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भारत को झुकाने के लिए हर तरह से दबाव बना रहा है चीन

चीन की रणनीति हमेशा भारत पर दबाव बनाने की रही है। यहां तक कि जब चीनी नेता भारत भ्रमण पर रहे उस दौरान भी उसके सैनिक सीमाओं का उल्लंघन करने से नहीं चूके। हालत यह है कि वर्ष 2014 में जब नई दिल्ली में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की शिखर वार्ता चल रही थी तो उस वक्त भी चीनी सैनिकों की घुसपैठ जारी थी। एक ओर जिनपिंग भारत और चीन की वर्षों पुरानी दोस्ती की दुहाई देकर महत्वपूर्ण समझौतों पर सहमति व्यक्त कर रहे थे तो दूसरी तरफ भारत को चीन की सैन्य शक्ति का अहसास भी कराया जा रहा था।

आर्थिक मोर्चे की बात करें तो चीन भारत को जतलाता रहा है कि चीन के साथ चलने में भारत के लिए आर्थिक विकास की अपार संभावनाएं हैं। यानी की भारत की निर्भरता उसकी दया पर बनी रहे। अब तो वह मनोवैज्ञानिक रूप से भी भारत का मनोबल गिराने की कोशिशें करने लगा है। वह भारत को संदेश दे रहा है कि उसका पड़ोसी देश पाकिस्तान अब चीन के साथ है। यहां तक कि जो नेपाल भारत का परंपरागत दोस्त रहा है, वह भी आज भारत विरोधी भाषा बोल रहा है। चीन भारत को अहसास करा रहा है कि इस वक्त पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि नेपाल से भी उसका सीमा विवाद चल रहा है। यानी तीन देशों से उसका विवाद चल रहा है। इन हालात में सीमा पर चीनी सेनाओं का मुकाबला करना उसके बूते की बात नहीं है।

चीन के दबाव की रणनीति की एक झलक यह है कि गलवान में हुई हिंसक झड़प को लेकर अपनी गलती मानने के बजाए वहां की सरकार ने गेंद भारत के पाले में डाल दी। यही नहीं अपने मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स के माध्यम से चीन सरकार ने धमकी भी दे डाली है कि अगर एलएसी पर तनाव बढ़ा तो भारत को चीन के अलावा पाकिस्तान और यहां तक कि नेपाल की सेना का भी दबाव झेलना पड़ेगा। संदेश साफ है कि भारत-चीन सीमा पर हालात बिगड़ने की स्थिति में पाकिस्तान और नेपाल चीन का साथ देंगे। ग्लोबल टाइम्स चीन की सत्तारूढ़ पार्टी का माउथपीस माना जाता है।

-दाताराम चमोली