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हरियाणा में बीजेपी को झटका, कृषि कानूनों के विरोध के समर्थन में रामपाल माजरा ने दिया इस्तीफा

हरियाणा की राजनीति में इन दिनों बड़ी हलचल मच गई है। एक दिन पहले जहां इनेलो नेता अभय चौटाला ने विधानसभा से इस्‍तीफा दे दिया, वहीं गुरुवार 28 जनवरी को रामपाल माजरा ने भाजपा छोड़ दी। वह 2019 में विधानसभा चुनाव के दौरान ही इनेलो छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। आज तीन कृषि कानूनों के खिलाफ उठे किसान आंदोलन के समर्थन में रामपाल माजरा ने भाजपा को अलविदा कह दिया।

अभय चौटाला इनेलो से एकमात्र विधायक थे और इस्तीफा देने ट्रैक्टर पर विधानसभा भवन पहुंचे थे। इस्तीफा देने से पहले उन्होंने इनेलो कार्यकर्ताओं की बैठक बुलाई थी। बैठक के बाद अभय हरियाणा विधानसभा के भवन पहुंचे। जहां उन्होंने अपना इस्तीफा विधानसभा स्पीकर ज्ञानचंद गुप्ता को सौंप दिया था।

चौटाला परिवार में जब राजनैतिक बिखराव की नौबत आई तो तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष अशोक अरोड़ा के साथ रामपाल माजरा ने इस बिखराव को रोकने की भरसक कोशिश की, मगर कामयाब नहीं हो सके। इनेलो के टूटने के बाद अशोक अरोड़ा कांग्रेस में और रामपाल माजरा भाजपा में चले गए थे। अशोक अरोड़ा को कांग्रेस ने थानेसर (कुरुक्षेत्र) से टिकट दिया था, जबकि रामपाल माजरा का कलायत से टिकट काट दिया था। इसके बावजूद माजरा भाजपा में बने रहे।

हरियाणा और पंजाब ऐसे राज्य है जहां तीन कृषि कानूनों का जमकर विरोध हो रहा है। इससे पहले कृषि कानूनों के विरोध चलते बीजेपी की सहयोगी पार्टी रही अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि इनेलो नेता के इस्तीफा देने के बाद बीजेपी की सरकार पर कोई असर नहीं पड़ेगा। क्योंकि बीजेपी के पास विधानसभा में संख्याबल है। हरियाणा में बीजेपी और जेजेपी ने मिलकर गठबंधन सरकार बना रखी है।

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