मनोहर लाल खट्टर के ड्रीम प्रोजेक्ट में हुई गड़बड़ियों को लेकर खेमका ने लिखा प्रमुख सचिव को पत्र

हरियाणा के एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के एक ड्रीम प्रोजेक्ट परिवार पहचान पत्र के तहत लाभार्थियों के लिए राज्य सरकार द्वारा संकलित आंकड़ों में गडबडियों को उठाया है। इसके अलावा एक अन्य वरिष्ठ आईएएस अधिकारी ने दावों का विरोध करते हुए कहा कि आंकड़ों तक पहुंचने के लिए अपनाई गई विधि पूरी तरह से गलत है। 1991 के बैच के आईएएस अधिकारी अशोक खेमका ने वी उमाशंकर, प्रमुख सचिव (नागरिक संसाधन सूचना विभाग) को एक पत्र में लिखकर इन गडबड़ियों के बारे में अवगत करवाया है।

खेमका ने अपने पत्र में लिखा कि परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) के डेटा में कुछ गड़बड़ियां ध्यान में आई है जिन्हें उचित कार्रवाई के लिए नोटिस में लाया जाना चाहिए। जैसा कि बताया गया है, पीपीपी डेटाबेस में 2.5 करोड़ नंबरों के साथ 68 लाख घर हैं। इसका तात्पर्य है कि पीपीपी के अनुसार, प्रति घर में 3.68 सदस्य हैं। जबकि, 2021 के अनुमानित जनगणना आंकड़ों के अनुसार, 67.60 लाख परिवारों के साथ राज्य की जनसंख्या 2.95 करोड़ है। मतलब प्रति घर में 4.36 सदस्य हैं। पीपीपी और अनुमानित जनगणना आंकड़ों में समान घरों के साथ, लापता 45 लाख को समेटना होगा।

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पत्र में उन्होंने आगे कहा कि आज तक पीपीपी के आंकड़ों में कुल 88 प्रतिशत रिकॉर्ड अपडेट हैं। पीपीपी डेटा में 88 प्रतिश रिकॉर्ड की कुल आय 1,71,012 करोड़ रुपये बताई गई है। जबकि, आर्थिक सर्वेक्षण 2021 के अनुसार, वर्ष 2020-21 के लिए राज्य का जीएसडीपी मौजूदा कीमतों पर 7,64,872 करोड़ रुपये है। पीपीपी डेटा में दिखाई गई आय का लगभग चार गुना है। पीपीपी में आय के आंकड़े पूर्व-निर्धारित अविश्वसनीय हैं। इसलिए यह सुझाव दिया गया है कि सबसे गरीब परिवारों को राज्य कल्याण योजनाओं को बेहतर ढंग से लक्षित करने के लिए, बीपीएल / अंत्योदय घरेलू डेटा को और अधिक विश्वसनीय बनाया जा सकता है। आधार संख्या बीपीएल / अंत्योदय डेटा में एक गणना सर्वेक्षण के माध्यम से प्राप्त की जा सकती है और अंतिम, लेकिन कम से कम, प्रवासी आबादी को शामिल नहीं कर सकती है।

नागरिक संसाधन सूचना विभाग प्रमुख सचिव ने इन दावों को खारिज कर दिया है। वी उमाशंकर ने खेमका के द्दारा जारी आकड़ों को एक कोट करते हुए कहा कि एक निजी वेबसाइट से हैं जो एक सरकारी वेबसाइट के रूप में है। पीपीपी के तहत, हम पारिवारिक डेटा एकत्र कर रहे हैं, परिवार समाजिक निर्माण के अंतर्गत आता है। परिवार पहचान पत्र में जो शब्द प्रयोग किया गया है वह परिवार है। जनगणना जनगणना घरों को देखती है। जिस आधार पर उसने ये आंकड़े निकाले हैं, वह पूरी तरह से गलत है।

कौन है अशोक खेमका?

अशोक खेमका अपने तबादलों को लेकर चर्चा में रहते है। हरियाणा सरकार पर उत्पीड़न का आरोप  लगाने वाले अशोक खेमका, 1991 बैच के आईएस अधिकारी हैं। 21 साल की नौकरी में 53 बार उनका तबादला हो चुका है। अपनी ईमानदारी और भ्रष्टाचार विरोधी तेवर की वजह से ही अशोक खेमका हरियाणा में काफी लोकप्रिय हैं। साल 2004 में उन्होंने मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला तक का आदेश मानने से मना कर दिया था। आईएएस खेमका ने महाराष्ट्र की राजनीतिक घटनाक्रम पर ट्वीट किया था। अशोक खेमका ने तंज कसते हुए कहा था कि विधायकों की खरीद फरोख्त, उन्हें बंधक बनाना सभी जनसेवा के लिए की जाती है, जनसेवा जैसा सुअवसर छोड़ा नहीं जाता, वंचित रहने से हृदय में पीड़ा जो होती है।