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देश के सबसे पुराने राजनीतिक दल कांग्रेस में घमासान 

देश के सबसे पुराने राजनीतिक दल में इन दिनों कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है। पार्टी के बड़े नेताओं में इस बात को लेकर भारी बेचैनी है कि राहुल गांधी के अध्यक्ष पद त्यागने के कई माह बीतने के बाद भी नए अध्यक्ष का चयन नहीं हो सका है। सोनिया गांधी अंतरिम व्यवस्था के तहत कार्यवाहक अध्यक्ष हैं। उनका खराब स्वास्थ्य पार्टी को भाजपा के मुकाबले में खड़ा नहीं कर रहा है।

पंजाब, राजस्थान और मध्य प्रदेश में भले ही सरकार कांग्रेस की है, क्षत्रपों की आपसी लड़ाई के चलते जनता का एक बार फिर से पार्टी के प्रति आक्रोश बढ़ रहा है। शशि थरूर और संदीप दीक्षित सरीखे पार्टी के वफादार तो इतने व्यथित हैं कि अब बजरिए मीडिया नए अध्यक्ष के चुनाव में हो रही देरी का मुद्दा उठाने लगे हैं। मध्य प्रदेश में बागी सुर अपना चुके ज्योतिरादित्य सिंधिया और राजस्थान में सचिन पायलट न केवल अपने ही मुख्यमंत्रियों की राह में रोड़ा बन रहे हैं,

बल्कि आलाकमान के निर्देशों को भी जमकर नजरअंदाज करने मं जुटे हैं। खबर है कि पार्टी नेताओं के इस रवैये से खासी दुखी सोनिया गांधी ने कांग्रेस कार्य समिति के कुछ सदस्यों संग पिछले दिनों मंत्रणा कर स्पष्ट कर दिया है कि वे ज्यादा समय तक पार्टी की कमान नहीं संभाल सकती। चूंकि राहुल गांधी दोबारा अध्यक्ष बनने को कतई तैयार नहीं इसलिए पार्टी सूत्रों का कहना है कि किसी गांधी परिवार विश्वस्त पुराने कांग्रेसी को अध्यक्ष बनाने की कवायद अब तेज हो चुकी है। थरूर और दीक्षित इसी के चलते अब मीडिया सहारे अपनी बात खुलकर रख रहे हैं।