रामदेव के बाद अब IMA की उत्तराखंड के मंत्री से भिडंत, मिक्सोपैथी पर विवाद

योग गुरु रामदेव से दो-दो हाथ करने के बाद अब इंडियन मेडिकल एसोसिएशन यानी कि आईएमए उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत से आर – पार की लड़ाई के मूड में है। उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने योग दिवस पर ऐसी घोषणा कर डाली जिससे आईएमए मंत्री के खिलाफ मैदान में उतर गया है।

दरअसल,  उत्तराखंड के आयुष मंत्री हरक सिंह रावत ने नए विवाद को यह कहकर जन्म दे दिया की उत्तराखंड के आयुर्वेद डॉक्टर अब इमरजेन्सी में एलोपैथिक दवाई लिख सकते हैं। विवाद यहीं से उत्पन्न हुआ । जिन डॉक्टरों को कभी एलोपैथी पढ़ाई नहीं गई। जिनका पढ़ाई का कोर्स सिर्फ आयुर्वेद रहा, उनसे एलोपैथी का इलाज कैसे संभव है?
 फिलहाल, इस पर आईएमए की मंत्री से भिड़ंत हो गई है।  यही नहीं बल्कि  आईएमए ने इस मामले को कोर्ट में ले जाने की चेतावनी दे डाली है। आईएमए के उत्तराखंड के सचिव डॉ अजय खन्ना ने कहा है कि उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री अपने इस आदेश को वापस ले नहीं तो  आईएमए को मजबूरन उनके खिलाफ उतरना पड़ेगा।
आयुष मंत्री डॉ हरक सिंह रावत को नेशनल मेडिकल कमीशन एक्ट की जानकारी नहीं होगी। इस एक्ट के सेक्शन 34 में साफ लिखा है कि एलोपैथी दवा केवल वही डॉक्टर लिख सकते हैं जो मेडिकल काउंसिल में रजिस्टर्ड होंगे।  सुप्रीम कोर्ट भी इस मामले में पहले निर्णय दे चुका है और यह कदम सुप्रीम कोर्ट की अवमानना होगी। यदि राज्य में ऐसा होता हैतो आईएमए इसका विरोध करेगा और किसी भी सूरत में इस तरह की मिक्सोपैथी को मंजूर नहीं किया जाएगा।
– डॉ अजय खन्ना, महासचिव आईएमए, उत्तराखंड
 गौरतलब है कि कल योग दिवस के अवसर पर उत्तराखंड के आयुष मंत्री हरक सिंह रावत ने एक घोषणा की । जिसमें उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में आयुर्वेदिक अस्पतालों में इमरजेंसी के वक्त डॉक्टरों को एलोपैथिक दवाई लिखने की स्वीकृति दी जाएगी। आयुर्वेदिक डॉक्टरों के द्वारा एलोपैथिक दवाई के लिखने की घोषणा के बाद से ही उत्तराखंड के डॉक्टरों में मंत्री के खिलाफ असंतोष पैदा हो गया है। डॉक्टरों का कहना है कि जब पूर्व में सुप्रीम कोर्ट और नेशनल मेडिकल कमिशन यह स्पष्ट आदेश कर चुके हैं कि किसी भी मरीज पर मिक्सोपैथी (  दो पंथियों को मिलाकर उपचार ) का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।
यही नहीं बल्कि इस संबंध में स्पष्ट गाइडलाइन है कि आयुर्वेदिक डॉक्टर एलोपैथिक प्रैक्टिस नहीं कर सकता है। इसके बावजूद मंत्री ने आयुर्वेदिक डॉक्टर को एलोपैथी का उपचार करने की घोषणा कैसे कर दी? डॉक्टरों का कहना है कि जिन डॉक्टरों ने कभी एलोपैथ की पढ़ाई नहीं की वह दवा कैसे लिख सकते हैं? अगर जिस तरह कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत कह रहे हैं कि इमरजेंसी में आयुर्वेद के डाँक्टर एलोपैथ की दवा दे सकेंगे,  तो ऐसे में मरीजों की जान भी जा सकती है