कर्नाटक में स्पीकर केआर रमेश पर टिकी निगाहें

कर्नाटक में चल रहे राजनीतिक ड्रामे में अब अहम भूमिका राज्य विधानसभा के सभापति केआर रमेश की हो चली है। 6 बार के विधायक केआर ़ रमेश को कर्नाटक की राजनीति में एक सुलझा हुआ राजनेता माना जाता है। कई कन्नड़ फिल्मों में अभिनय कर चुके रमेश पर इस समय न केवल भाजपा, कांग्रेस और जद(से) की निगाहें हैं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट भी उन पर निगाहें रखे हुए है।

कर्नाटक के सियासी ड्रामें में हरके पल नया मोड़ आ रहा है। शनिवार का दिन सत्तारूढ़ गठबंधन के नाम रहा जब पूर्व सीएम सिद्दारमैया अपने एक बागी साथी एम नागेश को मना पाने में सफल नजर आए। नागेश ने कांगे्रस में ही रहने की बात कह भाजपा खेमे में मायूसी फैलाने का काम किया, लेकिन अगले ही दिन नागेश मुंबई पहुंच बागियों की टोली में शामिल हो गए। कांग्रेस का राज्य नेतृत्व अब हताश नजर आने लगा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आर रामलिंगम रेड्डी ने संकेत दिए हैं कि उनकी कांग्रेस विधायक पुत्री सौम्या और एक अन्य विधायक अंजली निंबालकर भी पार्टी छोड़ सकते हैं। पार्टी के राज्य प्रभारी और राष्ट्रीय महासचिव केजी वेवेपुगोपाल समेत सभी सीनियर कांग्रेसी इस बीच रेड्डी को मनाने मंे जुटे हैं, लेकिन रेड्डी झुकने को तैयार नहीं बताए जा रहे हैं।

नागेश की वापसी से उत्साहित भाजपा ने अब मुख्यमंत्री कुमारस्वामी को सदन में आज बहुमत सिद्द करने को कहा है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश चलते यदि कुमारस्वामी विश्वातमत हासिल करना चाहें भी तो मंगवार तक ऐसा संभव नहीं। कोर्ट ने राज्य विधानसभा के स्पीकर को मंगलवार तक बागी विधायकों के इस्तीफे के बारे में कोई भी निर्णय न देने का आदेश दिया है।

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