जलवायु परिवर्तन से भारत में 70 हजार मारे गए

जलवायु परिवर्तन आज पूरी दुनिया के लिए गंभीर चिंता का विषय है। जर्मनवॉच नामक एक स्वतंत्र विकास संगठन की हाल में आई रिपोर्ट के मुताबिक जलवायु परिवर्तन के इस दौर में पिछले 20 वर्षों के दौरान दुनिया के विभिन्न हिस्सों में मौसम चक्र गड़बड़ाने के फलस्वरूप हुई घटनाओं में 5.2 लाख से ज्यादा लोग मारे गए। म्यांमार के बाद भारत में मारे गए लोगों की संख्या सबसे ज्यादा है। अंग्रेजी दैनिक इंडियन एक्सप्रेस ने इस पर विस्तृत खबर प्रकाशित की है।

जर्मनवॉच की रिपोर्ट के मुताबिक अकेले भारत में वर्ष 2017 में 2,736 लोग बाढ़, अत्यधिक बारिश या चक्रवात जैसी घटनाओं में मारे गए। 1998 से 2017 के बीच 20 साल की अवधि में भारत में हर साल औसतन 3,660 लोग काल कवलित हुए। इस तरह कुल 73,212 लोग बेमौत मारे गए। इस अवधि के दौरान भारत को ओडिशा के चक्रवाती तूफान सहित बाढ़, भूस्खलन, भारी बारिश और गर्म हवाएं चलने जैसी घटनाओं का सामना करना पड़ा।

खास बात यह है कि जलवायु परिवर्तन के फलस्वरूप हुई अकाल मौतों में भूकंप, सुनामी या ज्वालामुखी जैसी प्राकृतिक आपदाओं के कारण होने वाली मौतों को डेटा शामिल नहीं किया गया है, क्योंकि ये जलवायु परिवर्तन के कारण नहीं हैं।

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