दिग्गी राजा का संकट

कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह इन दिनों चौतरफा संकट झेल रहे हैं। कभी राहुल गांधी के राजनीतिक गुरु कहलाए जाने वाले दिग्गी राजा की इन दिनों कांग्रेस अध्यक्ष संग दूरी बढ़ने के स्पष्ट संकेत हैं। राहुल गांधी द्वारा पुनर्गठित कांग्रेस वर्किंग कमेटी से उन्हें हटा दिया गया है। वर्तमान में वे बतौर कांग्रेस महासचिव किसी भी राज्य के प्रभारी नहीं हैं। हालांकि उन्हें मध्य प्रदेश की चुनाव समन्वय समिति का प्रमुख घोषित किया गया है लेकिन अपने ही गृह प्रदेश में उनकी कोई सुनवाई नहीं है। चुव प्रचार और टिकट वितरण की कमान कमलनाथ और ज्योर्तिआदित्य सिंधिया के हाथों में है। इस बीच दिग्गी राजा के घर में चल रही जंग तेज होने के समाचार हैं। दरअसल, जब से उन्होंने अपने से काफी कम उम्र की अमृता सिंह संग विवाह रचाया है, उनके बच्चों ने खुली बगावत कर डाली है। खबर है कि उनके पुत्र ने अमृता सिंह की पुश्तैनी राघोगढ़ महल में घुसने तक की पाबंदी लगा दी है। जानकारों की मानें तो अमृता सिंह राजनीति में उतरना चाहती है। वे दिग्गी राजा की परंपरागत सीट से टिकट मांग रही हैं। जहां से स्वयं राजा के बेटे जयवर्धन सिंह दावेदार हैं। कभी प्रदेश और देश की राजनीति में महत्वपूर्ण किरदार निभाने वाले दिग्विजय सिंह इन सबके चलते अपने राजनीतिक और पारिवारिक जीवन का सबसे बड़ा संकट झेलने को विवश हैं।

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