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योगी राज में सुरक्षित नहीं बेटियां, बाल संरक्षण गृह में 57 को कोरोना 2 को एड्स 2 प्रेग्नेंट

“बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ” यही नारा है भाजपा सरकार का । केंद्र हो या प्रदेश ज्यादातर जगह भाजपा सरकार है। उत्तर प्रदेश की बात करें तो यहां योगी आदित्यनाथ की सरकार है। यह सरकार महिलाओं की सुरक्षा के लिए बड़े-बड़े दावे करती है।

योगी सरकार कभी वैलेंटाइन डे के दिन प्रेमी जोड़ों पर डंडा बरसात हुई नजर आती है, तो कभी मिशन मजनू अभियान चलाकर अपने आप को महिलाओं की हित चिंतक होना दर्शाती है। लेकिन प्रदेश के कानपुर शहर में एक ऐसी सनसनीखेज खबर आ रही है जिससे सरकार की लापरवाही उजागर हो रही है।

यही नहीं बल्कि किस तरह सरकारी बाल संरक्षण केंद्र नाबालिक बच्चों के शोषण के केंद्र बने हुए हैं यह भी मामला सामने आया है। फिलहाल कानपुर में हड़कंप मचा हुआ है।

दरअसल, हुआ यह था कि एक बाल संरक्षण गृह में नाबालिग बच्चियां रहती है जिनकी कोरोना जांच कराएगी गई । जिसमें चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई। हालांकि यह तो कोरोना जांच होने के बाद पता चला है कि यहां नाबालिक बच्चों के साथ शारीरिक शोषण तक किया जा रहा है । लेकिन यह शोषण कितने सालों से चला आ रहा है इसका लेखा-जोखा किसी के पास नहीं है।

यहां तक की जब बाल संरक्षण गृह की हिस्ट्री जानने की कोशिश की गई तो बताया गया कि शोषण का शिकार हुई बच्चियां कब और कहां से आई यह कोई जानकारी सरकार के पास नहीं है। हुआ यह था कि कानपुर के स्वरूप नगर स्थित राजकीय बाल संरक्षण गृह में रह रही बच्चियों की कोरोना जांच कराई गई।

यह जांच बच्चियों के स्वास्थ्य के मद्देनजर कराई गई थी। जिसमें पता चले कि कहीं वह कोविड-19 से संक्रमित तो नहीं है। लेकिन जांच में जो रिपोर्ट सामने आई उससे जनता के रोंगटे खड़े हो गए। सामने आई रिपोर्ट के अनुसार 57 बच्चियों को कोरोना के संक्रमण की पुष्टि पाई गई है। जबकि 17 साल की दो बच्चियों के प्रेग्नेंट होने की जांच रिपोर्ट सामने आई । यही नहीं बल्कि हद तो तब हो गई जब दो बच्चियां एड्स से संक्रमित पाई गई। जिनमें से एक को हेपेटाइटिस की बीमारी भी मिली है ।

फिलहाल बच्चियों को कानपुर के रामा मेडिकल कॉलेज भेजा गया है। जहां उनका इलाज कराया जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ पूरे राजकीय बाल संरक्षण गृह को सील कर दिया गया है तथा वहां के स्टाफ को क्वॉरेंटाइन किया गया है।