एनसीपी ने बढ़ाया दोस्ती का हाथ ,बीबीए ने किया इंकार

महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है। चुनाव में एक महीने से भी कम वक्त बचा है। ऐसे में विपक्षी गठबंधऩ सत्ताधारी गठबंधऩ को सत्ता में आने से रोकने के लिए पूरे जोरशोर से लगा है। उनकी कोशिश है कि बीजेपी विरोधी वोटों का बंटवारा न हो। लेकिन इस कोशिश में कांग्रेस और एनसीपी गठबंधऩ को बड़ा झटका लगा है। लोकसभा चुनाव को इस गठबंधऩ को तगड़ा नुकसान पहुंचाने वाली प्रकाश अंबेडकर की वंचित बहुजन आघाड़ी ने गठबंधऩ में शामिल होने से इनकार कर दिया है।
दरअसल, एनसीपी और  अंबेडकर  ने लोकसभा चुनाव अलग-अलग लड़ा था जिसका नुकसान दोनों को उठाना पड़ा था। एनसीपी नेता अजीत पवार ने कहा कि हम चाहते हैं कि समान विचारधारा वाले दल मिलकर भाजपा का मुकाबला करें। पवार ने कहा, पुणे की आठ विधानसभा सीटों में से एनसीपी चार पर उम्मीदवार उतारेगी। तीन कांग्रेस की होंगी और एक सीट वह अपने सहयोगी दल को देगी। अगर वीबीए साथ आती है तो इस सीट पर उसकी दावेदारी होगी। वहीं, लोकसभा चुनाव में साथ रहे ओवैसी ने पिछले महीने ही प्रकाश अंबेडकर का साथ छोड़ दिया है।

एनसीपी नेता अजित पवार के प्रस्ताव पर बीबीए नेता अंबेडकर ने दो टूक कहा कि कांग्रेस-एनसीपी के लिए उनकी पार्टी के दरवाजे बंद हैं। हमारी पार्टी एआईएमआईएम की वापसी का स्वागत करेगी, लेकिन एनसीपी से गठबंधन संभव नहीं। हम सभी 288 सीटों पर लड़ने की तैयारी में हैं।उम्मीदवारों और सहयोगी दलों की घोषणा 26 सितंबर तक हो जाएगी। अंबेडकर ने आरोप लगाया कि कांग्रेस वीबीए को भाजपा की टीम बी बताती थी, लेकिन सच यह है कि अपने नेताओं के खिलाफ जांच रुकवाने के लिए कांग्रेस खुद भाजपा को मदद कर रही है।

महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता राजेंद्र दर्डा ने 23 सितंबर को कहा कि वह पार्टी के साथ हैं। उन्होंने निजी कारणों से पार्टी में पद लेने से मना किया है। दर्डा ने कहा कि उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा नहीं दिया है। मुझे तीन महीने पहले पार्टी की मीडिया और संचार समिति का अध्यक्ष बनाया गया था, लेकिन मैंने व्यक्तिगत कारणों से पद नहीं लिया। मैंने इसकी जानकारी जुलाई में ही पार्टी नेतृत्व को दे दी थी। महाराष्ट्र में दलित वोटों की संख्या अच्छी खासी है। इसलिए माना जा रहा है कि विपक्षी एनसीपी का ध्यान इन वोटों में बिखराव रोकने पर है।