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भगवान बनकर इन डॉक्टरों ने दी मरीजों को जीवन पर खुद हो गए कोरोना के शिकार

कहते हैं ईश्वर के बाद अगर किसी के सामने सर झुकता है तो वो दो लोगों के सामने। पहला शिक्षक। शिक्षक इसलिए क्योंकि वो हमें ज्ञान देते हैं। हमें इंसान बनाते हैं। दूसरा डॉक्टर। डॉक्टर हमें जीवनदान देते हैं। डॉक्टर को भगवान माना जाता है। सच में डॉक्टर भगवान होते हैं। कोरोना वायरस फैलने वाली बीमारी है। डॉक्टर बिना अपने बारे में सोचे जिस तरह से लोगों को ठीक करने में जुटे हैं। वो सिर्फ तारीफ तक सीमित नहीं हो सकती। इस विपत्ति में कई डॉक्टरों ने अपनी जान गवां दी। अपने पीछे अपने परिवार को छोड़ गए। आइए जानते हैं उन सभी डॉक्टरों के बारे में जो हमें जीवन देने के लिए अपनी जान की परवाह नहीं की।

इंडोनेशिया के डॉ हैदियो अली अब हमारे बीच नहीं रहे। डॉ अली कोरोना वॉयरस के मरीज़ों का इलाज दिन-रात करते रहें। इस बीच घर नहीं जा सके। संक्रमित मरीजों का इलाज करते हुए खुद कोरोना से संक्रमित हो गए। आइसोलेशन में रहे। लेकिन जब डॉ अली को लगने लगा कि अब वो नहीं बचेंगे तो अपनी बीवी, बच्चों को आखिरी बार देखने घर गए। घर के अंदर नहीं गए, गेट के बाहर खड़े हो गए। उन्हें डर था कि कहीं ये वायरस उनके बच्चों या बीवी को न हो जाएं। गेट पर खड़े होकर अपने बच्चों और प्रैग्नेंट बीवी को आखरी बार निहारा। कितना बेबस होंगे अली मौत के मुँह में जा रहे। लेकिन जीभर कर अपनी बीवी अपने बच्चों को गले तक नहीं लगा सके। सभी को देखकर वो चले गए। वापस हॉस्पिटल आएं। कुछ घंटे बाद उनकी मौत हो गई। जब गेट पर डॉ अली खड़े थे तभी उनकी पत्नी ने उनकी तस्वीर ली थी। जो सोशल मीडिया में लोग साझा कर रहे हैं।

दूसरा जाबाज डॉक्टर हैं पाकिस्तान के ओसामा रियाज। रियाज मात्र 26 साल के थे। गिलगिट-बाल्टिस्तान में कोरोना के मरीजों के इलाज में लगातार लगे हुए थे। जिससे रियाज भी संक्रमित हो गए। उनकी रविवार को मौत हो गई। उनकी मौत के बाद उन्हें राष्ट्रीय हीरो घोषित किया गया। हमारे बीच नहीं हैं। लेकिन मरने से पहले उन्होंने एक वीडियो डाली थी। उन्होंने कहा था कि प्लीज आप सभी अपना ध्यान रखें। सरकार की बात मानें। अपने लिए, अपने समाज अपने देश के लिए आप घर पर रुकें। इसके अलावा लोगों को साफ-सफाई पर ध्यान रखने की बात कहीं थी।

आखिरी डॉक्टर की बात करूं तो वो हैं डॉ वेनलियांग। ये वही शख्स थे जिन्होंने सबसे पहले कोरोना वायरस की पहचान की थी। चीन को आगाह की थी। लेकिन हॉस्पिटल के अधिकारियों ने वेनलियांग पर अफवाह फैलाने का आरोप लगाकर उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई बैठा दी थी। उन्हें जेल भी जाना पड़ा था। जब कोरोना नाम की वायरस की पुष्टि हुई तो उन्हें रिहा किया गया। मरीजों का इलाज के दौरान ली वेनलिंयांग खुद भी इस जानलेवा वायरस का शिकार हो गए। उनकी मौत हो गई। ऐसा ही एक भारत में भी केस सामने आया है। जहां एक डॉक्टर कोरोना वायरस से पीड़ित मरीज का इलाज के दौरान संक्रमित हो गए हैं। फिलहाल संक्रमित डॉक्टर को गुरु तेग बहादुर अस्पताल में भर्ती हैं।

ऐसे कई डॉक्टर हैं, जो हमारी जान बचाने के लिए एक पैर पर खड़े थे और अब भी हैं। कई डॉक्टर हैं जो संक्रमित हो चुके हैं। कुछ आइसोलेशन में हैं। तो कुछ को खो चुके हैं। जिसका नाम आना हमारे पास बाकी है। अखबारों के हेडलाइन बने न बने। हमारी जिन्दगी की लाइफ लाइन बढ़ा गए।