश कुमार संग वफादारी का ईनाम बताया जाता है। अब लेकिन पटना के सत्ता गलियारों में बड़ी चर्चा है कि दोनों नेताओं के मध्य रिश्ते पहले समान मधुर नहीं रह गए हैं। कहा तो यह भी जा रहा है कि आरसीपी सिंह का भाजपा संग तेजी से बढ़ रहा प्रेम नीतीश कुमार को खटकने लगा है। वर्तमान में जद (यू) कोटे से मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री आरसीपी सिंह का राज्यसभा टर्म समाप्ति की ओर है। दूसरी तरफ नीतीश कुमार और भाजपा के मध्य संबंध कटु हो चले हैं। ऐसे में कयासबाजियों का दौर चल रहा है कि नीतीश कुमार अपने हनुमान को तीसरी बार राज्यसभा भेजने के खास इच्छुक नहीं हैं। यदि ऐसा हुआ तो आरसीपी सिंह का मंत्री पद छीन जाएगा। चर्चा यह भी जोरों पर है कि सिंह को राज्यसभा न भेज नीतीश भाजपा नेतृत्व को यह संकेत भी देना चाहते हैं कि अब उनकी इच्छा एनडीए से बाहर निकल अपनी राजनीति करने की है।