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जानें क्‍या है इस्तांबुल कन्वेंशन जिससे बाहर हुआ तुर्की और क्यों है ये महिलाओं से सम्बंधित

तुर्की महिलाओं की सुरक्षा पर एक अंतरराष्ट्रीय संधि से हट गया है जिस पर अपनी राजधानी इस्तांबुल में हस्ताक्षर किए गए थे। हजारों महिलाओं, महिला अधिकार समूहों, एलजीबीटीक्यू समूहों के लोगों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है।
एमनेस्‍टी इंटरनेशनल का कहना है कि तुर्की का इस तरह इस्‍तांबुल कंवेंशन से पीछे हटना एक बार देश में महिलाओं के खिलाफ होने वाली घेरलू हिंसा में बढोत्तरी कर सकता है। दरअसल इससे पहले मार्च में ही राष्ट्रपति एर्दोगन ने एक सम्मेलन में अपने देश की भागीदारी को अचानक समाप्त कर दिया, जिसका महिला अधिकार समूहों और पश्चिमी देशों ने जमकर विरोध किया। एक अदालत ने भी सरकार से अपना फैसला वापस लेने की अपील की थी लेकिन हाल ही में उस अपील को खारिज कर दिया गया था। अपने एक बयान में उन्‍होंने कहा था कि इससे बाहर होने के बाद भी अपराध को रोकने में किसी भी तरह की कोई लापरवाही नहीं की जाएगी।
तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन ने कहा है कि यह महिलाओं के अधिकारों से समझौता नहीं करता है। जिस तरह महिलाओं के अधिकारों के लिए उनकी लड़ाई कन्वेंशन के शुरू होने के साथ शुरू नहीं होती है, वैसे ही यह कन्वेंशन के अंत के साथ समाप्त नहीं होगी।
वर्ष 2011 में इंस्तांबुल कंवेशन के नाम से जानी जाने वाली ये संधि लागू हुई थी। इसका उद्देश्य तुर्की समेत अन्‍य देशों में महिलाओं के खिलाफ होने वाली घरेलू हिंसा को रोकना और समाज को लैंगिक बराबरी को बढ़ावा देना है।  38 देशों ने इस संधि पर हस्ताक्षर किए थे। तुर्की के नागरिकों खासतौर से महिलाओं द्वारा इस फैसले की कड़ी निंदा की गई है। तुर्की के इस फैसले की अमेरिका और यूरोपीय संघ ने भी खूब आलोचना की है।

रॉयटर्स के मुताबिक, आने वाले दिनों में सरकार के इस कदम के विरोध में धरना हो सकता है। तुर्की महिला संघों के संघ के अध्यक्ष कानन गुलु ने सरकार के इस कदम की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि ऐसा करने से तुर्की के अपने ही पैर में कुल्हाड़ी मारी है। उन्होंने कहा कि महिलाओं का संघर्ष जारी रहेगा। उनके अनुसार, वैश्विक महामारी के दौरान तुर्की में महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मामलों में वृद्धि हुई है। एमनेस्टी इंटरनेशनल के महासचिव एग्नेस कैलामार्ड ने कहा कि इस फैसले ने तुर्की को दस साल पीछे कर दिया।

सरकार के इस फैसले का एक तरफ जहां महिलाएं जमकर विरोध कर रही हैं वहीं दूसरी तरफ रूढ़िवादियों का मानना है कि उनके परिवार के ताने-बाने को ये संधि कमजोर करती थी। समाचार एजेंसी के अनुसार, तुर्की  के इस संधि से बाहर होने के बाद अब महिलाओं के खिलाफ हिंसा करने वालों का सजा से बचना आसान हो जाएगा।

इस संधि का समर्थन करने वालों लोगों का कहना है कि तुर्की में इस संधि को जिस तरह से लागू करना चाहिए था उस तरह से लागू नहीं किया गया था। कुछ लोगों का मानना है कि ये संधि समलैंगिकता को बढ़ावा देती है।

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