सिक्किम में भी “आया राम गया राम”

सिक्किम में अचानक से भारी राजनितिक उलट-पलट हो गयी है। सिक्किम के पूर्व सीएम को छोड़ सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (एसडीएफ) के लगभग सभी विद्यायक आज बीजेपी में शामिल हो गए है।  इस सियासी उठापटक के बाद अब पूर्व सीएम पवन चामलिंग के साथ मात्र  पांच विद्यायक बचे है। इस सियासी हलचल से सिक्किम में हड़कंप सा मच गया है।

 दरअसल , एसडीएफ के दस विधायकों द्वारा बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा और राष्ट्रीय महासचिव राम माधव की मौजूदगी में बीजेपी ज्वाइन की गयी है। एसडीएफ के कुल 15 विधायक है जिनमे से दस विधायकों द्वारा बीजेपी की सदयस्ता ले ली गयी है।
गौरतलब है कि सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट पार्टी द्वारा सिक्किम में 25 साल तक शासन किया गया  और इस दौरान पवन चामलिंग ही मुख्यमंत्री रहे थे। वे सबसे लम्बे समय तक मुख्यमंत्री पद सँभालने वाले नेताओं में गिने जाते है। इस साल मई तक राज्य में एसडीएफ पार्टी ही सत्ता में रही। इसी साल लोकसभा चुनाव के साथ कराए गए विधानसभा चुनाव में पार्टी 32 सीटों वाले राज्य में बहुमत हासिल नहीं कर पाई थी, और 15 विधायकों के साथ विपक्ष में बैठी थी। चुनाव में सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा को 17 सीटें हासिल हुई थीं, और प्रेम सिंह तमांग मुख्यमंत्री बने थे।
बीजेपी में शामिल होने के बाद विधायक दोरजी सेरिंग द्वारा कहा गया कि इस साल हुए सिक्किम विधानसभा चुनाव में एसडीएफ ने 15 सीटें जीती थी। अभी तीन विधानसभाओं में उपचुनाव होना है उसके लिए हम भाजपा के लिए काम करेंगे। सिक्किम के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि इतनी बड़ी तादात में विधायक शामिल हो रहे है। मोदी जी की ‘नार्थ ईस्ट पॉलिसी’ को युवा पसंद कर रहा है। इसीलिए हम चाहते हैं कि सिक्किम में कमल खिले। जब तक राष्ट्रीय पार्टी सिक्किम में काम नहीं करेगी तब तक कुछ नहीं हो पायेगा। जम्मू कश्मीर में जो हुआ उससे सिक्किम के लोग बहुत प्रभावित है।  

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