टिहरी मेडिकल कॉलेज पर फिर संग्राम

टिहरी में प्रस्तावित मेडिकल काॅलेज को नरेंद्रनगर विधानसभा के फिपल्टी ले जाने की कवायद ने सियासी विवाद बढ़ा दिया है। भाजपा के ही विधायक किशोर उपाध्याय और सुबोध उनियाल आमने-सामने हैं जबकि मेडिकल काॅलेज की मांग को लेकर टिहरी की जनता फिर सड़कों पर है। सवाल सिर्फ जगह का नहीं बल्कि पहाड़ की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था और टिहरी से महत्वपूर्ण संस्थानों के लगातार खिसकने का भी है। 2027 के चुनाव से पहले यह मुद्दा भाजपा के लिए बड़ी राजनीतिक चुनौती बन सकता है

प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही सियासी हलचल तेज होने लगी है। धामी सरकार चुनावी मोड में नजर आ रही है और सत्तारूढ़ भाजपा के विधायक अपने-अपने क्षेत्रों में बड़ी योजनाएं लाने की कोशिश में जुटे हैं। इसी बीच टिहरी मेडिकल काॅलेज को लेकर भाजपा के ही दो विधायक आमने-सामने आ गए हैं। टिहरी के विधायक किशोर उपाध्याय और नरेंद्रनगर के विधायक सुबोध उनियाल के बीच मेडिकल काॅलेज की प्रस्तावित जगह को लेकर विवाद ने सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दोनों विधायकों को अपने कार्यालय बुलाकर मेडिकल काॅलेज का निर्माण जनभावनाओं और व्यापक जनहित के अनुरूप करने की बात कहकर फिलहाल विवाद शांत करने की कोशिश की है। हालांकि टिहरी में इस मुद्दे पर आंदोलन की तैयारी और जनता के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए मामला अभी पूरी तरह शांत होता नजर नहीं आ रहा है।

टिहरी मेडिकल काॅलेज का मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका सीधा सम्बंध जिले की लाखों की आबादी की स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़ा है। टिहरी, प्रतापनगर, घनशाली और धनोल्टी के साथ उत्तरकाशी की गंगोत्री विधानसभा तथा रुद्रप्रयाग के जखोली क्षेत्र के लोगों को इसका लाभ मिलने की उम्मीद है। इन क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति लम्बे समय से बेहद खराब है। खासकर प्रतापनगर और घनशाली में अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र आज भी बड़े पैमाने पर रेफरल सेंटर बने हुए हैं। वर्ष 2025 में घनशाली क्षेत्र में एक सप्ताह के भीतर तीन गर्भवती महिलाओं की मौत के बाद करीब एक महीने तक आंदोलन चला था। ऐसे में मेडिकल काॅलेज की मांग केवल राजनीतिक नहीं बल्कि पहाड़ की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ा सवाल बन चुकी है।
नई टिहरी में मेडिकल काॅलेज की स्थापना की मांग राज्य गठन के बाद से ही उठती रही है। वर्ष 2024 में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर के टिहरी दौरे के दौरान विधायक किशोर उपाध्याय ने उनके सामने मेडिकल काॅलेज की मांग रखी थी। खट्टर ने टीएचडीसी को टिहरी में मेडिकल काॅलेज के निर्माण और राज्य सरकार द्वारा उसके संचालन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। इसके बाद टीएचडीसी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र भेजकर मेडिकल काउंसिल के मानकों के अनुरूप मेडिकल कॉलेज निर्माण की बात कही। मुख्यमंत्री के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने नई टिहरी के आस-पास जमीन तलाशनी शुरू की और सरज्यूला पट्टी के भागीरथीपुरम के समीप इणिया गांव में करीब 13 हेक्टेयर भूमि का चयन कर उसे स्वास्थ्य विभाग के नाम हस्तांतरित कर दिया गया। मेडिकल कॉलेज का निर्माण टीएचडीसी को करना है और इसके लिए बजट भी स्वीकृत बताया गया है।
मार्च 2026 में मंत्रिमंडल विस्तार के बाद तस्वीर बदल गई। सुबोध उनियाल को स्वास्थ्य एवं चिकित्सा तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी मिलने के बाद 24 जुलाई 2026 को हुई विभागीय समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी टिहरी को नरेंद्रनगर विधानसभा क्षेत्र की गजा तहसील के फिपल्टी में मेडिकल काॅलेज के लिए भूमि चयन का प्रस्ताव शासन को भेजने के निर्देश दिए गए। सवाल यही है कि जब इणिया गांव में करीब 13 हेक्टेयर भूमि पहले ही चयनित होकर स्वास्थ्य विभाग को हस्तांतरित की जा चुकी है और मेडिकल काॅलेज की डीपीआर भी तैयार हो चुकी है, तो फिर दूसरी जगह जमीन तलाशने की जरूरत क्यों पड़ी?
सरकार की ओर से इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि फिपल्टी में मेडिकल काॅलेज बनने से ज्यादा लोगों को इसका लाभ मिलेगा लेकिन टिहरी में इस तर्क को लेकर सवाल उठ रहे हैं। फिपल्टी से ऋषिकेश एम्स की दूरी करीब 60-65 किलोमीटर बताई जाती है जबकि प्रतापनगर, घनशाली और टिहरी विधानसभा के दूरस्थ इलाकों से एम्स ऋषिकेश अथवा देहरादून पहुंचने में 100 से 150 किलोमीटर तक की दूरी तय करनी पड़ती है। ऐसे में स्थानीय लोगों का सवाल है कि मेडिकल काॅलेज का उद्देश्य यदि पहाड़ की स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करना है तो उसे उन क्षेत्रों के अधिक निकट क्यों न बनाया जाए जहां स्वास्थ्य सुविधाओं का सबसे ज्यादा अभाव है।
टिहरी मेडिकल काॅलेज की मांग का इतिहास भी लम्बा है। कांग्रेस की पहली निर्वाचित तिवारी सरकार के समय तत्कालीन स्थानीय विधायक किशोर उपाध्याय ने इसकी मांग उठाई थी। 2007 से 2012 के बीच भी मेडिकल कॉलेज और टिहरी के विकास को लेकर कई आंदोलन हुए। 2012 के विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने टिहरी में मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा की थी। कांग्रेस सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने भी इसके लिए प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए लेकिन योजना धरातल पर नहीं उतर सकी। हरीश रावत सरकार के समय भी यह मांग उठती रही लेकिन नतीजा सामने नहीं आया।
2022 में किशोर उपाध्याय भाजपा में शामिल होकर टिहरी से विधायक बने और इसके बाद उन्होंने मेडिकल काॅलेज की मांग को फिर जोर-शोर से उठाया। 2024 में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री के निर्देश के बाद पहली बार यह योजना ठोस प्रक्रिया में पहुंचती दिखाई दी। भारत सरकार की ब्रिज एंड रूफ कम्पनी द्वारा मेडिकल काॅलेज की डीपीआर तैयार कर 8 मई 2026 को चिकित्सा शिक्षा निदेशक को भेजे जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि अभी मेडिकल काउंसिल की अंतिम सहमति और भूमि तथा अवस्थापना से जुड़े मानकों की औपचारिक जांच बाकी बताई जा रही है।
स्थानीय पत्रकार और अधिवक्ता देवेंद्र डुमोगा का कहना है कि मेडिकल कॉलेज के लिए केवल जमीन उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं है। भूमि और भविष्य की अवस्थापना को मेडिकल काउंसिल के निर्धारित मानकों पर खरा उतरना जरूरी है। उनके मुताबिक सवाल टिहरी और नरेंद्र नगर विधानसभा का नहीं बल्कि इस बात का है कि मेडिकल कॉलेज के लिए कौन सी जगह तकनीकी और जनहित के मानकों पर उपयुक्त है। उनका तर्क है कि पिथौरागढ़ और अल्मोड़ा जैसे मेडिकल काॅलेजों में भवन तो बन गए लेकिन उनके पूरी क्षमता से संचालन की चुनौती अभी भी बनी हुई है। इसलिए केवल बड़ी इमारत खड़ी करने के बजाय यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि उसका वास्तविक लाभ आम लोगों को मिले।
टिहरी में मेडिकल काॅलेज को लेकर मौजूदा विवाद को जिले से महत्वपूर्ण संस्थानों के स्थानांतरण की पुरानी पीड़ा से भी जोड़कर देखा जा रहा है। राज्य गठन के बाद टिहरी से कई महत्वपूर्ण संस्थान और परियोजनाएं दूसरे जिलों में चली गईं। कृषि, औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय को टिहरी से पौड़ी के भरसार स्थानांतरित किया गया। देवप्रयाग में प्रस्तावित एनसीसी अकादमी भी बाद में पौड़ी स्थानांतरित कर दी गई। नरेंद्रनगर में स्थापित राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद यानी एससीईआरटी का मुख्यालय भी अंततः देहरादून स्थानांतरित हो गया।
गढ़वाल विश्वविद्यालय के केंद्रीय विश्वविद्यालय बनने की प्रक्रिया में भी टिहरी के चैरास परिसर को लेकर जिले में असंतोष रहा। चैरास का बड़ा भू-भाग टिहरी जिले में होने के बावजूद इसका अपेक्षित लाभ जिले को नहीं मिल पाने की शिकायत लम्बे समय से की जाती रही है। यही वजह है कि अब मेडिकल काॅलेज को लेकर उठे विवाद ने पुराने जख्म भी हरे कर दिए हैं।
टिहरी में मेडिकल काॅलेज के सवाल पर जिस तरह दलगत राजनीति से ऊपर उठकर जनता सड़कों पर उतर रही है, वह आने वाले दिनों में सरकार और भाजपा के लिए गम्भीर राजनीतिक चुनौती बन सकता है। 2027 के चुनाव से पहले यदि मेडिकल काॅलेज की जगह को लेकर विवाद फिर तेज होता है तो इसका असर केवल दो भाजपा विधायकों के बीच खींचतान तक सीमित नहीं रहेगा। यह पहाड़ में स्वास्थ्य सुविधाओं, क्षेत्रीय असंतुलन और टिहरी से लगातार महत्वपूर्ण संस्थानों के खिसकने के पुराने सवाल को एक बार फिर राजनीतिक मुद्दा बना सकता है।

बात अपनी-अपनी

मेडिकल काॅलेज टिहरी से दूसरी जगह क्यों ले जाया जा रहा है इसका जबाब तो हमारे माननीय स्वास्थ्य मंत्री जी ही देंगे। आपको उनसे पूछना चाहिए कि वे ऐसा क्यों कर रहे हैं? यह वोट फॉर वैल्यू वाली स्थिति होती है कि जब टिहरी में मेडिकल कॉलेज बनना है इसके लिए जमीन का चयन हो गया है। स्वास्थ्य विभाग को जमीन ट्रांसफर हो गई है। इसकी डीपीआर बन गई है, बजट का कोई इश्यू नहीं है। चार साल से मैं लगा हुआ था कि किसी तरह टिहरी को एक मेडिकल कॉलेज मिल जाए। मैं जब भी मुख्यमंत्री धामी जी से मिलता था तब मेरी एक ही मांग होती थी कि टिहरी को एक मेडिकल काॅलेज दिया जाय। मुझे लगता है कि टिहरी के साथ हमेशा समस्या तो रही ही है जो भी जनहित की चीजें रही हैं उनकी रक्षा हम लोग नहीं कर पा रहे हैं। मुख्यमंत्री जी ने कहा है कि जनभावनाओं के अनुरूप मेडिकल कॉलेज बनेगा। मैं इतना कह सकता हूं कि मैं अपने प्राण देकर टिहरी के मेडिकल काॅलेज की रक्षा करूंगा, इससे आप मेरी भावना समझ सकते हैं। टिहरी की जनता ने अपनी जनभावनाएं दिखा दी है कि जनता क्या चाहती है। इस आंदोलन में एक अच्छी बात यह रही कि न तो किसी के खिलाफ बोला गया और न ही किसी के विरुद्ध नारे लगाए गए यह जनता का एक सकारात्मक जनभावनाएं ही हैं। सिर्फ एक बात कही गई कि हमारा मेडिकल काॅलेज हमें दिया जाए।
किशोर उपाध्याय, विधायक, टिहरी

हकीकत यह है कि अभी तक टिहरी के लिए कोई मेडिकल कॉलेज स्वीकृत नहीं हुआ है। हमने आरटीआई से सरकार से जवाब मांगा है लेकिन आज तक हमें टिहरी में मेडिकल कॉलेज की स्वीकृति का एक भी पत्र नहीं मिला। मेडिकल काउंसलिंग द्वारा स्वीकृत पत्र तक नहीं मिला। मुख्यमंत्री जी ने एक घोषणा 1888- 2023 की थी जिसमें मेडिकल कॉलेज बनाने की बात कही थी लेकिन फिर कुछ समय बाद उन्होंने अपनी घोषणा को विलोपित कर दिया और कहा कि मेडिकल काॅलेज नहीं हम टिहरी में 200 बेड का ट्रामा सेंटर बनाएंगे लेकिन आज तक न तो मेडिकल काॅलेज बना और न ही ट्रामा सेंटर बना। टिहरी में इणिया में जमीन का चयन स्थानीय विधायक ने किया उन्होंने इसके लिए प्रयास किए लेकिन हकीकत में उनका भी यह प्रस्ताव ही है। अब उस प्रस्ताव पर नई स्थिति यह है कि स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल जी कहते हैं कि वे इस मेडिकल कॉलेज को अपने क्षेत्र नरेंद्र नगर में ले जाना चाहते हैं। इससे जनता उद्वेलित हो गई है जो कि सही है। इसके लिए आंदोलन शुरू हो गया है और इसके लिए एक संयुक्त संघर्ष समिति का गठन कर दिया गया है जिसमें सभी लोग शामिल हैं। दलगत राजनीति से उठकर सभी लोग टिहरी के मेडिकल कॉलेज के निर्माण के लिए आंदोलन कर रहे हैं। हमारी राज्य सरकार से एक ही मांग है कि शीघ्र ही सरकार इसका शासनादेश जारी करे। मेडिकल काउंसलिंग के जो मानक और क्वेरी है उनको पूरा करे और एनओसी जारी करे। टिहरी के अलावा कहीं और हम मेडिकल कॉलेज नहीं जाने देंगे। यह तो जनता ने बता दिया और मुख्यमंत्री जी ने कहा है कि जनभावनाओं के अनुरूप मेकिल काॅलेज बनेगा तो टिहरी की जनता ने अपनी जनभावनाएं दिखा दी हैं।
शांति प्रसाद भट्ट, प्रदेश प्रवक्ता एवं पूर्व जिला अध्यक्ष, कांग्रेस टिहरी

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