तीन धरोहरों से दूर होती भाजपा

2019 में बीजेपी घोषणापत्र

भाजपा ने लोकसभा चुनाव 2019 के लिए मेनिफेस्टो जारी कर दिया है। पार्टी कार्यालय में कार्यकर्ताओं के बीच यह घोषणापत्र जारी रहते समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अध्यक्ष अमित शाह, केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, वित्त मंत्री अरुण जेटली सहित कई नेता मौजूद थे। लेकिन एक सवाल सबसे अहम था कि पार्टी के संस्थापक लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी इस दौरान मंच पर नहीं थे। हालांकि पहले खबर आई थी कि मेनिफेस्टो जारी होने से पहले अमित शाह लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी के मध्य मुलाकात होगी। लेकिन बाद में निर्णय लिया गया कि दोनों बुजुर्ग नेताओं से शाम को मुलाकात होगी। भाजपा पार्टी के इतिहास में यह पहला अवसर था जब लोकसभा चुनाव के लिए जारी होने वाले मेनिफेस्टो में लालकृष्ण आडवाणी एवं मुरली मनोहर जोशी मौजूद नहीं थे। गौरतलब है कि साल 2014 का घोषणापत्र डाॅ. मुरली मनोहर जोशी की अध्यक्षता में बना था। बीते साल 16 अगस्त को पार्टी के एक संस्थापक सदस्य और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का देहांत हो गया था। अटल-आडवाणी ने ही मिलकर पार्टी की स्थापना की थी। 1980 में भारतीय जनता पार्टी की स्थाना हुई। वर्षों तक पार्टी असफल रही थी। भारतीय जनता पार्टी 1984 में हुए चुनाव में सिर्फ दो लोकसभा सीटें ही जीत पाई। दो सीटें जीतने वाली बीजेपी पार्टी को यहां तक पहुंचाने में लालकृष्ण आडवाणी की संगठन क्षमता और रणनीति का बड़ा योगदान रहा है। दूसरी तरफ अटल बिहारी वाजपेयी अपने भाषणों की वजह से सबसे चर्चित नेता बन गए थे। इसके बाद तीसरी धरोहर के रूप में मुरली मनोहर जोशी का नाम आता था और वह भी पार्टी के अध्यक्ष रह चुके हैं। कभी इन तीन नेताओं की वजह से बीजेपी जानी जाती थी और बीजेपी के कार्यकर्ता नारा भी लगाते थे, ‘भारत मां’ के तीन नाम अटल-आडवाणी तथा मुरली मनोहर। बहरहाल अब बीजेपी पूरी तरह से मोदीमय हो चुकी है। इस बार मेनिफेस्टो में भी तस्वीरों और मंचों से पुराने नेताओं को दूर रखा गया है। इस लोकसभा चुनाव में लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी को टिकट भी टिकट नहीं दिया।

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